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Coronavirus Research: केवल जन्मजात हृदय रोग कोरोना संक्रमण का खतरा नहीं बढ़ाते, नए शोध में खुलासा

Sun, 18 Oct 2020 02:54 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केवल जन्मजात हृदय रोग, कोरोना संक्रमण कारक नहीं हो सकता(File Photo) - फोटो : Social media
कोरोना वायरस महामारी को लेकर शुरुआत से यही बात कही जा रही है कि दिल के मरीजों को इसके संक्रमण का ज्यादा खतरा है। अब एक नए शोध अध्ययन में यह नई जानकारी सामने आई है कि दिल के दोष के साथ पैदा हुए बच्चों और व्यस्कों में कोरोना के गंभीर संक्रमण का खतरा नहीं है। कोलंबिया विश्वविद्यालय अंतर्गत इरविंग मेडिकल सेंटर के वैज्ञानिकों और अन्य शोधकर्ताओं ने अमेरिका के वैगेलोस कॉलेज ऑफ फिजिशियन और सर्जन में जन्मजात हृदय रोग केंद्र के सात हजार से अधिक मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इस अध्ययन में कहा गया है कि केवल जन्मजात हृदय रोग, कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ाने का कारक नहीं हो सकता। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार केवल सात हजार में से केवल 53 जन्मजात हृदय रोगी (43 वयस्क और 10 बच्चे) यानी केवल 0.8 फीसदी में कोरोना के लक्षण पाए गए। अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक, 53 में से 80 फीसदी यानी 43 मरीजों में हल्के लक्षण थे। नौ मरीजों में गंभीर लक्षण देखे गए। कुल सात हजार में से महज तीन मरीजों की कोरोना से मौत हुई। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इस अध्ययन के सह-लेखक मैथ्यू लुईस ने कहा, “महामारी की शुरुआत में, कई लोगों ने आशंका जताई थी कि जन्मजात हृदय रोग, कोरोना के गंभीर संक्रमण का कारण हो सकता है। उन्होंने कहा कि कोरोना के लक्षण वाले मरीजों की कम संख्या (महज 0.8 फीसदी) से हम परिणाम के प्रति आश्वस्त थे। अध्ययन की अवधि मार्च से जून 2020 तक की थी, जिस दौरान न्यूयॉर्क महानगरीय क्षेत्र की करीब 20 फीसदी आबादी कोरोना संक्रमित थी। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
शोधकर्ताओं ने पाया कि आनुवांशिक सिंड्रोम वाले मरीजों के कोरोना संक्रमण की संभावना तो रहती है, लेकिन केवल जन्मजात हृदय दोष का लक्षणों की गंभीरता पर कोई खास असर नहीं पड़ता है। हालांकि इस अध्ययन का सैंपल साइज छोटा था। वैज्ञानिकों का मानना है कि कोविड-19 लक्षणों की गंभीरता या इसका जोखिम बढ़ाने के लिए केवल जन्मजात हृदय रोग पर्याप्त कारक नहीं हो सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोलंबिया विश्वविद्यालय के इस अध्ययन के एक अन्य सह-लेखक ब्रेट एंडरसन ने कहा, “यह संभव है कि  सामान्य की तुलना में बुजुर्ग मरीजों के लिए जन्मजात हृदय रोग वाले एक अलग जोखिम हो सकता है। उन्होंने कहा कि हमने अबतक स्पष्ट तौर पर यह परिभाषित नहीं किया कि ऐसे मरीजों में जोखिम कारक क्या हैं। वैज्ञानिकों ने कहा कि ऐसे मरीजों को निश्चिंत होने की बजाय तमाम सावधानियों और सीडीसी के दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए। 
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