फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलर्ट: टैटू बनवाने से भी हो सकता है एचआईवी संक्रमण? यूपी से सामने आए मामलों ने डराया, डॉक्टर से जानिए खतरे

Sat, 24 Oct 2026 03:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

HIV Transmission Through Syringes: एचआईवी वायरस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है। असुरक्षित यौन संबंधों और संक्रमित सुई या सिरिंज के इस्तेमाल से इसका संक्रमण फैल सकता है। टैटू बनवाते समय नई, सुरक्षित सुई का इस्तेमाल न करने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। उत्तर-प्रदेश से संक्रमण के सामने आए मामलों ने चिंता बढ़ा दी है।
विज्ञापन
1 of 5
टैटू से एचआईवी का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस का संक्रमण धीरे-धीरे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहद कमजोर कर देता है। समय पर जांच और इलाज न मिलने पर यह एड्स जैसी गंभीर अवस्था तक पहुंच सकता है। एचाईवी संक्रमण को पहले लाइलाज माना जाता था, हालांकि मेडिकल साइंस की प्रगति और कारगर दवाओं की मदद से अब लोग संक्रमण से ठीक भी हो रहे हैं।

भारत में भी एचआईवी के मामले वर्षों से गंभीर चिंता का कारण रहे हैं। अमर उजाला में अगस्त में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने हिमाचल प्रदेश में एचआईवी संक्रमण के चौंकाने वाले आंकड़ों के बारे में जानकारी दी थी। इससे पहले मेघालय से भी सामने आए एचआईवी के मामलों को लेकर विशेषज्ञों ने अलर्ट किया था। 

आमतौर पर माना जाता रहा है कि एचआईवी का खतरा सिर्फ असुरक्षित यौन संबंधों से होता है, हालांकि ये संक्रमित खून के संपर्क में आने से भी हो सकता है? खासकर टैटू बनवाते समय अगर एक ही सिरिंज या सुई का इस्तेमाल कई लोगों पर किया जाता है और उसे सही तरीके से स्टरलाइज यानी संक्रमण-मुक्त न किया गया हो, तो संक्रमण फैलने का जोखिम बढ़ सकता है।

अब उत्तर प्रदेश से सामने आ रहे एचआईवी संक्रमण के मामले और भी चिंता बढ़ा रहे हैं।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
HIV Cases - फोटो : Amarujala.com
उत्तर प्रदेश में 10 महीने में 900 एचआईवी पॉजिटिव

हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश में इस साल जनवरी से अक्तूबर तक में ही करीब 900 नए एचआईवी संक्रमित मिले हैं। इनमें आधे से ज्यादा किशोर और युवा हैं जिनकी उम्र 15 से 45 साल के बीच है। सर्वाधिक 728 लोगों में संक्रमण की पुष्टि बीएचयू अस्पताल में जांच के बाद हुई है। दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में जांच करवाने वाले 175 लोगों की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। शहरी इलाकों में रहने वाले ज्यादा संक्रमित हुए हैं।
 
  • संक्रमण की जो वजह सामने आई है उनमें एक ही सिरिंज से ड्रग्स लेना, असुरक्षित यौन संबंध, गलत इंजेक्शन से टैटू बनवाना शामिल है। सरकारी हो या निजी अस्पताल हर छोटी से बड़ी सर्जरी करवाने से पहले डॉक्टर एचआईवी की जांच करवाते हैं।
  • वाराणसी में जिला अस्पताल स्थित ओएसटी सेंटर पर पिछले दो साल में 30 ऐसे लोगों में एचआईवी की पुष्टि हुई है जिन्होंने एक ही सिरिंज से नशीला ड्रग्स लिया था। इनमें से दो महिलाओं की अब तक मौत हो चुकी है। 

इस मामले के बाद से लोगों में डर बढ़ गया है। अब सवाल ये है कि टैटू बनवाना कैसे इस संकट को बढ़ाता जा रहा है और इससे बचे रहने के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं?
विज्ञापन

3 of 5
टैटू से एचआईवी का खतरा - फोटो : Freepik.com
टैटू बनवाना एचआईवी का खतरा कैसे बढ़ाता है? 

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि टैटू बनवाते समय त्वचा में बार-बार सुई चुभाई जाती है, जिससे त्वचा की ऊपरी परत में छोटे घाव बन जाते हैं। अगर टैटू बनाने वाला व्यक्ति एक ही सुई या सिरिंज का इस्तेमाल कई लोगों पर करता है और उपकरण पर किसी संक्रमित व्यक्ति का खून लगा है, तो एचआईवी संक्रमण फैलने की आशंका हो सकती है।
 
  • खून में मौजूद वायरस दूषित सुई के जरिए दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंच सकता है। 
  • सुई पर खून की मात्रा बहुत कम हो, तब भी जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 
  • टैटू की सुई के साथ-साथ इस्तेमाल किए गए अन्य उपकरणों या दूषित इंक से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। 

4 of 5
टैटू बनवाते समय बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में डॉक्टर सलभ मिश्रा बताते हैं, ऐसा नहीं है कि टैटू बनवाने से सभी लोगों को एचआईवी होता है। अगर प्रशिक्षित व्यक्ति नए, स्टरलाइज्ड उपकरणों और सुरक्षित तरीकों का इस्तेमाल करता है, तो जोखिमों से बचा जा सकता है। टैटू बनवाने से पहले यह जरूर जांचें कि सुई नई और सीलबंद है या नहीं, साथ ही इंक और अन्य सामान भी सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किए जा रहे हैं?

टैटू से एचआईवी का खतरा आमतौर पर तब होता है जब आप सड़क किनारे, मेले या बाजार में असुरक्षित तरीके से टैटू बनवाते हैं। यहां इस्तेमाल होने वाली सुइयां कितनी सुरक्षित हैं इसकी ज्यादा प्रमाणिकता नहीं होती।
 
  • चिंता की बात यह है भी कि एचआईवी संक्रमण के शुरुआती दौर में कई लोगों को कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे बीमारी के बढ़ने और खतरनाक रूप लेने का खतरा बढ़ जाता है।
  • एचआईवी संक्रमण पर ध्यान न दिया जाए तो ये एड्स का कारण बन सकती है जिसे  जानलेवा माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
एचआईवी संक्रमण का जोखिम - फोटो : Freepik.com
एचआईवी संक्रमण के खतरे और बचाव

डॉक्टर सलभ बताते हैं, एचआईवी संक्रमण के शुरुआती कुछ हफ्तों में कुछ लोगों को बुखार, गले में खराश, सिरदर्द, त्वचा पर चकत्ते और शरीर में दर्द जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। ये लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे भी लग सकते हैं। कई लोगों में शुरुआती दौर में कोई लक्षण नहीं दिखता।

अगर संक्रमण की समय रहते पहचान और इलाज न हो पाए तो समय के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर हो जाती है। इससे बार-बार संक्रमण होने, वजन घटने, लंबे समय तक बुखार या दस्त रहने और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई का इस्लेतामल, असुरक्षित तरीके से टैटू या पियर्सिंग करवाना और संक्रमित खून के संपर्क में आना संक्रमण का खतरा बढ़ाने वाला हो सकता है। एचआईवी से बचाव के लिए इन सभी को लेकर सावधानी बरतते रहना जरूरी है।


--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें