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Cardiac Health: क्या है कार्डियक ट्रोपोनिन टेस्ट? विशेषज्ञ से जानें कब और क्यों है ये जरूरी

Wed, 19 Oct 2022 04:08 PM IST
स्वाति शैवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल की लय ताल को रखिये बरकरार - फोटो : Pixabay
डॉ. कीर्तिमान सिंह, 
डीएम कार्डियोलॉजी, 
डायरेक्टर, 
व्याख्या कार्डियक एन्ड फर्टिलिटी सेंटर, 
लखनऊ 



दिल का सही लय और ताल में धड़कते रहना अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है। पिछले कुछ महीनों में कई कम उम्र लोगों के हार्ट अटैक से गुजर जाने की खबरें सुर्खियां बनीं। इनमें से अधिकांश न केवल फिटनेस को लेकर संजीदा थे बल्कि नियमित व्यायाम और हेल्दी डाइट भी उनके रूटीन का हिस्सा थी। इसके बावजूद वे बच नहीं पाए। इसका एक साफ़ मतलब यही है कि दिल की अच्छी सेहत के लिए केवल फिटनेस एकमात्र उपाय नहीं होती। इसके अलावा भी आपको कई चीजों पर ध्यान देना जरूरी होता है। यही नहीं जरूरत से ज्यादा व्यायाम भी खतरनाक हो सकता है यह भी एक तथ्य है। 

जाहिर है कि पिछले एक दशक में स्वास्थ्य के प्रति लोगों में सजगता बढ़ी है लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसको केवल जिम और खान-पान से जोड़कर ही देखा है। जबकि स्वास्थ्य संबंधी जांचें और बीमारियों के लक्षणों को लेकर भी सही जानकारी होना जरूरी है। इसके आधार पर आपको इलाज पाने और जान बचाने में सहायता मिल सकती है। हार्ट अटैक या दिल के रोगों के मामले में भी यही बात ध्यान रखने लायक है। इसी कड़ी में जानिए क्या है कार्डियक ट्रोपोनिन टेस्ट और इसकी जरूरत कब और क्यों पड़ती है। 
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लगातार काम करता है ह्रदय - फोटो : social media
दिल के काम में आती बाधा 

मनुष्य के दिल का काम होता है खून और उसके साथ ऑक्सीजन को पंप करके सुचारू रूप से पूरे शरीर में संचारित करते रहना यानी शरीर के भीतर खून को हर अंग तक पहुंचाने के लिए लगातार काम करना। प्रकृति ने यह व्यवस्था इस प्रकार बनाई है कि आपके सोते -जागते, चलते-बैठते हर स्थिति में दिल निरंतर काम करता रहता है। स्थिति तब गड़बड़ाने लगती हैं जब दिल की इस प्रक्रिया में बाधा आने लगती है। जब खून और ऑक्सीजन सही तरीके से शरीर में नहीं पहुंचती तो केवल ह्रदय ही नहीं पूरे शरीर की सेहत पर बुरा असर पड़ने लगता है। इसी तरह पनपते हैं ह्रदय रोग भी। 
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लक्षणों पर हमेशा गौर करें - फोटो : Pixabay
ऐसे होती है मदद 

कार्डियक समस्याओं को लेकर लोगों में पहले से अधिक सजगता तो आई है लेकिन अब भी लोग इसके बारे में आधी-अधूरी जानकारी ही रखते हैं। यही कारण है कि ज्यादातर लोगों को हृदय रोगों के बारे में तब पता चलता है जब कोई लक्षण गंभीरता से सामने आता है। कई बार लक्षण सामने आने पर भी व्यक्ति समझ नहीं पाता। लेकिन यदि थोड़ी सतर्कता रखकर समय पर डॉक्टर के पास पहुंच सकें तो जान बचाने में मदद मिल सकती है। कार्डियक ट्रोपोनिन टेस्ट ऐसी ही स्थिति में मददगार साबित होता है। यह टेस्ट हृदय की मांसपेशियों में होने वाली क्षति का पता लगाता है। इससे हार्ट अटैक की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। डॉक्टर अक्सर शारीरिक परीक्षण के बाद आशंका होने पर इस टेस्ट की सलाह देते हैं। यदि किसी व्यक्ति में सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, तेज पसीना आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 

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ह्रदय का सुचारू कार्य करना है जरूरी - फोटो : Social Media
क्या है ट्रोपोनिन?

खून को पंप करने की प्रक्रिया में दिल सिकुड़ता और फूलता है। ट्रोपोनिन वे प्रोटीन हैं जो कार्डियक और स्केलेटल मसल्स के संकुचन में सहायता करते हैं। स्केलेटल मसल्स वे हैं जो शरीर के कई हिस्सों में संचालन का काम करती हैं। जबकि कार्डियक मसल्स मिलकर दिल की दीवार बनाती हैं। इन दोनों ही प्रकार की मांसपेशियों में तीनों प्रमुख ट्रोपोनिन उपस्थित होते हैं। मुख्यतः ट्रोपोनिन के तीन प्रकार होते हैं- ट्रोपोनिन सी, आई और टी। इनमें से मुख्यतः ट्रोपोनिन टी और आई को ह्रदय में हुई क्षति को समझने के लिए जांचा जाता है। 
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खून में ट्रोपोनिन के स्तर से पता चलती है समस्या - फोटो : pixabay
ऐसे होती है जांच

इस जांच के अंतर्गत खून में ट्रोपोनिन के स्तर को मापा जाता है। ट्रोपोनिन की मात्रा रक्त में तब ही दिखाई देती हैं जब हार्ट की मसल्स को क्षति पहुंच चुकी होती है, अर्थात हार्ट अटैक की स्थिति में। हालांकि खून में ट्रोपोनिन की मात्रा के बढ़ने के कुछ कारण और भी हो सकते हैं लेकिन हार्ट अटैक इनमें सबसे आम है। ख़ास बात यह है कि इसके लिए पहले भी जांचें की जाती थीं लेकिन वे खून में ट्रोपोनिन के कम होते स्तर को पकड़ नहीं पाती थीं। अब इसके लिए एडवांस्ड जांचें उपलब्ध हैं। हाई सेंसिटिविटी कार्डियक ट्रोपोनिन जांच से तो शुरूआती 3 घंटों में लगभग 100 प्रतिशत तक सही परिणाम मिल सकते हैं। 
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नजरअंदाज न करें दर्द और जकड़न - फोटो : Pixabay
लक्षण और पुष्टि 

यह टेस्ट आमतौर पर डॉक्टर द्वारा सलाह दिए जाने के बाद ही करवाया जाता है। यदि मरीज को सीने में दर्द, जकड़न, सांस लेने में तकलीफ आदि जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो डॉक्टर इस टेस्ट के लिए कहते हैं। इसके साथ ईसीजी या ईकेजी और अन्य ब्लड टेस्ट भी किये जाते हैं, ताकि हार्ट को पहुंची क्षति का एकदम स्पष्ट पता लगाया जा सके और उसी हिसाब से इलाज दिया जा सके। हार्ट अटैक की स्थिति में अधिकांश लोगों में 3 घंटे के भीतर भीतर खून में ट्रोपोनिन की मात्रा बढ़ जाती है और करीब एक-दो हफ्ते यह मात्रा बढ़ी हुई रहती है। वैसे हार्ट अटैक को कोई फिजिशियन लक्षणों के आधार पर और ईसीजी से भी समझ सकता है लेकिन कार्डियक ट्रोपोनिन टेस्ट से इसकी सही पुष्टि हो जाती है, खासकर नॉन एसटी एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फ्रेक्शन (हार्ट अटैक का एक प्रकार) की स्थिति में यही टेस्ट काम करता है। 
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महिला पुरुषों में भिन्न हो सकते हैं लक्षण - फोटो : pixabay
अलग अलग है मात्राएँ 

हार्ट अटैक के मामले में महिलाओं और पुरुषों में कुछ लक्षण अलग अलग भी हो सकते हैं। इसी तरह ट्रोपोनिन टेस्ट की नॉर्मल रेंज भी महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग अलग होती है। इस टेस्ट में 0-14 नैनोग्राम प्रति लीटर की मात्रा को नॉर्मल रेंज माना जाता है। जबकि महिलाओं के लिये 10 नैनोग्राम प्रति लीटर को सामान्य रेंज की अपर लिमिट माना जाता है। वहीं पुरुषों के लिए यह मात्रा 15 नैनोग्राम प्रति लीटर की होती है। इस मात्रा का बढ़ना दिल के संकट में होने का संकेत हो सकता है। इसलिए लक्षण सामने आते ही तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचना आवश्यक है। यह हमेशा याद रखिये कि हार्ट अटैक के मामले में समय पर इलाज मिलने से जान बचने का प्रतिशत बहुत बढ़ जाता है। 
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डॉक्टर से सलाह जरूर लें - फोटो : iStock
नोट: यह लेख डॉ. कीर्तिमान सिंह से हुई बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। 
 
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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