हिंदू धर्म के अनुसार मान्यता है कि हर ग्रहण में गर्भवती महिलाओं को कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। साल का पहला पूर्ण चंद्रगहण 21 जनवरी को लगने वाला है। माना जाता है कि ग्रहण के समय निकलने वाली दूषित किरणें गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा असर डालती हैं।मान्यता के अनुसार किसी भी ग्रहण का असर पूरे 108 दिनों तक रहता है। जिसका असर गर्भवती महिला के होने वाले बच्चे पर पड़ सकता है।
इस तथ्य के पीछे कुछ धार्मिक तो कुछ वैज्ञानिक कारण बताए जाते हैं। आइए जानते हैं क्या करके आप ग्रहण के असर को कम कर सकते हैं।
विज्ञापन
2 of 5
बाहर न जाएं
चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं बाहर न निकलें। ऐसा माना जाता है कि गर्भवती महिला अगर ग्रहण देख लेती है तो उसका सीधा असर उसके होने वाले बच्चे की शारीरिक और मानसिक सेहत पर पड़ता है। जिसकी वजह से शिशु गंदे लाल चिन्हों के साथ पैदा होता है। जन्म के बाद बच्चे के शरीर पर कोई न कोई दाग जरूर पड़ जाता है।
विज्ञापन
3 of 5
नुकीली चीजें
ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्रियों को किसी भी नुकीली चीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जैसे चाकू, कैंची, सूई आदि। शास्त्रों में यह भी कहा जाता है कि न सिर्फ गर्भवती महिलाएं बल्कि उनके पति भी इस समय इन चीजों का इस्तेमाल करने से बचें। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से उसके शिशु के अंगों को हानि पहुंच सकती है।
4 of 5
ग्रहण के दौरान बना खाने से बचें
ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को इस समय बना कुछ भी खाना पीना नहीं चाहिए।कहा जाता है कि इस समय पड़ने वाली हानिकारक किरणें खाने को दूषित कर देती हैं।ऐसे में अगर घर पर खाना बना हो तो उसमें तुरंत तुलसी के पत्ते डाल दें। ग्रहण खत्म होने के बाद उन्हें निकाल दें।ऐसा करने से ग्रहण के बाद भी खाना शुद्ध रहता है।
नहाएं
मान्यता है कि ग्रहण खत्म होने के बाद गर्भवती महिला को जरूर नहा लेना चाहिए वरना उसके शिशु को त्वचा संबधी रोग लग सकते हैं। गर्हण के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए गर्भवती महिला को तुलसी का पत्ता जीभ पर रखकर हनुमान चालीसा और दुर्गा स्तुति का पाठ करना चाहिए।