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सावधान: फेफड़ों के अलावा इन अंगों को भी प्रभावित कर सकता है कोरोना वायरस, ऐसे करें पहचान

Thu, 29 Apr 2021 11:55 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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गंभीर रूप लेता जा रहा है कोरोना - फोटो : iStock
डॉ मनीष सिंघल
कैंसर रोग विशेषज्ञ
medically reviewed by Dr. Manish Singhal


कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने देश के हालात बेकाबू कर दिए हैं। वायरस के नए म्यूटेशन से उत्पन्न चुनौतियों और इसके जुड़े लक्षणों के अलावा ज्यादातर लोगों में वायरस का फेफड़ों पर गंभीर असर देखने को मिल रहा है। दूसरी लहर में बढ़े मौत के आंकड़ों के लिए इसे एक प्रमुख कारण के रूप में भी देखा जा रहा है। इस बीच विशेषज्ञों ने पाया है कि फेफड़ों के अलावा नए म्यूटेशनों का असर शरीर के अन्य अंगों पर भी देखने को मिल सकता है। तो क्या लोगों को और अधिक सावधान हो जाने की जरूरत है? आइए विशेषज्ञों से जानते हैं कि कोरोना वायरस का असर और किन-किन अंगों पर हो सकता है?
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फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है कोरोना - फोटो : Social Media
माना जाता रहा है कि सार्स-सीओवी-2 वायरस सबसे पहले श्वसन पथ को संक्रमित करता है, जिसके कारण लोगों को खांसी, सांस लेने में तकलीफ जैसी कठिनाई होती है। इसके अलावा यह रोगी के फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। स्वस्थ कोशिकाओं में प्रवेश करके यह वायरस शरीर में अपनी संख्या को बढ़ाता है, जिसके कारण फेफड़ों के ऊतकों और थैलियों पर  इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लेकिन हालिया मामलों में विशेषज्ञों ने पाया है कि इसका असर शरीर के अन्य अंगों पर भी देखा जा सकता है। 
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मधुमेह और उच्च रक्तचाप वाले रोगी विशेष सावधानी बरतें - फोटो : iStock
शरीर में अनुभव होने वाले सभी बदलावों को मॉनीटर करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर में कोरोना वायरस के बढ़ने के साथ ही यह विभिन्न हिस्सों में गंभीर सूजन का कारण बनता है। इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति को पहले से ही मधुमेह, उच्च रक्तचाप या मोटापे जैसी समस्या है तो उन लोगों में खतरा और अधिक हो सकता है। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ मनीष सिंघल कहते हैं कि ऐसे में रोगी को सभी लक्षणों की निगरानी करने के साथ शरीर में अनुभव होने वाले सभी परिवर्तनों पर भी विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। 

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हृदय पर भी प्रभाव डाल सकता है कोरोना - फोटो : iStock
हृदय पर कोरोना वायरस का असर
हृदय और मेटाबॉलिज्म जैसे रोगों से ग्रस्त लोगों में कोविड-19 का जोखिम और अधिक होता है। विशेषज्ञों ने पाया है कि सार्स-सीओवी-2 वायरस कोविड-19 संक्रमितों के हृदय की मांसपेशियों में गंभीर सूजन का कारण भी बन सकता है। हार्वर्ड हेल्थ पब्लिकेशन के अनुसार, कोविड-19 के एक-चौथाई रोगियों के रक्तप्रवाह में ट्रोपोनिन नामक एंजाइम की बढ़ी हुई मात्रा देखने को मिल रही है, इस वजह से संक्रमितों को असामान्य हृदय गति, सीने में दर्द और गंभीर थकान जैसे लक्षणों का अनुभव हो सकता है।
 
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कोविड-19 के कारण हो सकती है अल्जाइमर की दिक्कत - फोटो : Pixabay
न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं
कई रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि कोविड-19 के रोगियों को मानसिक भ्रम, सिरदर्द, चक्कर आने और धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण महसूस होते हैं। जामा न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि वुहान के एक अस्पताल में भर्ती 214 में से एक तिहाई रोगियों में दौरे और स्ट्रोक जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं देखने को मिली हैं। अध्ययन में यह भी दावा किया गया है कोविड-19 के दीर्घकालिक प्रभावों में रोगियों को अल्जाइमर और पार्किंसंस रोग की भी दिक्कत हो सकती है।
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देखने को मिल रहे हैं किडनी में खराबी के मामले - फोटो : iStock
किडनी में खराबी
विशेषज्ञों ने पाया कि कोविड-19 के कई रोगियों को किडनी मे समस्या भी हो रही है। जैसा की अब तक माना जा रहा है कि वायरस कोशिकाओं को प्रभावित करता है, डॉक्टरों का मानना है कि जब वायरस किडनी की कोशिकाओं में प्रवेश कर जाता है तो यह किडनी के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाकर गंभीर सूजन का कारण बन सकता है। जिसके कारण रोगियों को मूत्र उत्पादन में कमी और मूत्रपथ के गंभीर संक्रमण जैसी समस्या हो सकती है। 
 
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शरीर में होने वाले परिवर्तनों पर विशेष ध्यान रखें - फोटो : Social media
विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि कोविड-19 शरीर के विभिन्न भागों में गंभीर सूजन का कारण बनता है, ऐसे में यह रोगी के कोविड-19 से ठीक होने की रफ्तार को भी धीमा कर सकता है। वायरस न केवल फेफड़ों के लिए खतरनाक है, साथ ही यह आपके हृदय और मस्तिष्क पर भी गंभीर असर डाल सकता है। ऐसे में लोगों को शरीर में होने वाले परिवर्तनों पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। 

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नोट: यह लेख कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ मनीष सिंघल से बातचीत और विभिन्न अध्ययनों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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