धूम्रपान के नुकसान
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सिगरेट नहीं पीते तो भी हो सकती है सीओपीडी?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि सीओपीडी को अक्सर धूम्रपान से जुड़ी बीमारी मान लिया जाता है, लेकिन कई अध्ययन बताते हैं कि भारत में 40%-45% सीओपीडी मरीजों में धूम्रपान की कोई मेडिकल हिस्ट्री नहीं रही है। नॉन-स्मोकर्स में भी सीओपीडी-अस्थमा और सांस की बीमारियों का खतरा रहता है, इसके लिए कुछ कारणों को जिम्मेदार माना जाता है।
- ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लकड़ी, कोयला, गोबर के उपले या पुराने चूल्हों के धुएं का लगातार संपर्क फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा वायु प्रदूषण पीए2.5 और पीएम10 जैसे कण सीधे फेफड़ों के जाकर इन्फ्लेमेशन पैदा करते हैं जिसके कारण सांस की दिक्कतें हो सकती हैं।
- डॉक्टर कहते हैं, बार-बार फेफड़ों के संक्रमण होना खासकर बचपन में गंभीर संक्रमण होने से फेफड़ों की संरचना कमजोर हो जाती है, इससे भविष्य में सांस की समस्याएं हो सकती हैं।
डॉक्टर कहते हैं, यह मानना गलत है कि सिर्फ स्मोकिंग ही सीओपीडी की वजह है। असल में, प्रदूषण और धुएं के सभी प्रकार इसके मुख्य कारण हैं। जो लोग धूम्रपान नहीं करते हैं उनमें यह अक्सर देर से पहचान में आता है।