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कोरोना वायरस: क्या गर्भ में ही मां से बच्चे को संक्रमण हो सकता है?

Mon, 27 Apr 2020 09:22 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस - फोटो : सोशल मीडिया
कोविड19 क्योंकि एक नया वायरस है इसलिए उसे लेकर कई सवालों के जवाब खोजे जा रहे हैं। गर्भवती महिला और उसके बच्चे पर इसके असर का भी पता लगाया जा रहा है। इस संबंध में अलग-अलग तरह के मामले देखने को मिले हैं। किसी मामले में गर्भवती मां को कोरोना का संक्रमण है लेकिन बच्चा पूरी तरह स्वस्थ पैदा हुआ है। किसी मामले में मां स्वस्थ है लेकिन बच्चे को पैदा होने के बाद इंफेक्शन हुआ है। लेकिन, ऐसे भी मामले हैं जिनमें मां कोविड19 से संक्रमित है और बच्चा भी पैदा होने के कुछ घंटों के अंदर ही वायरस से संक्रमित पाया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बच्चे को मां के गर्भ में ही कोरोना वायरस हो गया था? क्या ऐसा संभव है?

इस संबंध में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) का एक अध्ययन सामने आया है, जिसमें बताया गया है, “मौजूदा प्रमाण बताते हैं कि गर्भ के अंदर ही मां से बच्चे को कोविड19 का संक्रमण हो सकता है। हालांकि, हर मामले में ऐसा हो ये जरूरी नहीं है। पर ऐसा हो सकता है। आईसीएमआर के अध्ययन के मुताबिक इस बात की जानकारी नहीं मिली है कि इंफेक्शन किस स्तर पर होगा और बच्चे को कितना प्रभावित करेगा।
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कोरोना वायरस - फोटो : pixabay
मां से बच्चे में कैसे ट्रांसफर होता है वायरस
एक मां से बच्चे में कोई वायरस अलग-अलग तरह से ट्रांसफर हो सकता है। जरूरी नहीं कि गर्भ में ही बच्चे को वायरस का संक्रमण हो। इस संबंध में स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉक्टर शालिनी अग्रवाल कहती हैं, “क्योंकि ये एक नई बीमारी है इसलिए इसे लेकर अभी अध्ययन किया जा रहा है। कुछ वायरस ऐसे होते हैं जो पेट में ही मां से बच्चे में चले जाते हैं। जैसे कि अगर मां को मलेरिया है तो बच्चे को भी हो सकता है। एचआईवी में मां से बच्चे में ट्रांसमिशन की आशंका कम होती है।”

“कुछ वायरस ऐसे भी होते हैं जो बच्चे को तब प्रभावित करते हैं जब वो पैदा हो रहा होता है। पैदा होने के बाद बच्चा मां के करीब रहता है तब भी कोई वायरस पकड़ सकता है। ये संभावना हर मां और बच्चे के साथ बदल सकती है।”
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कोरोना वायरस - फोटो : सोशल मीडिया
गर्भवती महिलाओं को कोरोना से कितना खतरा
आईसीएमआर के मुताबिक गर्भधारण के दौरान मां की प्रतिरोधक क्षमता कुछ कम हो जाती है। तब मां किसी भी वायरस से जल्दी संक्रमित हो सकती है। पहले से मौजूद वायरस के मामले में तो ये बात साबित हो चुकी है। संभावना है कि कोविड19 का भी गर्भधारण में ऐसा असर हो सकता है। गर्भ में पल रहा बच्चा मां और पिता से बना हुआ एक नया अंश होता है और सामान्य प्रतिरोधक क्षमता होने पर शरीर इस बच्चे के ही खिलाफ काम कर सकता है, ऐसा न हो इसीलिए गर्भावस्था के दौरान प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।”

आईसीएमआर के मुताबिक कोरोना वायरस के दौरान समय से पहले डिलीवरी के मामले भी बढ़े हैं लेकिन ये नहीं कहा जा सकता कि ऐसा कोविड19 के कारण हुआ है। इस पर शोध किया जा रहा है। हालांकि, इस बात के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं कि कोविड19 के कारण समय से पहले डिलीवरी या गर्भपात हो रहे हैं या किसी अन्य तरह की दिक्कते आ रही हैं।

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कोरोना वायरस - फोटो : Pixabay
कैसे करें बचाव
गर्भधारण के दौरान मां और बच्चे की कोविड19 से सुरक्षा कैसे की जा सकती है। गर्भ के अंदर बच्चे को संक्रमण से बचाना है तो सबसे पहले मां को संक्रमण से बचाना होगा। इसके लिए भी वही सावधानियां बरतने की जरूरत है जो सभी के लिए बताई गई हैं-
  • हाथ साफ रखना, मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखना, हाथ ना मिलाना,
  • जिन्हें किसी भी तरह का इंफेक्शन है या कोविड19 होने की संभावना है तो उनसे दूरी बनाए रखना।
  • गर्भधारण के दौरान इन सभी बातों का ज्यादा सख्ती से ध्यान रखे जाने की जरूरत है।
  • अगर मां को प्रसव से पहले ही कोरोना वायरस है तो जरूरी नहीं की बच्चे में भी संक्रमण हो जाए। बाद में जांच के बाद ही इसका पता लगता है। इसलिए कुछ सावधानियां रखकर बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सकता है।
  • बच्चे को मां से कुछ समय के लिए दूर रखा जाता है। ताकि बच्चे को मां की सांसों या ड्रॉपलेट्स से किसी तरह का संक्रमण ना हो।
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कोरोना वायरस - फोटो : pixabay
मां का दूध पिलाया जा सकता है?
मां का दूध नवजात के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इसे एक तरह से संपूर्ण आहार कहा जाता है। कई महीनों तक बच्चा मां के दूध से ही अपना पेट भरता है। मां के दूध पर कोविड19 के असर को लेकर भी आईसीएमआर में अध्ययन किया गया है। इसके मुताबिक मां के दूध में कोविड19 नहीं पाया गया है। ऐसे में बच्चे को मां का दूध पिलाया जा सकता है। हालांकि, अगर वायरस के खतरे के चलते बच्चे को अस्थायी तौर पर मां से अलग रखा जाता है और दूध पिलाया जाता है तो इस संबंध में कुछ दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
  • मां और बच्चे को अस्थायी तौर पर अलग रखने के खतरे और फायदे को लेकर मां के साथ बातचीत करें।
  • जब तक जांच नहीं हो जाती नवजात को एक अलग कमरे में रखा जाए।
  • मां अगर बच्चे को दूध पिलाना चाहती है तो एक सैनिटाइज ब्रेस्ट पंप की मदद से दूध निकालकर बच्चे को पिलाया जाए।
  • अगर मां खुद बच्चे को दूध पिलाना चाहती है तो हर बार दूध पिलाने से पहले मां मास्क पहने और हाथ की सफाई करे।

बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत नई होती है। वो किसी भी तरह की बीमारी को नहीं पहचानता है। इसलिए बच्चे को वैक्सीन दी जाती है ताकि इसकी बीमारी का हमला होने पर बच्चे का शरीर उसे पहचानकर बचाव कर सके।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
गर्भवती महिलाओं में हल्का संक्रमण
आईसीएमआर के मुताबिक गर्भवती महिलाओं में कोविड19 संक्रमण के अभी तक आए मामलों में पाया गया है कि संक्रमण हल्का था और वो तेजी से ठीक भी हुई हैं। 28 हफ्ते के बाद जोखिम और ज्यादा होता है। इस समय पर इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है और उस वक्त ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। हृदय रोग से पीड़ित महिलाओं को ज्यादा खतरा है। कोरोना वायरस महामारी ने महिलाओं में प्रसव को लेकर चिंता और अवसाद का खतरा बढ़ा दिया है। ऐसे में महिलाओं और उनके परिवार को जहां तक संभव हो सहयोग की जरूरत है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
किसकी पुष्टि नहीं हुई है-
  • आईसीएमआर के मुताबिक अभी तक के शोध में इन बातों की पुष्टि नहीं हुई है।
  • इस बात के प्रमाण नहीं हैं कि कोविड19 के कारण गर्भपात या गर्भ को किसी अन्य तरह का नुकसान हो सकता है।
  • इस बात के प्रमाण नहीं हैं कि बच्चे में कोविड19 के कारण जन्म से ही कोई विकृति हो सकती है।
  • अभी तक इसके भी संकेत नहीं मिले हैं कि कोविड19 के कारण गर्भपात की जरूरत हो।

इसके अलावा आईसीएमआर ने प्रसव से संबंधित दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। जैसे कि ऐसे मामलों के लिए अस्पताल में कैसी सुविधाएं होनी चाहिए और मेडिकल स्टाफ को क्या सावधानियां रखनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चे में कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए उनके टेस्ट को लेकर भी आईसीएमआर ने एक आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक हॉटस्पॉट्स वाले इलाकों में रह रहीं जिन गर्भवती महिलाओं का प्रसव होने वाला है उनका कोविड19 के लिए टेस्ट किया जाएगा। भले ही उनमें कोरोना वायरस के लक्षण नजर ना आ रहे हों।
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