Copper Bottle Toxicity: तांबे की बोतल में पानी पीने के फायदे तो आप सभी जानते होंगे। पर, अगर आप डिटॉक्स वाटर भी तांबे की बोतल में पीते हैं तो इस खबर को अवश्य पढ़ें।
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तांबे की बोतल इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां
- फोटो : AI
Copper Bottle Toxicity: तांबे की बोतल में रखा पानी पीना भारत में लंबे समय से स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता रहा है। आयुर्वेद में भी तांबे के पात्र में रखा पानी सुबह खाली पेट पीने की सलाह दी जाती है। इससे शरीर स्वस्थ रहता है।
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ही आजकल कई लोग तांबे री बोतल में ही नींबू, पुदीना, खीरा, अदरक या अन्य फलों के टुकड़े डालकर डिटॉक्स वाटर बनाकर पीते हैं। लेकिन क्या ऐसा करना सुरक्षित है? अगर आपको ये जानना है तो इस खबर को आखिर तक पढ़ें। हर किसी के लिए यह जानना जरूरी है कि तांबे की बोतल का सही इस्तेमाल कैसे करें और किन चीजों को इसमें रखने से बचना चाहिए।
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क्या तांबे की बोतल में डिटॉक्स वाटर रखना सही है?
तांबे की बोतल में सादा पानी रखना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसमें नींबू, संतरा, आंवला, सिरका या अन्य अम्लीय चीजें डालकर डिटॉक्स वाटर बनाना उचित नहीं माना जाता। अम्लीय पदार्थ तांबे के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया कर सकते हैं, जिससे पानी में कॉपर की मात्रा बढ़ सकती है।
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क्यों हो सकता है नुकसान?
1. एसिड और तांबे की प्रतिक्रिया
डिटॉक्स वाटर में अक्सर नींबू, संतरा, आंवला, कीवी या सेब जैसे फल मिलाए जाते हैं। इनमें प्राकृतिक एसिड मौजूद होता है। जब ऐसे अम्लीय पदार्थ लंबे समय तक तांबे की बोतल के संपर्क में रहते हैं, तो तांबे की सतह के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया हो सकती है। इससे पानी में कॉपर की मात्रा सामान्य से अधिक घुल सकती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ तांबे के बर्तन में केवल सादा पानी रखने की सलाह देते हैं, जबकि डिटॉक्स वाटर के लिए कांच या स्टेनलेस स्टील के बर्तन को बेहतर विकल्प माना जाता है।
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2. कॉपर टॉक्सिसिटी का खतरा
कॉपर शरीर के लिए एक जरूरी मिनरल है, लेकिन इसकी मात्रा संतुलित होना बेहद आवश्यक है। यदि लंबे समय तक शरीर में जरूरत से ज्यादा कॉपर पहुंचता रहे, तो कॉपर टॉक्सिसिटी का खतरा बढ़ सकता है। इसकी वजह से शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। अधिक कॉपर का सेवन लिवर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इसलिए तांबे की बोतल में नींबू पानी या अन्य खट्टे पेय लंबे समय तक रखने से बचना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को पहले से लिवर या किडनी से जुड़ी समस्या है, तो उसे तांबे के बर्तनों का नियमित उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होता है।
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3. पेट से जुड़ी समस्याएं
जरूरत से ज्यादा कॉपर शरीर में पहुंचने पर सबसे पहले असर पाचन तंत्र पर दिखाई दे सकता है। इससे मतली, उल्टी, पेट दर्द, दस्त, पेट में ऐंठन और जलन जैसी परेशानियां हो सकती हैं। कुछ लोगों को मुंह में धातु जैसा स्वाद भी महसूस हो सकता है। अगर तांबे की बोतल में लंबे समय तक रखा खट्टा पेय पीने के बाद ऐसी समस्याएं बार-बार होने लगें, तो उसका सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सुरक्षित रहने के लिए डिटॉक्स वाटर हमेशा कांच या स्टेनलेस स्टील की बोतल में ही स्टोर करें।
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तांबे की बोतल इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां
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तांबे की बोतल इस्तेमाल करते समय रखें ये सावधानियां
तांबे की बोतल को नियमित रूप से साफ करें।
लंबे समय तक पानी को कई दिनों तक बोतल में न छोड़ें।
केवल सादा पानी ही रखें।
जरूरत से ज्यादा तांबे का पानी पीने से बचें।
अगर किसी को लिवर या किडनी से जुड़ी बीमारी है, तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसका नियमित इस्तेमाल करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।