कैंसर के मामले वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए बड़ा जोखिम रहे हैं, भारत के लिए भी ये बीमारी बड़ी चुनौती बनती जा रही है। साल-दर-साल कैंसर के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य क्षेत्र पर न सिर्फ अतिरिक्त दबाव बढ़ाया है साथ ही इसके कारण मृत्युदर भी अधिक देखा जाता रहा है। अध्ययनों के आधार पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जिस गति से भारत में कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, ऐसे में आने वाले वर्षों में इसका दबाव और अधिक हो सकता है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में साल 2022 में 14.61 लाख से अधिक लोगों में कैंसर का निदान किया गया। अध्ययनकर्ताओं को आशंका है कि 2025 तक इस आंकड़े में करीब 13 फीसदी की वृद्धि हो सकती है। साल 2022 में दुनियाभर में अनुमानित 20 मिलियन (दो करोड़) कैंसर के नए मामलों का निदान किया गया और 9.7 मिलियन (97 लाख) से अधिक लोगों की मौत हो गई। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि साल 2050 तक कैंसर के रोगियों संख्या 35 मिलियन (3.5 करोड़) प्रतिवर्ष तक पहुंच सकती है।
पुरुषों में प्रोस्टेट और महिलाओं में सर्वाइकल-ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे अधिक रिपोर्ट किए जा रहे हैं। कैंसर की समय रहते पहचान के लिए विशेषज्ञों ने कुछ सूत्र बताए हैं जिनके बारे में जानना सभी के लिए बहुत आवश्यक है। एक सर्वे में
भारत को कैंसर का गढ़ बनता हुआ बताया गया है।