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कोरोना: डबल म्यूटेंट वैरिएंट कितना खतरनाक, वैक्सीन असरदार या नहीं, जानें हर सवाल का जवाब

Tue, 20 Apr 2021 04:24 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi

डॉ. राजन गांधी

जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष 


देशभर में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह 10 राज्यों में डबल म्यूटेंट वायरस का सक्रिय होना बताई जा रही है। दरअसल, वैज्ञानिकों ने कोरोना की दूसरी लहर के बारे में जीनोम सीक्ववेंसिंग की रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें कहा गया है कि दो अप्रैल के पहले के 60 दिनों में की गई जीनोम सीक्ववेंसिंग में कोरोना का डबल म्यूटेंट वैरिएंट सबसे अधिक पाया गया है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि डबल म्यूटेंट को ही दूसरी लहर के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नया वैरिएंट अब तक दुनिया के करीब 10 देशों में मिल चुका है। आइए जानते हैं कि आखिर ये डबल म्यूटेंट वैरिएंट है क्या और यह कितना खतरनाक है? 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या है डबल म्यूटेंट वैरिएंट? 
  • जब कोरोना वायरस के दो बदले हुए वैरिएंट एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और उससे एक नया और तीसरा वैरिएंट जो बनता है, उसे ही डबल म्यूटेंट वैरिएंट कहा जाता है। भारत में कोरोना के E484Q और L452R वैरिएंट ने मिलकर डबल म्यूटेंट वायरस बनाया है, जिसे वैज्ञानिक तौर पर B.1.617 नाम दिया गया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
भारत में कहां-कहां मिला है डबल म्यूटेंट वैरिएंट?
  • कोराना का डबल म्यूटेंट वैरिएंट देश के जिन राज्यों में तेजी से फैल रहा है, उनमें महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, गुजरात, कर्नाटक और मध्यप्रदेश प्रमुख हैं। यहां यह वायरस घातक रूप ले चुका है। माना जा रहा है कि दिल्ली में डबल म्यूटेंट और कोरोना के ब्रिटेन वैरिएंट दोनों का साझा हमला है, जबकि महाराष्ट्र में भी इन दोनों ही वैरिएंट्स से संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
कितना खतरनाक है डबल म्यूटेंट वैरिएंट? 
  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले महीने बताया था कि कोरोना का यह डबल म्यूटेंट वैरिएंट संक्रामक है और शरीर के इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र से भी बचने में सक्षम है। यह शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र से बचकर संक्रामकता को बढ़ाता है। हालांकि शोधकर्ता अभी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि एंटीबॉडी इसपर कितना असर करती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डबल म्यूटेंट वैरिएंट बढ़ा देता है वायरल लोड 
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि कई बार म्यूटेट होने के बाद वायरस कमजोर हो जाता है, लेकिन कई यह पहले से ज्यादा खतरनाक भी हो जाता है। दरअसल, वायरस जब शरीर की कोशिका पर हमला करता है, तो कोशिका कुछ ही घंटों में वायरस की हजारों प्रतिलिपि बना देती है, जिससे वायरल लोड बढ़ जाता है और संक्रमित मरीज गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डबल म्यूटेंट वैरिएंट पर कोरोना वैक्सीन कितनी असरदार? 
  • अभी यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता। फिलहाल इसपर शोध जारी है कि कोरोना वैक्सीन डबल म्यूटेंट वैरिएंट पर असरदार है या नहीं, लेकिन माना जा रहा है कि भारत में मौजूद कोविशील्ड और कोवैक्सिन इस वैरिएंट के खिलाफ कारगर हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ये सावधानियां बरतें, कोरोना से बचें 
  • मास्क लगाएं 
  • बार-बार हाथ धोएं या सैनिटाइजर का उपयोग करें 
  • अगर कोई खांस या छींक रहा है, तो उससे उचित दूरी बनाए रखें 
  • सुरक्षित शारीरिक दूरी बनाए रखें 
  • भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें 
  • अगर आप अस्वस्थ महसूस कर रहे हैं, तो घर पर ही रहें 
  • स्वास्थ्य संबंधी किसी भी तरह की परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लें 
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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