फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सेहत की बात: गड़बड़ रहता है पाचन या बढ़ा रहता है हार्ट बीट? ज्यादा तनाव तो नहीं ले रहे हैं आप

Sun, 20 Apr 2025 11:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पाचन से संबंधित समस्याओं को आमतौर पर खान-पान और लाइफस्टाइल में गड़बड़ी की दिक्कत के रूप में जाना जाता है, पर क्या आप जानते हैं कि लंबे समय तक बने रहने वाली पाचन की दिक्कतें इस बात का भी संकेत हो सकती हैं कि आप स्ट्रेस का शिकार है?
विज्ञापन
1 of 5
स्ट्रेस के कारण होने वाली समस्या - फोटो : Adobe stock photos
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, यही कारण है कि मेंटल हेल्थ की समस्याओं के कारण शारीरिक स्वास्थ्य और शारीरिक समस्याओं के कारण मेंटल हेल्थ पर असर हो सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को स्ट्रेस को कंट्रोल रखने की सलाह देते हैं।  अगर आप भी तनाव के शिकार हैं तो समय रहते इसे कंट्रोल करने के उपाय कर लीजिए, ये संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्याओं को बढ़ाने वाला हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्ट्रेस एक शारीरिक और मानसिक प्रतिक्रिया है जो तब होती है जब आप किसी चुनौतीपूर्ण या खतरनाक स्थिति का सामना करते हैं। यह प्रतिक्रिया शरीर को फाइट मोड में ले जाती है, जहां से कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होते हैं और आपको उस समस्या से निपटने में मदद करते हैं। 

पर क्या आप जानते हैं कि बहुत अधिक या लंबे समय तक बने रहने वाले तनाव के कारण शरीर में कोर्टिसोल की अधिकता होती है जिसका संपूर्ण स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर हो सकता है।
विज्ञापन

2 of 5
पाचन-कब्ज की समस्या - फोटो : Freepik.com
गड़बड़ तो नहीं रहता है पाचन?

पाचन से संबंधित समस्याओं को आमतौर पर खान-पान और लाइफस्टाइल में गड़बड़ी की दिक्कत के रूप में जाना जाता है, पर क्या आप जानते हैं कि लंबे समय तक बने रहने वाली पाचन की दिक्कतें इस बात का भी संकेत हो सकती हैं कि आप स्ट्रेस का शिकार है?

जॉन्स हॉप्किंस की रिपोर्ट के मुताबिक तनाव का पाचन प्रणाली पर सीधा असर पड़ता है। इतना ही नहीं लंबे समय तक बने रहने वाली स्ट्रेस की समस्या के कारण इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) और पेप्टिक अल्सर जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अक्सर एसिडिटी-कब्ज, गैस या अपच बनी रहती है और सामान्य दवाओं से लाभ नहीं मिल रहा है तो ये स्ट्रेस का भी संकेत हो सकता है।
विज्ञापन

3 of 5
हार्ट बीट बढ़ने की समस्या - फोटो : freepik.com
हार्ट बीट बढ़ना भी हो सकता है स्ट्रेस का संकेत

स्ट्रेस का आपके हार्ट हेल्थ पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक तनाव की समस्या हृदय रोगों (जैसे हाई ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन तेज़ होना, हार्ट अटैक) का खतरा बढ़ा देती है।

असल में तनाव की स्थिति ब्लड प्रेशर को बढ़ा देती है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। वहीं कोर्टिसोल की अधिक कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को बढ़ाने वाली हो सकती है। ये सभी स्थितियां दिल की बीमारियों का कारण बन सकती हैं।

4 of 5
स्ट्रेस-डिप्रेशन का खतरा - फोटो : freepik
मानसिक स्वास्थ्य पर असर

क्रॉनिक स्ट्रेस से डिप्रेशन, एंग्जायटी डिसऑर्डर, और नींद की समस्याएं भी बढ़ जाती है। अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग अधिक तनाव में रहते हैं उनमें डिप्रेशन होने का जोखिम अधिक रहता है। इससे दिमाग की कार्यक्षमता और याददाश्त की भी दिक्कतें बढ़ जाती हैं।  डिप्रेशन मेंटल हेल्थ की गंभीर समस्या है जिसका शारीरिक स्वास्थ्य पर भी असर होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
मेंटल हेल्थ की समस्या - फोटो : Freepik.com
स्ट्रेस के कारण होने वाली अन्य समस्या

लंबे समय तक बनी रहने वाली स्ट्रेस की समस्या आपको संपूर्ण स्वास्थ्य को कई और प्रकार से भी प्रभावित करने लगती है।
  • अमेरिकल साइकोलॉजी एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक अगर आप तनाव का शिकार रहते हैं तो ये प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है। इससे संक्रमण, एलर्जी और ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
  • स्ट्रेस के कारण कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ने से भूख भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि इससे वजन बढ़ने और मोटापे की भी दिक्कत हो सकती है।


-------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें