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Corona Vaccine: दावा- 99 फीसदी सफल होगी कोरोना की वैक्सीन, संकट- ट्रायल के लिए नहीं मिल रहे मरीज

Wed, 03 Jun 2020 02:24 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Vaccine: चीनी कंपनी सिनोवेक ने वैक्सीन तैयार की है - फोटो : Social Media
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन तैयार करने में जुटे हैं। भारत समेत ब्रिटेन, अमेरिका, इस्रायल और चीन जैसे देशों में वैक्सीन तैयार करने के प्रयासों में काफी हद तक सफलता मिल रही है। कई देशों में वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया क्लिनिकल ट्रायल स्टेज में है। वहीं, चीन ने अपने यहां तैयार वैक्सीन के 99 फीसदी सफल होने का दावा किया है। चीनी कंपनी सिनोवेक ने जो वैक्सीन तैयार की है, उसके बारे में दावा किया है कि वे 99 फीसदी सफल होंगे। हालांकि फिलहाल बड़ी दिक्कत यह है कि कंपनी को ट्रायल के लिए कोरोना के मरीज ही नहीं मिल रहे हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
दरअसल, चीन की राजधानी बीजिंग स्थित बायोटेक कंपनी सिनोवेक का दावा है कि वह वैक्सीन बनाने की दिशा में काफी आगे बढ़ चुकी है। इस बायोटेक कंपनी ने वैक्सीन के 100 मिलियन डोज तैयार करने का लक्ष्य रखा है। दावा है कि उसकी वैक्सीन 99 फीसदी सफल होगी, लेकिन समस्या ये है कि उसे ट्रायल के मरीज ही नहीं मिल रहे। 
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कोरोना का टीका(सांकेतिक) - फोटो : PTI
ब्रिटेन में ट्रायल 
  • कंपनी फिलहाल दूसरे चरण का ट्रायल कर रही है, जिसमें एक हजार वॉलंटियरों को शामिल किया है। वैक्सीन का तीसरा ट्रायल ब्रिटेन में किया जाना है, जिसके लिए कंपनी को ब्रिटेन से बड़ी उम्मीद है। शोधकर्ता लुओ बायशन का कहना है कि मैं 99 फीसदी तक निश्चिंत हूं कि ये वैक्सीन कारगर साबित होगी। 

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कोरोना का टीका (सांकेतिक) - फोटो : Amar Ujala
वैक्सीन का नाम- कोरोनावेक
  • एकेडमिक जर्नल साइंस में प्रकाशित शोध रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने वैक्सीन का नाम 'कोरोनावेक' रखा है। शोध रिपोर्ट के मुताबिक, बंदरों पर ट्रायल के दौरान पाया गया कि कंपनी बंदर को कोरोना वायरस से सुरक्षित करती है। कंपनी का कहना है कि अगले चरण का ट्रायल करना है, लेकिन चिंता की बात है कि चीन में कोरोना के मरीजों की संख्या बहुत कम हो गई है। 
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कोरोना वायरस ट्रायल (सांकेतिक) - फोटो : social media
उच्च जोखिम वाले यूरोपीय देशों से उम्मीद
  • कंपनी के वरीय निदेशक हेलेन येंग के मुताबिक, तीसरे दौर के ट्रायल के लिए ब्रिटेन और यूरोपीय देश से बातचीत की जा रही है। अभी यह प्रक्रिया शुरुआती दौर में है। वैक्सीन निर्माण से पहले शोध पूरा होना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि ट्रायल में सफल होने के बाद अप्रूवल मिलते ही उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में ही सबसे पहले वैक्सीन दी जाएगी। 
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