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Coronavirus Death Risk: यहां रहने वाले भारतीयों को मौत का ज्यादा खतरा, जानें क्या हैं कारण

Mon, 19 Oct 2020 02:36 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस मरीज को एयर एंबुलेंस से ले जाते हुए स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
कोरोना वायरस से इस वक्त दुनिया के 210 से ज्यादा देश जूझ रहे हैं। दुनियाभर के लोगों को इसकी एक सुरक्षित और कारगर वैक्सीन का इंतजार है। रूस और चीन जैसे देशों ने वैक्सीन तैयार कर ली है और इमेर्जेंसी अप्रूवल के तहत उच्च जोखिम समूह के लोगों को देना भी शुरू कर दिया है। वहीं, भारत, ब्रिटेन, अमेरिका, जर्मनी जैसे देश भी वैक्सीन पर कामयाबी के काफी करीब हैं। अमेरिका, ब्राजील, ब्रिटेन और कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में शामिल है। ब्रिटेन में भी बड़ी संख्या में एशियाई मूल के लोग रहते हैं। कोरोना से होने वाली मौतों को लेकर हाल ही में एक सांख्यिकीय विश्लेषण जारी हुआ है, जिसके परिणाम भारतीयों की चिंता बढ़ाते हैं। 
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कोरोना वायरस मरीज (File Photo) - फोटो : PTI
लंदन में बीते शुक्रवार को एक नया सांख्यिकीय विश्लेषण जारी हुआ है, जिसके मुताबिक, इंग्लैंड और वेल्स में रहने वाले भारतीयों की कोरोना से मौत की संभावना स्थानीय लोगों की तुलना में 50 से 75 फीसदी तक ज्यादा है। इस जोखिम वर्ग में भारतीय पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं। 'दि ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिक्स' (ONS) की ओर से नस्लीय अंतर पर ये आंकड़े जारी किए गए हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या कहती है रिपोर्ट?
  • 'दि ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिक्स' (ONS) ने पूर्व में कोरोना वायरस के प्रभाव को लेकर एक नस्लीय भिन्नता का निष्कर्ष निकाला था। ओएनएस ने इस हफ्ते अपने आंकड़ों को अपडेट किया है। ओएनएस के मुताबिक, इस असमानता के पीछे पहले से चली आ रही किसी बीमारी से ज्यादा रहन-सहन यानी जीवनशैली के अलावा पेशा भी जिम्मेदार है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इस रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई तक हुई मौतों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि अश्वेत और दक्षिण एशियाई लोगों में कोरोना से मौत का खतरा श्वेत लोगों की तुलना में ज्यादा है। इससे पहले 15 मई तक हुई मौतों में भी आएनएस ने ऐसे ही परिणाम मिलने का दावा किया था। बताया जा रहा है कि कोरोना से हुई मौतों का नस्लीय अंतर सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक कारकों के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सभी समुदायों में कोरोना से मौत का खतरा पुरुषों में महिलाओं से ज्यादा है। चीन के लोगों को छोड़ श्वेत लोगों में बाकी समुदायों से कम खतरा है। ओएनएस ने अपने पिछले विश्लेषण में बांग्लादेश और पाकिस्तान के लोगों में कोरोना से मौत के खतरे संबंधी आंकड़े दिए थे, जिसमें बांग्लादेश के पुरुषों में कोरोना से मौत का खतरा पाकिस्तान के पुरुषों से ज्यादा बताया था। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ओएनएस हेल्थ एंड लाइफ इवेंट्स विभाग के उन निदेशक बेन हम्बरस्टोरन ने कहा कि यह रिपोर्ट पुष्टि करती है कि कोविड-19 से जातीय अल्पसंख्यक समूहों में मृत्यु दर अधिक रहती है। इन अल्पसंख्यकों में ब्लैक अफ्रीकन, ब्लैक कैरेबियन, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी भी शामिल हैं। यह रिपोर्ट अस्पतालों से लिए गए डेटा और ओएनएस के सर्वे पर आधारित है। इसमें डायबिटीज, हार्ट फेल होन जैसी प्री एग्जिस्टिंग हेल्थ कंडीशन के आधार पर कोरोना से मृत्यु दर का विश्लेषण किया गया है। 
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