कोरोना वायरस का प्रकोप भारत में बढ़ता जा रहा है।
- फोटो : पीटीआई
लॉकडाउन की वजह से लगभग सभी तरह की आर्थिक गतिविधियों पर ब्रेक लग गया है। बड़े पैमाने पर लोगों के रोजगार छिन रहे हैं। पूरी दुनिया में मंदी का दौर शुरु होने वाला है। लेकिन मंदी का ये दौर अन्य दौर की मंदी से अलग होगा। क्योंकि, इस मंदी की मार सबसे ज्यादा महिलाओं पर पड़ने वाली है। अमेरिका में केवल मार्च महीने में करीब 10.40 लाख लोग बेरोजगार हुए हैं। 1975 के बाद अमेरिका में बेरोजगारी का ये सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसमें पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की नौकरियां ज्यादा गई हैं।
इसकी एक वजह ये भी है कि मर्द ज्यादातर ऐसे पेशे से जुड़े होते हैं जो आर्थिक चक्र चलाने में मदद करते हैं। जैसे मैन्यूफैक्चरिंग या कंस्ट्रक्शन कंपनी। जबकि महिलाएं ज्यादातर ऐसे पेशों से जुड़ी होती हैं जो आर्थिक चक्र सही चलने पर ही काम कर सकती हैं। जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं, रेस्टोरेंट, बार आदि। लॉकडाउन के समय में फिलहाल ये सभी बंद हैं। लॉकडाउन के बाद भी जब ये सब सेवाएं बहाल होंगी तो जरुरी नहीं कि होटलों, बार और पब में शामें पहले की तरह गुलजार होंगी। पैसे की तंगी से सामना तो हर इंसान को होगा। इसका सीधा असर यहां काम करने वाली महिलाओं पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रैवल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री में भी बड़े पैमाने पर महिलाएं ही काम करती हैं। अब जबकि यात्रा पर अनिश्चित काल के लिए पाबंदी है। तो, जाहिर है इस व्यवसाय से जुड़े सभी लोगों को इसका खामयाजा भुगतना होगा।