बच्चों में एंक्जायटी डिसऑर्डर्स भी दिखाई दे रहे हैं
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इस तरह का अवसाद, अच्छी बात नहीं
न्यूयॉर्क के चाइल्ड माइंड इंस्टीट्यूट में क्लीनिकल सायकोलॉजिस्ट रेचेल बुशमैन का कहना है बच्चों में अवसाद और चिंता का होना बिल्कुल भी अच्छी बात नहीं है क्योंकि हम बचपन को मासूमियत से जोड़कर देख रहे हैं। 6-12 साल के बच्चों की उम्र तो खेलने- कूदने की उम्र है, इस उम्र में गंभीर डिप्रेशन दिखने लगा है। वहीं बच्चों में एंक्जायटी डिसऑर्डर्स भी दिखाई दे रहे हैं।