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विशेषज्ञ ने चेताया: स्टेरॉयड ज्यादा लेने से हो सकती हैं ये तीन गंभीर समस्याएं, रहें सावधान

Thu, 29 Jul 2021 09:07 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
देश में कोरोना का संकट बरकरार है। राष्ट्रव्यापी कोविड टीकाकरण अभियान तो तेजी से चल रहे हैं, अब तक 44 करोड़ 61 लाख से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं, लेकिन ये संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। अब भी रोजाना हजारों संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। देश में इस समय तीन लाख 90 हजार से अधिक कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है। देश में संक्रमण से ठीक होने की दर फिलहाल 97.39 फीसदी है। अब तक तीन करोड़ छह लाख 63 हजार से अधिक मरीज कोरोना से स्वस्थ हो चुके हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि वे संक्रमण से ठीक हो गए तो पूरी तरह ठीक हो गए, बल्कि पोस्ट कोविड की समस्या एक अलग और गंभीर समस्या बनी हुई है। पोस्ट कोविड में फेफड़ों की समस्या भी देखी जा रही है। क्या स्टेरॉयड लेने से ऐसा हो सकता है? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना से जुड़े ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब... 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
पोस्ट कोविड में लंग्स में अभी भी समस्या है, क्या स्टेरॉयड लेने से ऐसा हो सकता है? 
  • दिल्ली स्थित एम्स के डॉ. नीरज निश्चल कहते हैं, 'सांस फूलना स्टेरॉयड की वजह से हो, जरूरी नहीं है। लेकिन अगर मरीज को स्टेरॉयड दिया गया है तो बीमारी गंभीर होगी। ऐसे लोगों के फेफड़ों में बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है, जिसे ठीक होने में सामान्य 3-6 महीने का वक्त लग सकता है। कई बार ऐसा भी होता है कि हमारे मन में एंग्जाइटी या कॉम्प्लेक्स हो जाता है, इस वजह से भी ऐसे लक्षण आते हैं। अगर स्टेरॉयड्स लिए हैं तो भी परेशान न हों, हेल्दी खाना खाएं, योग, प्राणायाम करें। परेशानी ज्यादा है तो डॉक्टर को दिखा सकते हैं।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
स्टेरॉयड के कॉमन साइड इफेक्ट क्या हैं? 
  • डॉ. नीरज निश्चल कहते हैं, 'स्टेरॉयड के बहुत फायदे हैं, लेकिन ज्यादा लेने से इसके साइड इफेक्ट भी होते हैं। इसलिए कहा जाता है कि इसे कोरोना का इलाज न समझें और संक्रमण के शुरुआती दौर में इसका सेवन बिल्कुल न करें। यह तब दिए जाते हैं, जब व्यक्ति में बीमारी मॉडरेट (मध्यम) से सीवियर (गंभीर) हो जाती है। ऐसे में लोगों को अगर स्टेरॉयड ज्यादा दी गई होती है तो किसी को डायबिटीज न हो तो भी शुगर लेवल बढ़ जाता है। इसके ज्यादा सेवन से कई बार हड्डियां भी कमजोर हो जाती हैं। इससे इम्यूनिटी कम होती है, तो फंगस जैसी बीमारी भी हो सकती है।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वर्तमान में कोरोना के प्रति लोगों के व्यवहार को लेकर क्या कहेंगे? 
  • डॉ. नीरज निश्चल कहते हैं, 'कहीं भी हमेशा लॉकडाउन नहीं लगाया जा सकता है। लोगों के कई कार्य, अर्थव्यवस्था को देखते हुए यह संभव नहीं है। लेकिन हर बार लॉकडाउन तब लगता है, जब लोग तमाम दिशा-निर्देश के बाद भी नियमों का पालन नहीं करते और केस बढ़ने लगते हैं। जब लॉकडाउन लग जाता है तो बहुत लोगों के जरूरी कार्य, इलाज और अन्य काम रह जाते हैं, जिससे बहुत नुकसान होता है। इस वजह से अभी ऐसा कुछ न करें कि फिर से लॉकडाउन लगे। लोगों की जो घूमने की प्रवृति है, इन सबसे ही तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या कोई वैक्सीन की सेकेंड डोज सीधे लगवा सकता है? 
  • डॉ. नीरज निश्चल कहते हैं, 'वैक्सीन की दोनों डोज एक ही है। इसलिए ऐसा नहीं है कि कोई दूसरी डोज पहले लेंगे तो कुछ समस्या होगी। जब भी कोई वैक्सीन पहली बार लगवाएगा, वह पहली डोज ही होगी। हां, दोनों डोज के बीच में गैप रखा गया है, ताकि एंटीबॉडी बनने का जो समय है और शरीर की जो प्रक्रिया है, वो सही से हो।'  
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोविड की मौजूदा स्थिति को कैसे देखते हैं? 
  • डॉ. नीरज निश्चल कहते हैं, 'सबसे जरूरी बात ये है कि केस की संख्या कम हुई है, लेकिन खतरा बरकरार है। इसलिए ये न सोचें कि अब वैक्सीन नहीं लगवाएंगे और घूमने निकल जाएं। ऐसा करने से अपने साथ ही अपने परिवार की जिंदगी खतरे में डाल रहे हैं। इसलिए सावधान और सतर्क रहें।' 
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