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Cervical Cancer: महिलाओं में मौत के प्रमुख कारणों में से एक है यह कैंसर, जानिए इसके लक्षण से लेकर बचाव तक

Thu, 01 Sep 2022 07:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सर्वाइकल कैंसर एक बड़ा खतरा - फोटो : istock
भारत सहित दुनिया के कई देशों में कैंसर के मामले काफी तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। कैंसर कई प्रकार के हो सकते हैं और ज्यादातर गंभीर और जानलेवा स्थितियों का कारण बनते हैं। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर हर साल लाखों लोगों की मौत कैंसर के कारण हो जाती है। सर्वाइकल कैंसर ऐसा ही एक गंभीर कैंसर है जो महिलाओं में होता है। गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं या जिसे आमतौर पर गर्भाशय के मुंह के कैंसर के नाम से भी जाना जाता है, इसके मामले पिछले कुछ वर्षों में भारत में भी तेजी से बढ़े हैं।

ग्लोबोकैन की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 में वैश्विक स्तर पर सर्वाइकल कैंसर के 604,100 नए मामलों का पता चला और 341,831 लोगों की इस साल इस कैंसर के कारण मौत हो गई।

सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम को लेकर गुरुवार 1 सितंबर को भारत में पहली स्वदेशी वैक्सीन लॉन्च की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैक्सीन के माध्मय से आने वाले वर्षों में कैंसर के इस गंभीर खतरे और मृत्युदर को काफी हद तक कम करने में सफलता मिल सकती है। सर्वाइकल कैंसर, मुख्यरूप से ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के विभिन्न वैरिएंट्स के कारण होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को इससे बचाव के उपाय करते रहने चाहिए। आइए कैंसर के इस खतरे और इसके लक्षणों से लेकर बचाव के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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सर्वाइकल कैंसर के कारण हर साल हो जाती है लाखों मौत - फोटो : Pixabay
 सर्वाइकल कैंसर और इसके लक्षण

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, भारतीय महिलाओं में होने वाले तमाम प्रकार के कैंसर में से 6-29% मामले सर्वाइकल कैंसर के होते हैं। समय पर स्क्रीनिंग टेस्ट करवाकर और एचपीवी संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीनेशन के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। वैसे तो इस कैंसर की शुरुआती स्थिति में लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं, हालांकि इसके बढ़ने के साथ कई तरह की समस्याओं का अनुभव हो सकता है।
  • पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग
  • संभोग के बाद खून बहना।
  • रजोनिवृत्ति के बाद भी होने वाली ब्लीडिंग।
  • तेज गंध के साथ योनि से स्राव होना।
  • पेडू में दर्द बना रहना।
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महिलाओं में बढ़ते कैंसर में से एक है सर्वाइकल कैंसर - फोटो : Pixabay
सर्वाइकल कैंसर के क्या कारण हैं?

सर्वाइकल कैंसर के मामले मुख्यरूप से एचपीवी वायरस के संक्रमण के कारण होते हैं। यह एक यौन संचारित वायरस है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई यौन साथी होने से इस प्रकार के कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली भी आपमें इस कैंसर के जोखिम को बढ़ा देती है।

यदि आप इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं का अधिक सेवन करती हैं, धूम्रपान करती हैं तो भी इसका जोखिम हो सकता है। एक अध्ययन से पता चलता है कि अधिकांश लोगों के जीवन में कभी न कभी एचपीवी का संक्रमण होता है पर उन्हें इसका एहसास नहीं होता क्योंकि उनका शरीर, संक्रमण से मुकाबला करके उसे खत्म कर देता है।

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सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों की समय पर करें पहचान - फोटो : iStock
सर्वाइकल कैंसर का निदान और इलाज

स्क्रीनिंग टेस्ट से सर्वाइकल कैंसर और कोशिकाओं के बढ़ने का पता लगाने में मदद मिलती है। इसके अलावा लक्षणों के आधार पर पुष्टि करने के लिए डॉक्टर एचपीवी डीएनए टेस्ट कराने की भी सलाह दे सकते हैं। सर्वाइकल कैंसर का उपचार कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि कैंसर की अवस्था, अन्य स्वास्थ्य समस्याएं आदि। इसके अधार पर सर्जरी, रेडिएशन और कीमोथेरेपी जैसी तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।
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सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए छोड़ें धूम्रपान - फोटो : Pixabay
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए क्या करें?

डॉक्टर्स कहते हैं, सर्वाइकल कैंसर एक बड़ा खतरा है इससे सुरक्षित रहने के लिए सभी महिलाओं को बचाव के तरीकों के बारे में जानना आवश्यक है। एचपीवी वैक्सीन, आपमें इस कैंसर के खतरे को कम कर देती है, देश में जल्द ही स्वदेशी वैक्सीन भी उपलब्ध हो जाएगी। इसके अलावा संभोग के दौरान हाइजीन और सुरक्षात्मक उपायों का विशेष ध्यान रखें। यदि आप धूम्रपान करती हैं तो इसे बंद कर दें, इससे सर्वाइकल कैंसर के साथ कई अन्य प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम हो सकता है। 


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स्रोत और संदर्भ
Cervical cancer

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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