एशियन गेम्स 2018 गोल्ड मेडलिस्ट विनर नीरज चोपड़ा का वजन कभी 80 किलो था और उन्होंने तीस दिन करीब 20 किलो वेट कम किया था। जानिए कैसे और फॉलो करें तरीका, फायदे में रहेंगे।
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नीरज चोपड़ा
स्पीड पावर और तकनीक का खेल है जैवलिन थ्रो
अमर उजाला के साथ बातचीत करते हुए नीरज ने कहा है कि जैवलिन थ्रो में जीत के लिए स्पीड, पावर, तकनीक तीनों चीजों की जरूरत होती है। उनके अनुसार अच्छा रनअप लेते हुए अंतिम समय पर भाले को सही टाइम पर छोड़ने से ही जीतने की उम्मीद बंधती है।
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neeraj chopra
13 साल की उम्र में था 80 किलो वजन
13 साल की उम्र में नीरज का वजन 80 किलो से ज्यादा का वजन था और उसके लिए 30 मीटर के रनवे पर तेज स्पीड से भागकर भाला फेंकने में सबसे बड़ी बाधा थी। दोस्त की हौसलाअफजाई, परिजनों का सपोर्ट और खेल के प्रति जुनून से नीरज के कदम बढ़ते गए। वजन घटाने के लिए नीरज गांव से स्टेडियम तक दौड़ते आते, प्रैक्टिस करते और वापस घर तक दौड़ते हुए जाते। इस तरह उन्होंने एक माह तकरीबन 20 किलो वजन घटा लिया।
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रोज 8-8 घंटे किया था अभ्यास
नीरज ने बताया कि उनका खुद का रिकॉर्ड कायम था, जिसे तोड़ना उनका लक्ष्य था। दूसरा, गोल्ड मेडल जीतना था। मैंने इसके लिए दिन-रात एक कर दी थी। रोज 8-8 घंटे अभ्यास कर रहा था। वजन भी मेंटेंन करना जरूरी थी, इसलिए एक्सरसाइज खूब की, किस्मत ने साथ दिया और लक्ष्य पूरा हो गया।
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NEERAJ CHOPRA
विनेश से नाम जुड़ने पर नीरज तीन दिन थे परेशान
महिला पहलवान विनेश फौगाट से नाम जुड़ने से नीरज काफी परेशान हो गया था। चाचा भीम चोपड़ा का कहना है कि इसका उसकी प्रैक्टिस पर काफी असर पड़ा। वह तीन दिन तक इस संबंध में नर्वस रहा। उन्होंने कहा कि लोगों की मानसिकता पर निर्भर करता है कि क्या-क्या सोचते हैं?
मेडल जीतने के बाद ही नहीं, पहले भी सुविधा दे सरकार
नीरज के चाचा भीम चोपड़ा ने कहा कि खिलाड़ियों के बड़ी प्रतियोगिताओं में मेडल जीतने के बाद सरकार अच्छी राशि देती है और सभी सुविधाएं भी देती है, यह सरकार की ओर से की जाने वाली अच्छी पहल है, लेकिन नए खिलाड़ी इस स्तर तक पहुंच सकें और बड़ी प्रतियोगिताओं में जाकर मेडल लाएं। इसके लिए उन्हें शुरू से अच्छी सुविधाएं देने पर भी सरकार को विचार करना चाहिए। मजबूत इरादे और दृढ़ इच्छा शक्ति इंसान को हर कठिनाई पार करने की ताकत देती है।