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Health Tips: राजस्थान में कफ सीरप पीने से बच्चे की मौत, जानिए दवा देते समय किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी

Wed, 01 Oct 2025 06:19 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राजस्थान में कथित तौर पर कफ सिरप पीने से बच्चे की मौत का मामला सामने आया है, इसको लेकर कई माता पिता के मन में सवाल है कि दवा देते समय क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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कफ सीरप - फोटो : Amar Ujala
How to Safely Give Cough Syrup to a Child: राजस्थान के सीकर में कथित तौर पर कफ सिरप पीने के बाद एक पांच वर्षीय बच्चे की मौत की खबर ने बच्चों को दी जाने वाली दवाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह दुखद घटना सभी माता-पिता के लिए एक चेतावनी है कि सामान्य सर्दी-खांसी जैसी बीमारियों में भी बच्चों को दवा देते समय अत्यधिक सावधानी बरतना कितना जरूरी है।

अक्सर कुछ लोग बिना सोचे-समझे केमिस्ट से कफ सिरप खरीदकर बच्चों को दे देते हैं, लेकिन यह आदत जानलेवा साबित हो सकती है। बच्चों का शरीर बहुत संवेदनशील होता है और गलत दवा या गलत खुराक उनके लिए गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकती है। इसलिए आइए इस लेख में जानते हैं कि अपने बच्चे को कोई भी दवा, विशेषकर कफ सिरप देते समय किन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है।
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कफ सीरप - फोटो : Adobe Stock
डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न दें
यह सबसे महत्वपूर्ण नियम है, इससे जुड़ी लापरवाही किसी को भी नहीं बरतनी चाहिए। बच्चों में खांसी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे वायरल इन्फेक्शन, बैक्टीरियल इन्फेक्शन या एलर्जी। बिना सही जांच के कोई भी कफ सिरप देना खतरनाक हो सकता है। कुछ कफ सिरप में ऐसे तत्व (जैसे डेक्स्ट्रोमीथोर्फेन) होते हैं जो 4 या 5 साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं दिए जाने चाहिए। हमेशा बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद ही कोई दवा शुरू करें।

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कफ सीरप - फोटो : Adobe Stock
लेबल और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें
कोई भी दवा देने से पहले उसकी पैकेजिंग पर लिखी एक्सपायरी डेट की जांच अवश्य करें। इसके साथ ही लेबल पर दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ें। सुनिश्चित करें कि दवा की सील टूटी हुई न हो। यदि दवा का रंग बदला हुआ या उसमें कुछ अलग दिखे तो उसका उपयोग बिल्कुल न करें। यह दवा के खराब या नकली होने का संकेत हो सकता है।

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कफ सीरप - फोटो : Adobe Stock
सही खुराक का रखें ध्यान
बच्चों की दवाओं की खुराक उनके वजन और उम्र के अनुसार तय की जाती है, वयस्कों की तरह नहीं। दवा देने के लिए हमेशा उसी मापने वाले कप, चम्मच या ड्रॉपर का उपयोग करें जो दवा के साथ आता है। घर के सामान्य चम्मच का उपयोग करने से खुराक कम या ज्यादा हो सकती है, जो बच्चे के लिए हानिकारक है। कभी भी डॉक्टर द्वारा बताई गई खुराक से ज्यादा दवा न दें।

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दवाओं का अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik.com
पुरानी रखी दवाओं से बचें
अक्सर हम पिछली बीमारी की बची हुई दवाओं को रख लेते हैं और दोबारा लक्षण दिखने पर बच्चे को वही दवा दे देते हैं। यह आदत बहुत खतरनाक है। एक बार दवा की बोतल खुलने के बाद वह कुछ समय में प्रभावी नहीं रहती या दूषित हो सकती है। कभी भी पुरानी रखी हुई दवा या किसी दूसरे बच्चे के पर्चे की दवा अपने बच्चे को न दें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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