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Cholesterol Control: बढ़ता कोलेस्ट्रॉल दे सकता है परेशानी, ऐसे पाएं नियंत्रण

Wed, 21 Sep 2022 03:30 PM IST
स्वाति शैवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुश्किल बन सकता है कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन - फोटो : अमर उजाला
कोरोना के बाद निरंतर किए जाने वाले कई शोध अध्ययन में यह सामने आया है कि इस महामारी की वजह से हृदय पर भी बुरा असर पड़ा है। जो लोग कोरोना के शिकार होकर ठीक हुए उनमें और जो लोग उस दौरान खान-पान और रूटीन को नियमित नहीं रख पाए उनमें भी ह्रदय सम्बन्धी अनियमितताएं देखने मे आई हैं। इसके अलावा पिछले कुछ समय से जो दिनचर्या और खान-पान के बदलाव हुए हैं उन्होंने भी दिल की सेहत पर बुरा असर डाला है। इसका उदाहरण पिछले कुछ महीनों में कम उम्र लोगों में सामने आए हार्ट अटैक के केसेस हैं। 

कोलेस्ट्रॉल का बढ़ता या असुंतलित स्तर भी दिल के रोगों का एक महत्वपूर्ण कारण होता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस स्तर का नियमित होना बहुत हद तक आपके हाथ में हो सकता है। खान-पान और जीवनशैली को नियमित रखकर और सामान्य व्यायाम द्वारा कोलेस्ट्रॉल के स्तर को 90 प्रतिशत तक नियंत्रण में रखा जा सकता है। इसके लिए जितनी कम उम्र से प्रयास किये जायें उतना अच्छा परिणाम मिल सकता है। ऐसे कुछ प्रयासों के बारे में आइए जानते हैं।
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कम उम्र में भी होने लगी हैं समस्याएं - फोटो : iStock
अचानक नहीं बढ़ता कोलेस्ट्रॉल

जीवनशैली जनित जितनी भी समस्याएं या बीमारियां हैं, वे सभी आपकी अनियमितता के साथ धीरे धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाना शुरू करती हैं। यह प्रक्रिया इतनी चुपचाप होती है कि इसके लक्षण सामने आने में भी लंबा समय लग जाता है। लेकिन जब शरीर की सहनशक्ति खत्म हो जाती है तो एक दिन अचानक लक्षण सामने आते हैं और आप चौंक जाते हैं। कोलेस्ट्रॉल के स्तर के साथ भी ऐसा ही होता है। एक दिन, एक हफ्ते या एक महीने हेल्दी या अनहेल्दी खाने भर से कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता। यह बढ़ता है लगाकर अनहेल्दी खाने, सोने-जागने में अनियमितता होने और फिजिकल एक्टिविटी में कमी होने जैसी कई स्थितियों से। यदि शरीर में कोई समस्या पहले से हो या कोई अनुवांशिक स्थिति भी हो तो लक्षण जल्दी भी सामने आ सकते हैं। आज से कुछ सालों पहले जहाँ कोलेस्ट्रॉल संबंधी असंतुलन 55-60 या उससे अधिक उम्र में सामने आते थे, आजकल यह बहुत कम उम्र में भी नजर आने लगे हैं। इसलिए इसे लेकर सतर्कता रखा जरूरी है। 
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जांच में पता चलता है कोलेस्ट्रॉल का स्तर - फोटो : iStock
ये है नॉर्मल रेंज 

जब डॉक्टर आपको कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाने को कहते हैं तब वे यह देखना चाहते हैं कि आपके रक्त में कितना कोलेस्ट्रॉल सर्कुलेट हो रहा है। यूं ज्यादातर लोगों को बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल का पता अचानक कोई परेशानी आने पर होने वाली जांचों में ही चल पाता है। कई बार डॉक्टर लक्षणों के आधार पर या उम्र और स्थिति के हिसाब से भी कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाने को कहते हैं। कोलेस्ट्रॉल की इस मात्रा में एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल का अधिक होना और एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल का कम होना राहत की खबर हो सकती है। गुड कोलेस्ट्रॉल का 50- 60एमजी/डीएल  या उससे अधिक होना और बैड कोलेस्ट्रॉल का 100-110 एमजी/डीएल  से नीचे होना अच्छा माना जाता है। यानी आपके कुल कोलेस्ट्रॉल का स्तर 200 एमजी/डीएल से नीचे होना चाहिए। आदर्श स्थितियों में यह 150-170 एमजी/डीएल तक होना चाहिए। 

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प्लाक की स्थिति बन सकती है - फोटो : अमर उजाला
ये हो सकती हैं समस्याएं 

बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ह्रदय रोगों की आशंका को कई गुना बढ़ा सकती है। कोलेस्ट्रॉल असल में लिपिड (फैट) का ही एक प्रकार होता है और यह शरीर के सही तरीके से काम करने के लिए जरूरी भी होता है। जब इसकी मात्रा अधिक हो जाती है तो यह आर्टरी यानी धमनियों की दीवार तक पहुंच कर प्लाक (एक तरह का जमाव) उत्पन्न करने लगता है। प्लाक के जमने की यह प्रक्रिया एथरोस्क्लेरोसिस कहलाती है। इसकी वजह से कोरोनरी आर्टरी डिसीज, पेरिफेरल आर्टरी डिसीज व कैरोटिड आर्टरी डिसीज जैसी समस्याएं पनप सकती हैं जो ध्यान न देने पर जानलेवा भी हो सकती हैं। इसलिए कोलेस्ट्रॉल को लेकर चिंता करने की बजाय उसके स्तर को संतुलित रखने की ओर ध्यान देना चाहिए।
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बचपन से डालें हेल्दी खाने की आदत - फोटो : iStock
बचपन से रखें ध्यान 

खान-पान से लेकर जीवनशैली तक, हर आदत बचपन से हमारे साथ चलती है। हम क्या खाएंगे, कैसे खाएंगे, कितना खाएंगे, कब सोयेंगे और फिजिकली एक्टिव रहेंगे या नहीं, इस आदत पर ही स्वस्थ रहने का 90 प्रतिशत से अधिक मामला निर्भर करता है। अगर बचपन से सही आदत होगी तो इसका फायदा उम्र बढ़ने पर सबसे ज्यादा मिलेगा। इसलिए शुरुआत यहीं से करें। 

- जब बच्चा पहली बार ठोस आहार लेना शुरू करे तब से ही उसे सब्जियां, फल और सलाद, कम नमक और कम शकर के खाद्य आदि खिलाएं। चावल, दाल, दलिया, सूजी का हलवा, वेजिटेबल कटलेट, पनीर और सब्जियों से भरा चीला, दही, आदि खाने पर जोर दें। 

- पानी के अलावा छाछ, नारियल पानी, पानी वाले फल आदि खिलाएं। बच्चों को जितना हो सके आर्टिफिशियल कलर और शुगर, सोडा वाले पेय पदार्थों से दूर रखें। 
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जांचों से चलता है समस्या का पता
नियम बनाएं 

- बच्चों के लिए जंक फ़ूड का नियम बनायें और उस पर कड़ाई से पालन करें। महीने में एक या दो बार बर्गर, पिज्जा या बाहर का कुछ खाने तक ठीक है लेकिन इसके लिए बाकी दिन सब्जी-रोटी, दाल-चावल, सलाद और फल खाने होंगे यह बात बच्चों को सिखाएं। 

- बजाय हाथ में मोबाइल थमाने के बच्चे को खूब उछल-कूद वाले खेल खेलने दें, बल्कि हो सके तो आप भी उनके साथ खेलें। ये अच्छा व्यायाम भी है और स्ट्रेस बस्टर भी। 

- जल्दी सोने और भरपूर नींद लेने की आदत जरूर डालें। इससे पाचन भी दुरुस्त रहेगा और दिल पर अतिरक्त दबाव पड़ने से भी बचेगा। 

- आजकल की स्थिति को देखते हुए और यदि आपके परिवार में पहले से ह्रदयरोग मौजूद है तो बच्चों का पहला टेस्ट 9-11 साल की उम्र में करवाएं। इसके बाद 40 साल की उम्र तक हर पांच साल में एक बार कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच करवाएं। 45-65 की उम्र में हर दो साल में और इसके बाद हर साल यह जांच करवाएं। 
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सही चुनें, सही खाएं - फोटो : iStock
गलत प्रकार के फैट्स से बचें 

- अपने भोजन में सैचुरेटेड फैट्स, ट्रांस फैट्स, नमक और शकर को हमेशा सीमित रखें। खासकर बाजार से स्नैक्स जैसे चिप्स, नमकीन, मिठाई-चॉकलेट आदि को कम से कम कर दें। बाजार का बना अचार और जैम भी कम उपयोग में लाएं। इसकी बजाय घर पर बना अचार, चटनी, सॉस और स्नैक्स के लिए ड्राय फ्रूट्स, घर पर बने लड्डू या पोहे मखाने का नमकीन, मिक्स आटे की मठरी, आदि खाएं। 

- जो भी खाएं उसकी मात्रा सीमित रखें। भोजन को टुकड़ों में बाँट लें और एक बार में ढेर सारा खाना खाने से बचें। 

- बटर की जगह थोड़ी मात्रा में घी का उपयोग करें और चीज की बजाय पनीर को प्राथमिकता दें। 

- यह न सोचें कि शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम हो गई तो क्या होगा। हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से भी कोलेस्ट्रॉल का उत्पादन करता है। यह शरीर में आवश्यकता के लिए कोलेस्ट्रॉल की थोड़ी मात्रा को बनाये रखेगा। इसके अलावा विशेषज्ञ की सलाह से गुड कोलेस्ट्रॉल युक्त पदार्थों की सूची बनायें और उन्हें भोजन में शामिल करें। 

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ब्रिस्क वॉक या दौड़, दोनों हैं फायदेमंद
व्यायाम भी है जरूरी 

- खाने में जितना हो सके फाइबर को शामिल करें। अंकुरित अनाज, साबुत फल, सलाद, भीगे चने और मूंगफली, जौ और सोयाबीन, ज्वार आदि का मोटा पिसा आटा अधिक खाइए। रोटी भी बिना चोकर निकाले बनाइये और मैदा का उपयोग कम से कम कर दीजिये। 

- भोजन के साथ ही भरपूर मात्रा में पानी के सेवन का भी ध्यान रखें, चाहे मौसम कोई भी हो। 

- जितनी मात्रा में खा रहे हैं उतना ही श्रम उसे पचाने के लिए भी करें। भले ही रोज सिर्फ 15 मिनिट व्यायाम के लिए निकालें या ब्रिस्क वॉक ही क्यों न करें लेकिन ये नियमित हो इसका पूरा ख्याल रखें। 

- खान-पान के साथ ही पर्याप्त नींद और आराम भी शरीर और दिमाग को दें। नियमित योग और मेडिटेशन का अभ्यास भी दिल की सेहत को अच्छा रखने में मदद कर सकता है। 

- अगर आप हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी स्थितियों के लिए डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब दवाइयां ले रहे हैं तो उन्हें भी नियमित और सही मात्रा में लें। अपने मन से कोई भी  दवाई या इलाज न करें। 
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दिल का रखिये खयाल - फोटो : Pixabay
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 
 
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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