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कोरोना वायरस: क्या ब्लैक फंगस किसी भी कोविड मरीज को हो सकता है? विशेषज्ञ से जानें

Tue, 18 May 2021 08:04 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना महामारी की दूसरी लहर में ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस बीमारी ने एक नई और गंभीर चिंता पैदा कर दी है। यह देश के कई राज्यों में तेजी से फैल रहा है, जिसमें गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, ओडिशा, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और केरल शामिल हैं। सबसे चिंताजनक बात ये है कि इस बीमारी में कई मरीजों की आंख की रोशनी जा चुकी है और कईयों की तो मौत भी हो चुकी है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कि क्या ब्लैक फंगस किसी भी कोविड मरीज को हो सकता है और इससे बचने के लिए क्या सावधानी रखें? 
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म्यूकरमाइकोसिस पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
म्यूकरमाइकोसिस क्या है, इससे बचने के लिए क्या सावधानी रखें? 
  • पीएचएफआई के अध्यक्ष डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं, 'ये एक फंगस है, जो ज्यादातर नाक के जरिये होता है। यह नाक के जरिये आंख और दिमाग में भी पहुंच सकता है। अगर दिमाग में पहुंच जाता है तो जान के लिए खतरा बन जाता है। ये अक्सर उन लोगों में होता है, जिनमें किसी भी वजह से इम्यूनिटी कम होती है या डायबिटीज के मरीज हैं, उनमें ये बीमारी होती है। कोविड के उन मरीजों में ये ज्यादा पाया जा रहा है, जिन्हें स्टेरॉयड ज्यादा दी जाती है। इसलिए कोविड में किसी भी तरह की दवा ज्यादा लेने से बचें और जब भी लें डॉक्टर की सलाह पर लें। डॉक्टर्स भी स्टेरॉयड्स का तभी इस्तेमाल करें, जब वेंटिलेटर की जरूरत हो। उन्हें भी बहुत ज्यादा न दें, बहुत ज्यादा यानी लंबे समय तक सेवन करने के लिए न दें।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या ब्लैक फंगस किसी भी कोविड मरीज को हो सकता है? 
  • डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं, 'ब्लैक फंगस पहले से हमारे वातावरण में मौजूद है, लेकिन पहले ये बीमारी बहुत कम होती थी और अगर होती भी थी तो केवल डायबिटीज के मरीजों में। आज के समय में कोविड मरीजों को ऑक्सीजन के माध्यम से स्टेरॉयड देते हैं, तो जो ऑक्सीजन का पानी होता है, वो अगर दूषित हो गया है तो उससे नाक में फंगस हो जाता है। इस वक्त मरीज को ऑक्सीजन, एंटीबॉडी, स्टेरॉयड और कई तरह की दवा दी जाती है या कई बार लोग खुद बिना डॉक्टर की सलाह के लेते हैं, उनमें भी ब्लैक फंगस पाया गया है।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या होम आइसोलेशन में स्टेरॉयड ले सकते हैं? 
  • डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं, 'अगर घर में हैं और ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करके स्टेरॉयड, गोली और इंजेक्शन के माध्यम से दे सकते हैं। लेकिन इसे ज्यादातर उन्हीं को देते हैं, जो वेंटिलेटर पर होते हैं, उनकी जान बचाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। होम आइसोलेशन में रहने वाले लोगों को ध्यान रखना है कि कोविड बीमारी की शुरुआत में ही इसका प्रयोग न करें। इससे इम्यूनिटी कम होती है। होम आइसोलेशन में भी खुद से इसका प्रयोग न करें। जब ऑक्सीजन की कमी लगे तो सूंघ कर जो स्टेरॉयड देते हैं, उसे ले सकते हैं।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
बच्चों के लिए कब तक वैक्सीन आ जाएगी? 
  • डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं, 'जब तक ट्रायल पूरे नहीं हो जाते हैं, तब तक बच्चों को वैक्सीन नहीं दी जाएगी। कई दूसरे देशों में 16 साल तक के बच्चों पर ट्रायल पूरा हो चुका है और उन्हें वैक्सीन दी जा रही है। लेकिन अभी हमारे देश में पूरा ट्रायल होने के बाद ही वैक्सीन दी जाएगी। आने वाले दिनों में हो सकता है नाक के जरिये दी जाने वाली वैक्सीन आ जाए, तो उसे देना और आसान हो जाएगा। फिलहाल बच्चों को वायरस से बचाने के लिए घर के बड़ों की जिम्मेदारी है कि खुद मास्क पहनें, वैक्सीन लगवाएं और बाहर कम से कम जाएं।' 
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