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विशेषज्ञ से जानें: कोरोना का डेल्टा प्लस वैरिएंट कितना खतरनाक, क्या इसके लक्षण अलग हैं?

Mon, 28 Jun 2021 03:06 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना का नया वैरिएंट डेल्टा प्लस - फोटो : iStock
देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर में संक्रमण के मामलों में लगातार गिरावट जारी है। बीते 24 घंटे में 46 हजार से अधिक नए मामले सामने आए हैं, जबकि 900 से अधिक लोगों की मौत हुई है। इस बीच कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट ने अलग चिंता में डाल दिया है। इसे काफी खतरनाक माना जा रहा है, जो महामारी की तीसरी लहर का कारण बन सकता है। कोरोना पर केंद्र सरकार को सलाह देने वाली एजेंसी 'नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन' ने इस वैरिएंट को फेफड़ों के लिए अधिक घातक बताया है। वही एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर और डेल्टा प्लस वैरिएंट के लिए हम तैयार हैं और इससे निपटने के लिए हमें बीते समय में मिले सबक से सीखना होगा। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना और वैक्सीन से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब... 
 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
डेल्टा प्लस वैरिएंट की काफी चर्चा हो रही है, यह कितना खतरनाक है? 
  • दिल्ली स्थित आरएमएल अस्पताल के डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'वायरस हमेशा अपना जेनेटिक स्ट्रक्चर (आनुवंशिक संरचना) बदलता रहता है, इसमें वायरस का स्पाइक प्रोटीन बदल जाता है। यह डेल्टा प्लस वैरिएंट काफी खतरनाक माना जा रहा है। इसमें मोनोक्लोनल एंटीबॉडी भी प्रभावी नहीं हो सकती हैं या जिन्हें वैक्सीन लगी है, उन्हें भी संक्रमण हो सकता है। अभी तक देश में करीब 50 केस आ चुके हैं। इस वैरिएंट को लेकर भारत सरकार और डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) भी कंसर्न हैं। इसे रोकने का फिलहाल यही तरीका है कि जहां से भी केस आ रहे हैं, तुरंत कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग कराएं और उन्हें आइसोलेट करें। इसके अलावा लोगों को वैक्सीन लगी है या नहीं, कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर का पालन करें, बाहर जाते वक्त डबल मास्क का उपयोग करें।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
डेल्टा प्लस के मल्टीप्लाई होने की संभावना क्या काफी तेज है? 
  • डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'इस नए वैरिएंट के संक्रमण की संभावना पुराने से कितनी तेज है, इसे लेकर स्टडी चल रही है। वैसे ये डेल्टा प्लस भी लगभग दो महीने पुराना ही है और करीब 8-10 देशों में फैल चुका है। हालांकि केस की संख्या बहुत ज्यादा मई में पाई गई है। हमारे देश में भी इसे एक महीने से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अब तक 50-60 केस ही आए हैं। इसके संक्रमण के इलाज में काफी समय लग रहा है, जो मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दी जा रही थी, उसका असर भी नहीं हुआ। इसलिए इसे थोड़ा ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। लेकिन वैरिएंट कोई भी हो, बचने का तरीका वही पुराना है।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या डेल्टा प्लस वैरिएंट के लक्षण भी अलग हैं? 
  • डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'अभी इस तरह का कोई मामला सामने नहीं आया है। कोरोना वायरस के अन्य वैरिएंट की तरह ही इसके भी लक्षण वही हैं। इनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, स्मेल-टेस्ट का जाना ही है।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन लगाने के बाद सेंटर पर दवा दी गई है, उसे क्या सभी को लेना है? 
  • डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'अगर किसी को वैक्सीन लगवाने के बाद कोई तकलीफ नहीं है तो दवा लेने की जरूरत नहीं है। कई बार वैक्सीन लगवाने के बाद कुछ लोगों को बुखार और शरीर में दर्द की समस्या आई है, इसके लिए डॉक्टर पैरासिटामोल लेने की सलाह देते हैं। लेकिन अगर समस्या नहीं है या जरूरत नहीं महसूस हो रही है, तो दवा न लें।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगने के बाद भी डेथ (मौत) हो रही है, इसकी क्या वजह है? 
  • डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'वैक्सीन से डेथ (मौत) का मामला अभी तक सामने नहीं आया है। जहां तक वैक्सीन की बात है तो लगवाने वाले व्यक्ति को भी कई बीमारियां हो सकती हैं। इसमें अगर व्यक्ति को पहली डोज के बाद कोरोना हो गया और कोमोरबिडिटी वाले मरीज हैं तो संक्रमण बढ़ सकता है या अन्य बीमारी भी मृत्यु का कारण बन सकती है। लेकिन वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है। कोरोना से वैक्सीन की बचाने की क्षमता 70 प्रतिशत तक है। इसलिए वायरस से बचाव के नियमों का पालन करना है।' 
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