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Cholesterol And Health: कोलेस्ट्रॉल बढ़ा रहा है टेंशन तो इन 5 बातों पर गौर करें

Wed, 30 Nov 2022 06:19 PM IST
स्वाति शैवाल लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल की सेहत पर ध्यान दें - फोटो : Pixabay
पिछले कुछ दिनों से ह्रदय रोग और हार्ट अटैक से जान गंवाने वाले कम उम्र लोगों की फेहरिस्त में लगातार इजाफा हुआ है। इनमें से अधिकांश लोग न केवल फिटनेस को लेकर सतर्क थे बल्कि नियमित व्यायाम आदि से भी जुड़े थे। तथ्य यह है कि ह्रदय या किसी भी अन्य रोग के मामले में कोई भी एक कारण न तो सुधार की वजह बनता है न ही स्थिति के बिगड़ने की। ह्रदय के मामले में भी कई सारे कारण सेहत बिगड़ने के पीछे हो सकते हैं। कोलेस्ट्रॉल इनमें प्रमुख रूप से शामिल है। 

जब भी दिल की सेहत की बात होती है कोलेस्ट्रॉल का नाम हमेशा आता है। कभी इसे लेकर खान पान को सुधारने की बात कही जाती है तो कुछ लोगों को इसके स्तर को संतुलित बनाये रखने के लिए बकायदा नियमित दवाइयां भी दी जाती हैं। आखिर क्यों कोलेस्ट्रॉल का स्तर इतना महत्वपूर्ण है? क्या कोलेस्ट्रॉल का होना केवल बुरा ही होता है? आखिर दिल की सेहत को कोलेस्ट्रॉल कैसे नुकसान पहुंचाता है? और क्या इसे नियंत्रित करना बहुत मुश्किल है? जानिए करीब से क्या है कोलेस्ट्रॉल का संतुलित स्तर और कैसे इसे बनाये रखा जा सकता है। 
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खून के बहाव में आने वाली बाधा - फोटो : अमर उजाला
गंदगी का जमा हो जाना है कोलेस्ट्रॉल 

इसे इस तरह समझिये। आपके किचन के सिंक में जूठन इकट्ठी होकर पानी के निकलने का मार्ग बंद कर देती है या उसमें बाधा पैदा करने लगती है। इसी वजह से पानी का जमाव एक जगह होने लगता है और सड़न पैदा होने लगती है। लगभग इसी तरह की बाधा कोलेस्ट्रॉल की वजह से खून ले जाने वाली धमनियों में पैदा होती है। इसकी वजह से खून और ऑक्सीजन ठीक तरह से शरीर में पहुंच नहीं पाता और ह्रदय पर भी दबाव बनने लगता है। यह स्थिति ह्रदय को अंदरूनी तौर पर नुकसान पहुंचाने और हार्ट अटैक आदि का कारण बन सकती है।  
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कोलेस्ट्रॉल के स्तर का संतुलित होना जरूरी - फोटो : सोशल मीडिया
अच्छा भी, बुरा भी 

कोलेस्ट्रॉल का होना शरीर के लिए अच्छा भी होता है और जरूरी भी। इसलिए कोलेस्ट्रॉल को दो प्रकारों- अच्छा कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल और बुरा कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल में बांटा जाता है। इनमें से अच्छे कोलेस्ट्रोल का स्तर 60 या इससे ऊपर व बुरे कोलेस्ट्रॉल का स्तर 100 से नीचे होने चाहिए। शरीर में कुल कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 200 के भीतर होनी चाहिए। यह स्तर शारीरिक संरचना, स्थिति और महिला-पुरुष होने आदि पर भी निर्भर कर सकता है। लेकिन औसतन 200 के अंदर का स्तर जिसमें कि अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा सही हो, अच्छा माना जाता है। 
 

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वसा की जांच है जरूरी - फोटो : iStock
वसा का एक प्रकार 

कोलेस्ट्रॉल असल में एक प्रकार का लिपिड या वसा (फैट) है। याद कीजिये डॉक्टरों द्वारा लिपिड टेस्ट करवाने के लिए दी जाने वाली सलाह। यही टेस्ट कोलेस्ट्रॉल के स्तर को जांचने के काम आता है। कोलेस्ट्रॉल का संतुलित मात्रा में शरीर में होना भी जरूरी है। शरीर इसकी मदद कई कामों में लेता है। इसलिए खून के साथ इसका होना सामान्य बात है। जब इसकी मात्रा खून में बढ़ने लगती है तब मुश्किल खड़ी होती है। तब यह धमनियों की दीवारों पर इकट्ठा होने लगता है या कहिये जमने लगता है, क्षति पहुंचाने लगता है और एथरोस्क्लेरोटिक प्लाक (वसा का कड़क रूप) में बदलने लग जाता है। प्लाक के बनने की यह स्थिति एथरोस्केलेरोसिस कहलाती है। 
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लापरवाही बनती है हार्ट अटैक का कारण - फोटो : pixaby
हो सकती हैं ये परेशानियां 

प्लाक के जमने की यह स्थिति कई गंभीर समस्याओं को जन्म देती है। इसमें शामिल हैं-
  • कोरोनरी आर्टरी डिसीज 
  • पेरिफेरल आर्टरी डिसीज 
  • कैरोटिड आर्टरी डिसीज 

खून के साथ कोलेस्ट्रॉल के बहने और प्लाक के बनने की स्थिति इतनी धीमी होती है कि इसका पता बिना जांच के नहीं चल सकता। अधिकांशतः लम्बे समय तक कोई गंभीर लक्षण भी नहीं उभरते और फिर सीधे हार्ट अटैक या स्ट्रोक के रूप में मुसीबत सामने आ जाती है। यही कारण है कि डॉक्टर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को लेकर खासतौर पर सजग रहने को कहते हैं। 
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दही भी है फायदेमंद
ये उपाय अपनाएं 
  • सबसे पहली चीज है नियमित रूटीन। नियमित रूटीन यानी हर चीज में नियमितता। सोने-जागने, व्यायाम और खान-पान हर चीज में। चाहे आपकी उम्र 20 साल हो या 40 
  • भोजन में दिन में कम से कम एक बार खीरा, सेब, पपीता, दही, छाछ, गाजर, आदि को शामिल अवश्य करें 
  • वजन को हमेशा संतुलित रखें, खासकर पेट पर चढ़ने वाली चर्बी से बचें 
  • धूम्रपान की लत को तुरंत छोड़ने का प्रयास करें 
  • प्रोसेस्ड और डिब्बाबंद खाद्यों से दूरी बना लें और कचौरी-समोसे, पकौड़े जैसी चीजों को भी बहुत कम खाएं। आप महीने में एक बार एक कचौरी या समोसा खा सकते हैं
  • यदि आप नाइट शिफ्ट में काम करते हैं तो अपने डिनर का समय शाम 6 के बाद न रखें। इसके बाद 8 बजे तक आप दूध, फल आदि खा सकते हैं। अनाज खाने से बचें 
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पैदल चलने से मिलेगा आराम - फोटो : pixa
 भोजन के बाद टहलें 
 
  • रात को भोजन के बाद सीधे सो नहीं जाएँ। थोड़ी देर टहलें जरूर ।
  • मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार, दलिया, चोकर वाला गेहूं का आटा आदि का प्रयोग अवश्य करें।
  • यदि आप पहले से कोलेस्ट्रॉल के बढ़े स्तर, मोटापे आदि की समस्या से ग्रस्त हैं तो सबसे पहला नियंत्रण भोजन पर ही करें।
  • सालाना जांचों पर हमेशा ध्यान दें और यदि आपको डायबिटीज और बीपी के प्रबंधन हेतु दवाई दी गई है तो उसका सेवन सही समय पर, सही मात्रा में और नियमित करें।
  • भरपूर मात्रा में पानी पीएं, नींद लें और मेडिटेशन जैसी तकनीकों से स्ट्रेस, तनाव आदि को दूर रखने की कोशिश करें।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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