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Cervical Cancer Awareness Month: कौन सी गलतियां महिलाओं में बढ़ा रही हैं इस जानलेवा कैंसर का खतरा?

Tue, 13 Jan 2026 05:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • सर्वाइकल कैंसर, ऐसा कैंसर है जिसे आसानी से रोका जा सकता है, हालांकि ये कई कारणों से चुनौतीपूर्ण भी है। 
  •  हम जाने-अनजाने कुछ ऐसी गलतियां करते रहते हैं जिसके कारण  सर्वाइकल कैंसर का खतरा हो सकता है।
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सर्वाइकल कैंसर का खतरा - फोटो : Amar Ujala
कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर बीमारी है, जो हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बनती है। महिला-पुरुष हों या बच्चे, सभी इसका शिकार पाए जा रहे हैं। पुरुषों में फेफड़ों और मुंह के कैंसर जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। हाल के वर्षों में सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभर रहा है जिसको लेकर विशेषज्ञ सभी लोगों को सावधान करते हैं।

सर्वाइकल कैंसर यानी गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर अब उम्रदराज महिलाओं के साथ-साथ कम उम्र की लड़कियां और युवा महिलाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण है, जो एक यौन संचारित वायरस है। भारत में हर साल हजारों नई महिलाएं इस बीमारी का शिकार होती हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में मामलों का पता देर से चलता है। 

जनवरी माह को सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह के तौर पर भी मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि वो कौन सी गलतियां हैं जो इस कैंसर का खतरा बढ़ाती जा रही हैं?
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महिलाओं में बढ़ते कैंसर के मामले - फोटो : Freepik.com
सर्वाइकल कैंसर और इसके खतरे

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सर्वाइकल कैंसर ऐसा कैंसर है जिसे आसानी से रोका जा सकता है, हालांकि ये कई कारणों से चुनौतीपूर्ण भी है। 
  • शुरुआती चरण में इसके लक्षण बेहद हल्के या बिल्कुल नहीं होते, जिससे महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। 
  • ज्यादातर मामलों में इसका पता ही तब चल पाता है जब कैंसर काफी बढ़ चुका होता है।
  • इसके अलावा हम जाने-अनजाने कुछ ऐसी गलतियां करते रहते हैं जिसके कारण भी सर्वाइकल कैंसर का खतरा हो सकता है।
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कैंसर बढ़ाने वाले कारक - फोटो : Adobe stock photos
कौन सी गलतियां पड़ रही हैं भारी?

विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में यौन सक्रिय होना, असुरक्षित यौन संबंध, एक से अधिक पार्टनर, कमजोर इम्यून सिस्टम और एचपीवी संक्रमण इसके प्रमुख कारण हैं। 
  • इसके अलावा, धूम्रपान करने वाली महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा ज्यादा पाया गया है क्योंकि तंबाकू शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है। 
  • लंबे समय तक ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का उपयोग और पोषण की कमी भी जोखिम को बढ़ा सकती है।
  • बीमारी के शुरुआती लक्षण जैसे पीरियड्स का ज्यादा या अनियमित होने, वजन घटने, थकान और कमर दर्द आदि को अनदेखा करना नुकसादायक हो सकता है।
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सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम - फोटो : Freepik.com
इससे बचाव कैसे करें?

सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका एचपीवी वैक्सीनेशन है। 
  • यह वैक्सीन 9 से 14 वर्ष की लड़कियों के लिए सबसे ज्यादा असरदार मानी जाती है।
  • 26 वर्ष तक की महिलाएं भी डॉक्टर की सलाह से इसे लगवा सकती हैं। 
  • इसके अलावा, सुरक्षित यौन संबंध बनाना और कंडोम का इस्तेमाल संक्रमण के खतरे को कम करता है।
  • 21 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं को नियमित रूप से पैप स्मीयर टेस्ट कराना चाहिए, ताकि शुरुआती बदलावों का समय रहते पता लगाया जा सके। 
  • संतुलित आहार, हरी सब्जियां, फल, धूम्रपान से दूरी और अच्छी इम्युनिटी सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है।


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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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