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Health Tips: क्या आपको भी कमर से लेकर पैरों तक रहता है दर्द? हो सकता है इन चार गंभीर बीमारियों का संकेत

Tue, 07 Oct 2025 08:20 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कमर से लेकर पैरों तक दर्द होना किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो आपको ये लेख जरूर पढ़ना चाहिए। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं ऐसी स्थिति में किन बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।
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कमर से पैर में दर्द - फोटो : Adobe Stock
Back and Leg Pain Causes: कमर से लेकर पैरों तक का दर्द होने को अक्सर लोग सामान्य थकान या मांसपेशियों में खिंचाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार ये लक्षण कुछ गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है। यह दर्द सिर्फ एक शारीरिक परेशानी नहीं है, बल्कि आपकी जीवनशैली और स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत पोस्चर और शारीरिक गतिविधि की कमी आम बात हो गई है, ऐसे में इस तरह की समस्याएं कई लोगों में देखने को मिल रही हैं।

हालांकि यह दर्द सिर्फ जीवनशैली से जुड़ा नहीं है कुछ मामलों में ये अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं का भी परिणाम हो सकता है। यह दर्द अक्सर हमारी नसों, रीढ़ की हड्डी या जोड़ों से जुड़ी बीमारियों का संकेत देता है, जिन्हें सही समय पर पहचानना और उनका इलाज कराना बहुत जरूरी है। अगर इस दर्द को गंभीरता से न लिया जाए, तो यह चलने-फिरने में कठिनाई, तंत्रिका संबंधी समस्याएं और स्थायी विकलांगता का कारण भी बन सकता है। आइए इस लेख में हम चार ऐसे गंभीर बीमारियों के बारे में जानते हैं, जिनके कारण कमर से लेकर पैरों तक दर्द हो सकता है साथ ही ये भी जानेंगे कि इस दर्द को पहचानने के लिए आपको किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।
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साइटिका - फोटो : Adobe Stock
साइटिका
यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें साइटिक नस पर दबाव पड़ता है। साइटिक नस शरीर की सबसे लंबी नस है जो कमर से शुरू होकर कूल्हे और पैरों से होते हुए पैरों के निचले हिस्से तक जाती है। इस नस पर दबाव पड़ने से कमर से लेकर पैरों तक तेज, जलन वाला या चुभने वाला दर्द होता है। यह दर्द एक पैर में ज्यादा होता है और अक्सर बैठने या खांसने पर बढ़ जाता है।

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रीढ़ की हड्डी - फोटो : Adobe Stock
स्लिप डिस्क
स्लिप डिस्क तब होता है जब रीढ़ की हड्डी के बीच की डिस्क अपने स्थान से खिसक जाती है या फट जाती है। इससे नसें दबने लगती हैं, जिससे कमर से लेकर पैरों तक दर्द, सुन्नता या झुनझुनी महसूस होती है। यह दर्द अक्सर झुकने, सामान उठाने या देर तक बैठने पर और बढ़ जाता है।

ध्यान रखें स्लिप डिस्क में दर्द सिर्फ कमर से पैर तक ही नहीं होता, बल्कि यह गर्दन या पीठ के किसी भी हिस्से में हो सकता है, और दर्द के साथ हाथों, पैरों या पंजों में सुन्नपन, झुनझुनी या कमजोरी भी महसूस हो सकती है। अगर आपके ये लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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बॉडी - फोटो : Adobe Stock Images
स्पाइनल स्टेनोसिस
यह रीढ़ की हड्डी में मौजूद जगह का संकरा होना है, जो आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ होता है। इस संकरेपन से रीढ़ की नसें दबने लगती हैं। इसकी वजह से कमर और पैरों में दर्द बढ़ जाता है, खासकर जब व्यक्ति चलता है या खड़ा होता है। स्पाइनल स्टेनोसिस में दर्द सिर्फ कमर से पैर तक ही नहीं, बल्कि नितंबों और गर्दन, हाथों या बाहों में भी हो सकता है। इस स्थिति में आराम करने पर दर्द में राहत मिलती है। 

 
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बॉडी - फोटो : Adobe Stock Images
पेरिफेरल आर्टरी डिजीज
यह पैरों की धमनियों के संकरे होने के कारण होता है, जिससे पैरों में खून का संचार कम हो जाता है। इसके कारण चलते समय या व्यायाम करते समय पैरों में दर्द और ऐंठन महसूस होती है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में 'क्लॉडिकेशन' कहते हैं। यह दर्द अक्सर आराम करने पर ठीक हो जाता है।

ध्यान रखें कि यह शरीर के अंगों में रक्त प्रवाह कम होने से होता है, जिससे नितंब, जांघ, पिंडली या पैर में दर्द, ऐंठन, सुन्नता या कमजोरी हो सकती है। कभी-कभी हाथों में भी लक्षण दिख सकते हैंयह हृदय रोग का भी एक संकेत हो सकता है। ऊपर बताए गए लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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