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सावधान: कोरोना से ठीक होने के बाद भी इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, हो सकती है बड़ी परेशानी

Tue, 11 May 2021 12:51 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)  


देश में कोरोना महामारी का कहर जारी है। अब तक दो लाख 50 हजार के करीब लोग संक्रमण की वजह से मारे जा चुके हैं, जबकि हर दिन लाखों नए संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। हालांकि राहत की बात ये है कि देश में अब तक एक करोड़ 90 लाख से अधिक लोग कोरोना से ठीक भी हो चुके हैं, लेकिन इस बीच एक और दिक्कत बनी हुई है। कोरोना से ठीक होने के बाद भी कई मरीजों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसे 'पोस्ट कोविड सिंड्रोम' कहते हैं। आइए जानते हैं इस 'पोस्ट कोविड सिंड्रोम' के लक्षण और इससे ठीक होने के उपायों के बारे में... 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
पोस्ट कोविड सिंड्रोम के लक्षण 
  • कोरोना से ठीक हो चुके अधिकांश मरीजों को थकान, कमजोरी, सांस फूलना और ठीक से नींद न आने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बहुत से लोगों को तो इतनी कमजोरी हो जाती है कि उन्हें रोजमर्रा के काम में भी दिक्कत महसूस होने लगती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि हल्का बुखार, चक्कर आना, जोड़ों में दर्द, चिड़चिड़ापन, सोचने-समझने की शक्ति खत्म हो जाना, लगातार उदास रहना, बेवजह चिंता करना, आदि भी पोस्ट कोविड को लक्षण माने जा सकते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना के मरीजों में एक बड़ी समस्या पल्मोनरी फाइब्रोसिस की है। इसमें फेफड़ों की ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे मरीजों को सांस फूलने की परेशानी लंबे समय तक रह सकती है।   

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
पल्मोनरी फाइब्रोसिस से कैसे निजात पाएं? 
  • विशेषज्ञों के मुताबिक, जिन मरीजों को पल्मोनरी फाइब्रोसिस की समस्या है, उनके लिए ब्रिदिंग एक्सरसाइज बहुत काम आती है। ऐसे मरीजों के लिए फेफड़ों पर बिना कोई अतिरिक्त दबाव डाले आराम से गहरी सांसे लेना और धीरे-धीरे छोड़ना बहुत लाभदायक होता है। हालांकि जिन मरीजों की स्थिति गंभीर होती है, उनके लिए चेस्ट फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है। इसमें डीप ब्रिदिंग एक्सरसाइज, चेस्ट वाइब्रेशन, चेस्ट परक्यूजन और पॉश्च्युरल ड्रेनेज जैसी कई थेरेपी शामिल होती हैं। इन थेरेपी की मदद से फेफड़ों जमा बलगम को बाहर निकालने में काफी मदद मिलती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
खानपान का विशेष ध्यान रखें ठीक होने वाले लोग
  • कोरोना से ठीक होने वाले लोगों को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। ऐसे लोगों अपने भोजन में खजूर, किशमिश, बादाम और अखरोट को शामिल करना चाहिए। इसके अलावा हल्का और सुपाच्य भोजन करें और शरीर में नमी बनाए रखने के लिए खूब पानी पिएं। सबसे जरूरी बात कि तली-भुनी, मसालेदार चीजों और जंक फूड से परहेज करें। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
नियमित रूप से व्यायाम करें 
  • कोरोना से ठीक होने वाले लोगों को नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए, क्योंकि इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। इसके अलावा व्यायाम से फेफड़ों को उचित मात्रा में वायु की आपूर्ति भी होती है और हृदय भी अपनी सामान्य गति से काम करने में सक्षम होने लगता है। लेकिन ध्यान रखें कि व्यायाम बहुत देर तक न करें और वैसी क्रियाएं ही करें जो बहुत अधिक थकाऊ न हों, नहीं तो फायदे की जगह इससे शरीर को नुकसान भी हो सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ये काम भी जरूर करें 
  • कोरोना से ठीक हुए लोगों को अपनी दिनचर्या सही रखनी होगी। सुबह जल्दी उठना चाहिए, व्यायाम करना चाहिए, टहलना चाहिए और संभव हो तो कुछ देर धूप भी लेना चाहिए। अगर ये सभी सावधानियां बरती जाएं तो पोस्ट कोविड सिंड्रोम से भी छुटकारा पाया जा सकता है और शरीर भी स्वस्थ रहता है। 
नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।  

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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