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हेल्थ अलर्ट: इन गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेत होते हैं बेहद सामान्य, पर इग्नोर करना पड़ सकता है भारी

Sat, 19 Sep 2026 08:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कई बीमारियां शुरुआत में गंभीर लक्षण नहीं देतीं। हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लिवर और एनीमिया में शुरुआती संकेत बेहद सामान्य हो सकते हैं या बिल्कुल नहीं भी दिख सकते। लगातार थकान, कमजोरी या दूसरे बदलावों को नजरअंदाज करना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है।
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शरीर के संकेतों पर दें गंभीरता से ध्यान - फोटो : Amarujala.com/AI
जिस तरह से हमारी दिनचर्या-खानपान में गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, इसने कई तरह की क्रॉनिक बीमारियों के खतरे को भी बढ़ा दिया है। लिहाजा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और दिल की बीमारियां, जो पहले बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी, वह अब कम उम्र वालों को भी अपना शिकार बनाती जा रही हैं। बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए डॉक्टर सभी लोगों को 30 की उम्र के बाद नियमित रूप से हेल्थ चेकअप कराते रहने की सलाह देते हैं।

डॉक्टर कहते हैं, शरीर में बीमारी शुरू होने पर हमेशा तेज दर्द, बुखार या कोई बड़ा बदलाव दिखाई दे, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बीमारियां धीरे-धीरे बढ़ती हैं और शुरुआत में उनके संकेत इतने सामान्य होते हैं कि लोग इनपर ध्यान तक नहीं देते।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शुरुआत में हल्के लक्षणों को अनदेखा करना आगे चलकर बड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ाने वाला हो सकता है। आइए उन बीमारियों के बारे में जान लेते हैं जो जिनके शुरुआती संकेत बहुत सामान्य से लगते हैं।
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बीमारियों की पहचान - फोटो : Adobe stock
बीमारियों की समय पर पहचान जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हाई ब्लड प्रेशर इसका सबसे आम उदाहरण है। इसमें शुरुआत में अक्सर लोगों को कोई खास लक्षण महसूस नहीं होता। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, बहुत से लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है।
 
  • इसी तरह से टाइप-2 डायबिटीज में भी शुरुआत में लक्षण बिल्कुल हल्के हो सकते हैं और बीमारी कई साल तक धीरे-धीरे बढ़ सकती है।
  • तेजी से बढ़ती फैटी लिवर की समस्या भी अक्सर शुरुआत में बिना लक्षणों के रहती है। कुछ लोगों में सिर्फ थकान या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में परेशानी हो सकती है। यही वजह से काफी वक्त तक लोगों में इस बीमारी का पता ही नहीं चल पाता। 
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ब्लड प्रेशर की समस्या - फोटो : Adobe Stock
बिना लक्षणों के बढ़ता है हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज

हाई ब्लड प्रेशर को ‘साइलेंट’ किलर कहा जाता है क्योंकि इसमें अक्सर कोई साफ लक्षण नहीं होता।
 
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बहुत से लोगों को अपने हाई ब्लड प्रेशर की जानकारी ही नहीं होती। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर इसे पकड़ना मुश्किल है।
  • वहीं टाइप-2 डायबिटीज में ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब, थकान, धुंधला दिखना या बिना कोशिश वजन कम होने जैसे लक्षण हो सकते हैं। लेकिन ये लक्षण हल्के इतने हल्के होते कि कई साल बाद ध्यान में आते हैं। डायबिटीज का समय पर पता न चलना धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है।

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लिवर में फैट बढ़ने की समस्या - फोटो : Adobe Stock
फैटी लिवर की पहचान भी मुश्किल

फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है, ये बीमारी शुरुआत में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षणों के रहती है। इसे अब मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज यानी एमएएसएलडी भी कहा जाता है।
 
  • कुछ लोगों को इसके कारण थकान या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्की परेशानी हो सकती है।
  • चूंकि शुरुआती अवस्था में लक्षण बहुत कम होते हैं, इसलिए कई बार यह जांच या किसी दूसरी वजह से की गई मेडिकल जांच के दौरान ही सामने आता है।
  • फैटी लिवर पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण लिवर को गंभीर खतरे हो सकते हैं।
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एनीमिया का खतरा - फोटो : Freepil.com
एनीमिया की दिक्कत

आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया की दिक्कत महिलाओं में काफी आम है। करीब 57% भारतीय महिलाएं इसका शिकार हैं।  जब शरीर में पर्याप्त आयरन नहीं होता और स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाएं पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पातीं तो इससे एनीमिया का खतरा हो सकता है। 
 
  • हल्के स्तर के एनीमिया में कोई लक्षण नहीं दिखते। कुछ लोगों को थकान, कमजोरी, चक्कर आने, सांस फूलने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। ये संकेत बहुत सामान्य हैं, इसलिए कई लोग इन्हें नींद की कमी या काम के दबाव मानकर इग्नोर करते रहते हैं। एनीमिया समय के साथ कई गंभीर खतरे को जन्म दे सकती है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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