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कोरोना वायरसः घर, बाहर या फिर दफ्तर में, कहां सबसे ज्यादा संक्रमण का खतरा?

Fri, 29 May 2020 05:05 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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दुनिया लॉकडाउन से धीरे-धीरे बाहर आ रही है - फोटो : PTI
क्या आपको जॉगिंग करने वालों या गाना गाने वालों से संक्रमित होने का डर हो सकता है? बस की कतार में खड़े किसी शख्स के छींकने से मुझे कितना खतरा हो सकता है? क्या मुझे रेस्टोरेंट जाना चाहिए? मुझे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं?

जिस तरह दुनिया लॉकडाउन से धीरे-धीरे बाहर आ रही है और आर्थिक गतिविधियां भी शुरू हो रही हैं, उससे कोरोना वायरस से संक्रमित होने और इसके फैलने का खतरा बढ़ गया है। इससे संक्रमण की दूसरी लहर के पैदा होने का डर भी बढ़ गया है।
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Coronaindia - फोटो : PTI
इम्युनोलॉजिस्ट और बायोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर एरिन ब्रोमेज अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ मेसाचुसेट्स में संक्रामक बीमारियों के बारे में पढ़ाते हैं। वे कोरोना महामारी पर भी गहराई से नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कोरोना वायरस के खतरों पर एक ब्लॉगपोस्ट लिखा है जिसे करीब 1.6 करोड़ बार पढ़ा जा चुका है। सामान्य जिंदगी की ओर लौटने के दौरान आप खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं, इस बारे में उन्होंने सलाह दी है।
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कोरोना वायरस: संयम बनाए रखना जरूरी - फोटो : PTI
कैसे रहेंगे सुरक्षित
लोग कहां बीमार होते हैं? डॉ. ब्रोमेज कहते हैं कि ज्यादातर लोग अपने घरों में परिवार के ही किसी सदस्य के जरिए संक्रमित होते हैं। लेकिन, घर के बाहर कैसे सुरक्षित रहें? क्या हम पार्क में अपनी रोजाना की वॉक के दौरान खतरे में होते हैं? क्या बिना फेस मास्क लगाए कोई जॉगिंग करने वाला शख्स अनजाने में ही किसी को संक्रमित कर सकता है?

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संयम बनाए रखना जरूरी - फोटो : PTI
प्रोफेसर कहते हैं, शायद ऐसा नहीं होगा। उन्होंने बीबीसी को बताया, "जब आप बाहर निकलते हो, तो खुले वातावरण में ऐसी क्षमता होती है, जिससे सांस छोड़ते समय वायरस तेजी से कमजोर पड़ सकते हैं।" ये ऐसा इसलिए हैं क्योंकि किसी वायरस को आपको संक्रमित करने के लिए जितना वक्त चाहिए, उतने वक्त तक आप उसके संपर्क में खुले वातावरण में नहीं रहते, क्योंकि वायरस तेजी से निष्प्रभावी हो सकते हैं।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
उन्होंने अपने ब्लॉगपोस्ट में लिखा है, "संक्रमित होने के लिए आपका वायरस की संक्रामक डोज के संपर्क में आना जरूरी है। मर्स और सार्स की संक्रामक डोज के अध्ययनों के आधार पर कुछ अनुमानों से पता चल रहा है कि संक्रमण को टिकने के लिए कम से कम 1,000 सार्स-कोव 2 वायरल पार्टिकल्स की जरूरत होती है।"
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कोरोना वायरस (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
यह आंकड़ा बहस का विषय है और प्रयोगों के माध्यम से इसे पुख्ता तौर पर प्रमाणित किया जाना जरूरी है, लेकिन यह एक अहम संदर्भ देता है जो कि यह बताता है कि यह संक्रमण किस तरह से हो सकता है। इसका मतलब यह है कि अगर हम कम समय के लिए संक्रमित लोगों के संपर्क में आते हैं, मसलन, अगर कोई जॉगिंग करने वाला अनजाने में आपके नजदीक से गुजरता है तो इससे आपके अंदर संक्रमण पैदा होने लायक डोज आना मुश्किल है।
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
किन हालातों में हमें ज्यादा चिंतित होने की जरूरत है?
जिन लोगों में लक्षण नजर आ रहे हैं। उनके खांसने और छींकने से निश्चित तौर पर बीमारी फैलती है, लेकिन इसकी दर अलग-अलग है। एक बार की खांसी से करीब 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से करीब 3,000 बूंदें निकलती हैं। डॉ. ब्रोमेज के मुताबिक, ज्यादातर बूंदें बड़ी और भारी होती हैं। इसका मतलब यह है कि ये जल्दी ही सतह पर गिर जाती हैं। लेकिन कुछ बूंदें हवा में बनी रहती हैं और कमरे में भी घुस सकती हैं।
 

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कोरोना की जांच करवाती एक महिला(File Photo) - फोटो : पीटीआई
अगर आप किसी ऐसी लिफ्ट में फंस गए हैं जिसमें कोई शख्स खांसने की बजाय छींकता है तो आपकी दिक्कत दस गुना बढ़ जाएगी। एक छींक से करीब 30,000 बूंदें निकलती हैं। इनमें छोटी बूंदें काफी दूर तक चली जाती हैं। इनकी स्पीड 320 किमी प्रति घंटे तक होती है। उन्होंने लिखा है, "अगर कोई शख्स संक्रमित है तो उसकी एक खांसी या छींक में 20 करोड़ वायरस पार्टिकल्स तक हो सकते हैं।" ऐसे में अगर आप किसी व्यक्ति से आमने-सामने बैठकर बात कर रहे हैं और अगर वह व्यक्ति छींक या खांस देता है तो आपमें 1,000 वायरल पार्टिकल आराम से आ जाएंगे और आप संक्रमित हो जाएंगे।

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कोरोना की जांच करवाती एक महिला(File Photo) - फोटो : पीटीआई
बिना लक्षण वाले स्प्रेडर
हमें पता है कि लोगों में लक्षण नजर आने से करीब पांच दिन पहले से वे संक्रमित हो सकते हैं। कुछ में तो हो सकता है कि कभी भी ये लक्षण नजर ही नहीं आएं। यहां तक कि सांस से भी वायरस की कॉपी हवा में आ जाती हैं। लेकिन कितनी?

डॉ. ब्रोमेज के मुताबिक, "एक सांस से 50 से 5,000 बूंदें निकलती हैं। इनमें से ज्यादातर बूंदों की रफ्तार कम होती है और ये जल्दी ही सतह पर गिर जाती हैं।" जब हम अपनी नाक से साँस लेते हैं तो और भी कम बूंदें रिलीज होती हैं।

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कोरोना वायरस (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
अहम बात यह है कि सांसें ताकत के साथ बाहर नहीं निकलती है, ऐसे में निचले श्वसन तंत्र से वायरल पार्टिकल बाहर नहीं निकलते हैं। यह चीज अहम है क्योंकि श्वसन तंत्र के इस हिस्से में पाए जाने वाले टिश्यूज में ही कोरोना वायरस ज्यादा पाया जाता है।

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कोरोना वायरस - फोटो : पीटीआई
हमें नहीं पता कि सांस के साथ सार्स-कोव2 के कितने वायरल पार्टिकल्स बाहर निकलते हैं, लेकिन डॉ. ब्रोमेज एक स्टडी के बारे में बताते हैं जिसमें कहा गया है कि इंफ्लूएंजा से संक्रमित कोई शख्स एक मिनट की सांस में 3 से 20 वायरस आरएनए कॉपीज रिलीज करता है।

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कोरोना वायरस (File Photo) - फोटो : PTI
डॉ. ब्रोमेज के मुताबिक, बोलने से रेस्पिरेटरी बूंदों का निकलना 10 गुना बढ़कर करीब 200 कॉपीज वायरस प्रति मिनट पर पहुंच जाता है। गाने और चिल्लाने दोनों से हवा में बूंदों की मात्रा काफी बढ़ जाती है। ये बूंदें ऐसे इलाकों से भी आती हैं जहां टिश्यूज के संक्रमित होने के आसार अधिक होते हैं। वह कहते हैं, "ऐसे में जिस भी वजह से ताकत के साथ बूंदें बाहर निकलती हैं तो इनमें वायरस वाले टिश्यूज से ज्यादा बूंदें आ जाती हैं।"

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कोरोना वायरस(File Photo) - फोटो : PTI
किस तरह का माहौल खासतौर पर जोखिम भरा होता है?
निश्चित तौर पर ऐसे प्रोफेशन जिनमें लोगों को सीधे तौर पर संक्रमितों के साथ काम करना पड़ता है उनके संक्रमित होने के अधिक आसार होते हैं। ब्रोमेज कहते हैं कि ओपन प्लान ऑफिस में होने वाले इवेंट्स, स्पोर्ट्स और सोशल इवेंट्स जोखिम भरे होते हैं। इन मौकों पर लोग वायरस से संपर्क में आने के खतरे में होते हैं।

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फाइल फोटो - फोटो : PTI
वह कहते हैं, "यहां तक कि कॉल सेंटर जैसी जगहों पर अगर लोग 50 फीट की दूरी पर भी हों तो वायरस की एक कम डोज भी अगर लंबे वक्त तक बनी रहे तो यह संक्रमित करने के लिए पर्याप्त होती है।" जैसे-जैसे हम काम पर वापस लौट रहे हैं कुछ प्रोफेशंस के लिए यह खास तौर पर चिंता की बात है। ऐसे ओपन प्लान ऑफिस जिनमें हवा के आने-जाने की अच्छी व्यवस्था न हो, वे बड़ी दिक्कत की वजह बन सकते हैं।

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डेंटिस्ट - फोटो : पेक्सेल्स
डेंटिस्ट्स के साथ भी ऐसा ही है। डेंटिस्ट्स के यहां एक साथ अधिक लोग नहीं होते हैं, लेकिन ये ज्यादा जोखिम में होते हैं। वह कहते हैं कि शिक्षण के काम से जुड़े लोग भी ज्यादा जोखिम में हैं। उनके मुताबिक, "उम्रदराज शिक्षकों और प्रोफेसरों के साथ युवा लोग एक ही कमरे में बड़ी तादाद में होते हैं। इस चीज पर काफी विचार किया जाना चाहिए कि इन जगहों को कैसे सुरक्षित बनाया जा सकता है।"

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ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
इनडोर और आउटडोर
डॉ. ब्रोमेज कहते हैं कि खुले वातावरण में संक्रमण के काफी कम मामले देखे गए हैं। हवा और जगह वायरल लोड को घटा देते हैं। साथ ही धूप, गर्मी और आर्द्रता भी वायरस को ज्यादा देर जिंदा नहीं रहने देते हैं। सामाजिक दूरी और आपसी मेलजोल की अवधि में कमी से भी जोखिम कम होता है।

लेकिन, कुछ खुली जगहों पर मेलजोल काफी जोखिम भरे हो सकते हैं। लोगों के बात करने, गाने, या चिल्लाने या फिर लोगों से भरे हुए इवेंट्स में अधिक खतरा होता है। साथ ही बंद जगहों पर सामाजिक दूरी के उपाय भी समय के साथ कमजोर पड़ जाते हैं।

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मरीज की जांच करते डॉक्टर (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
लेकिन, कुछ इंडोर संपर्क काफी जोखिम भरे हो सकते हैं। लोगों के बात करने, गाने, या चिल्लाने जैसे लोगों से भरे हुए इवेंट्स में हाई रिस्क होता है। साथ ही इंडोर जगहों पर सामाजिक दूरी के उपाय भी वक्त के साथ कमजोर पड़ जाते हैं।

सीमित हवा की आवाजाही और रीसाइकिल्ड एयर भी खासतौर पर दिक्कत पैदा करती है। लेकिन, शॉपिंग कम जोखिम भरी होती है। खासतौर पर जब आप एक सिंगल माहौल में अपेक्षाकृत कम वक्त गुजारते हैं। हवा की सीमित आवाजाही और रिसाइकिल्ड हवा खासतौर पर दिक्कत भरी हो सकती है।

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चिकित्सक(File Photo) - फोटो : अमर उजाला
जोखिम का आकलन
डॉ. ब्रोमेज कहते हैं कि कोरोना की पाबंदियों के हटने के बीच हमें जोखिम के लिहाज से अपनी गतिविधियों का गंभीरता से आकलन करना चाहिए। बंद जगहों में उस जगह हवा की आवाजाही पर विचार कीजिए। यह सोचिए कि वहां कितने लोग एक वक्त पर मौजूद होंगे और आप वहां कितना वक्त गुजारने वाले हैं।

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मुंबई में एक निजी क्लीनिक के बाहर लोग (File Photo) - फोटो : PTI
वह कहते हैं, "अगर आप एक अच्छी हवादार जगह पर कम लोगों के साथ बैठे हैं तो आपके लिए जोखिम कम है। अगर आप किसी ओपन फ्लोर प्लान ऑफिस में हैं तो आपको गंभीरता के साथ जोखिम (जगह के वॉल्यूम, लोग और हवा की आवाजाही की स्थिति) पर गौर करना चाहिए। अगर आप एक ऐसी नौकरी में हैं जहां आपको लोगों से आमने-सामने बात करनी पड़ती है या और बुरी स्थिति में आपको चिल्लाना पड़ता है तो आपको अपने जोखिम का फिर से आकलन करने की जरूरत है।"
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कोरोना वायरस के कारण हालात खराब होते जा रहे हैं(File photo - फोटो : PTI
मिसाल के तौर पर, शॉपिंग मॉल में अगर आप कम भीड़ वाले स्टोर में और अच्छी हवादार जगह पर कम वक्त गुजारते हैं तो आपके संक्रमित होने के आसार कम हैं। खुली जगहों पर संक्रमण का जोखिम कम होता है क्योंकि संक्रामक बूंदें जल्दी ही खत्म हो जाती हैं।
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