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Alert: मौसम बदलते ही बिगड़ने लगी लोगों की सेहत, कहीं आपको भी न हो जाए वायरल बुखार? जानिए कैसे बचें

Thu, 19 Feb 2026 07:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मौसम में अचानक बदलाव वायरल संक्रमण का मुख्य कारण होता है। तापमान में उतार-चढ़ाव वायरस के जीवित रहने और फैलने के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। इसके अलावा कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना, भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाना और स्वच्छता की कमी भी संक्रमण का खतरा बढ़ाती है।
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फ्लू के मामलों को लेकर अलर्ट - फोटो : Freepik.com
इन दिनों मौसम में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है। दिन में बढ़ा हुआ तापमान और सुबह-शाम की हल्दी सर्दी लोगों को बीमार कर रही है। मौसम के करवट लेते ही लोग वायरल फीवर की चपेट में आने लगे हैं। गले में खराश, छींक आने, नाक बंद होने और हल्के बुखार की शिकायत लेकर लोग अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। कहीं आप भी इस तरह की समस्याओं का शिकार नहीं हो गए हैं?

दिन में तापमान बढ़ना और सुबह-शाम ठंड महसूस होना शरीर के लिए एक तरह का थर्मल स्ट्रेस पैदा करता है। इस स्थिति में शरीर को तापमान के अनुसार खुद को एडजस्ट करने में समय लगता है, जिससे इम्यून सिस्टम अस्थायी रूप से कमजोर हो सकता है। वायरस इसी कमजोरी का फायदा उठाते हैं और शरीर को संक्रमित कर देते हैं। यही कारण है कि मौसम में होने वाले बदलाव के दौरान वायरल संक्रमण जैसे फ्लू, सर्दी-खांसी और बुखार के मामले अधिक बढ़ते हैं।

दिल्ली-नोएडा के अस्पतालों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक इन दिनों ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है।
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वायरल फीवर की बढ़ती समस्या - फोटो : Adobe stock
ओपीडी में बढ़े वायरल संक्रमण वाले मरीज 

अमर उजाला से बातचीत में जनरल फिजिशियन डॉ अरविंद शर्मा बताते हैं,  बीते एक हफ्ते से ओपीडी में वायरल संक्रमण और बुखार के साथ आने वाले मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। 

वायरल फीवर में तेज बुखार, शरीर में दर्द-सिरदर्द, कमजोरी, खांसी, गले में खराश और नाक बहने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ मामलों में थकान और भूख कम लगना भी आम होता है। ये लक्षण आमतौर पर 3 से 7 दिनों तक रह सकते हैं।

तेज बुखार, गले में संक्रमण और दवाओं के असर के कारण स्वाद और गंध की क्षमता अस्थायी रूप से कमजोर हो सकती है। अधिकांश मरीजों में यह समस्या दो-तीन दिन में ठीक हो जाती है लेकिन कुछ मरीजों ऐसे भी हैं, जो स्वस्थ होने के बाद फिर बुखार की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे मरीजों में कमजोरी अधिक देखने को मिल रही है।
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बुखार और सिरदर्द की दिक्कत - फोटो : Adobe stock photos
मौसम बदलते ही क्यों बढ़ने लगती है बीमारी?

डॉ अरविंद कहते हैं, मौसम में अचानक बदलाव वायरल संक्रमण का मुख्य कारण होता है। तापमान में उतार-चढ़ाव वायरस के जीवित रहने और फैलने के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। इसके अलावा कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना, भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाना और स्वच्छता की कमी भी संक्रमण का खतरा बढ़ाती है।
 
  • बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को वायरल संक्रमण का खतरा अधिक होता है। 
  • इसके अलावा, जिन लोगों को डायबिटीज, अस्थमा या अन्य क्रॉनिक बीमारियां हैं, उन्हें भी सावधान रहने की जरूरत होती है।

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वायरल संक्रमण का खतरा और बचाव - फोटो : Freepik.com
कैसे फैलता है वायरल संक्रमण?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायरल फीवर के लिए इन्फ्लूएंजा वायरस को मुख्यरूप से जिम्मेदार माना जाता है।
 
  • यह संक्रमण आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, खांसने-छींकने से निकलने वाली बूंदों, दूषित सतह को छूने से फैलता है। 
  • मानसून और सर्दियों में वायरल फीवर के मामले अधिक बढ़ जाते हैं क्योंकि इस दौरान वायरस तेजी से फैलते हैं। 
  • गर्भवती महिलाओं में संक्रमण का खतरा अधिक होता है क्योंकि इस दौरान शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव होता है। 
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फ्लू, सर्दी-जुकाम से कैसे बचें? - फोटो : Freepik.com
वायरल फीवर के लक्षण और बचाव

वायरल फीवर के कारण आमतौर पर लोगों को बुखार की दिक्कत होती है। इसके साथ शरीर में दर्द, सिरदर्द, कमजोरी और थकान महसूस होती है। कई लोगों को ठंड लगने, पसीना आने और मांसपेशियों में दर्द की भी दिक्कत होती है। यदि बुखार 3 से अधिक दिनों तक बना रहे, सांस लेने में कठिनाई हो या बहुत अधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। 
 
  • वायरल फीवर से बचाव के लिए इम्यून सिस्टम को  मजबूत करना और अच्छी स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण हैं।
  • वायरस संक्रमण को रोकने के लिए हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखें और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनें।
  • संतुलित आहार जिसमें फल, सब्जियां, प्रोटीन और विटामिन्स वाली चीजें शामिल हों, ये इम्युनिटी को मजबूत बनाती हैं। 
  • पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी इम्युनिटी बढ़ाकर संक्रमण से बचाव में मदद करते हैं।


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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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