फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Budaun Rabies Case: क्या कुत्तों के चाटने मात्र से भी हो सकता है रेबीज? जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Wed, 20 Aug 2025 06:46 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Badaun Rabies Case: अब तक आपने कुत्ते के काटने से रेबीज के केस देखे होंगे, लेकिन बदायूं की घटना ने सबको हिलाकर रख दिया है। बहुत से लोगों के मन में ये सवाल है कि क्या कुत्तों के चाटने मात्र से भी रेबीज हो सकता है? आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
विज्ञापन
1 of 5
रेबीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
Rabies Due To Dog Licking: हाल ही में बदायूं में घटी एक दुखद घटना ने एक बार फिर से रेबीज के खतरे और उसके प्रति जागरूकता की कमी को उजागर किया है। सहसवान क्षेत्र के एक 2 साल के मासूम बच्चे अदनान की मौत रेबीज के कारण हो गई। इस घटना में ध्यान देने वाली बात यह है कि बच्चे को कुत्ते ने काटने के बजाय सिर्फ जीभ से चाटा था और उसे रेबीज हो गया। इस घटना को परिजनों ने सामान्य मानकर अनदेखा कर दिया, जिसकी कीमत उन्हें अपने बच्चे की जान गंवाकर चुकानी पड़ी।

ऐसे में बहुत से लोगों के दिमाग में ये सवाल है कि क्या कुत्ते के चाटने मात्र से भी रेबीज हो सकता है? इस सवाल का जवाब अच्छे से समझने के लिए इस  दोसा के अदनान के केस को समझना जरूरी है। दरअसल, एक महीने पहले अदनान को खेलते समय चोट लग गई थी, चोट से खून बहने लगा था और इसी दौरान पास में बैठे कुत्ते ने उसके घाव पर चाट लिया था। 

बदायूं के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रशांत त्यागी के अनुसार यह संक्रमण संक्रमित जानवर की लार के खुले घाव के संपर्क में आने (चाटने) से भी हो सकता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं कि रेबीज क्या है और कैसे फैलता है साथ ही ये भी जानेंगे कि इससे बचने के क्या उपाय हैं?
विज्ञापन

2 of 5
रेबीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
रेबीज क्या है और यह कैसे फैलता है?
रेबीज एक जानलेवा वायरल बीमारी है जो जानवरों से मनुष्यों में फैलती है। इसका वायरस, लाइसावायरस, संक्रमित जानवर की लार में मौजूद होता है। यह वायरस शरीर में मुख्य रूप से कुत्ते, बिल्ली या बंदर जैसे किसी संक्रमित जानवर के काटने या खरोंचने से प्रवेश करता है।

साथ ही यह भी सच है कि यह वायरस किसी भी खुले घाव या कट-फटी त्वचा पर संक्रमित जानवर की लार के संपर्क में आने से भी फैल सकता है। इसका मतलब है कि अगर कोई संक्रमित कुत्ता आपके किसी ताजे घाव या खरोंच को चाटता है, तो रेबीज का खतरा बढ़ जाता है। इसीलिए ऐसी किसी भी घटना को अनदेखा न किया जाए।

ये भी पढ़ें- Health Tips: आखिर क्यों होते हैं शरीर पर फोड़े और फुंसी? जानें इसके पीछे की तीन बड़ी वजहें
 
विज्ञापन

3 of 5
रेबीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
कुत्ते के चाटने मात्र से रेबीज होने का खतरा
सामान्य तौर पर अगर कोई रेबीज से संक्रमित कुत्ता आपकी स्वस्थ और बिना कटी-फटी त्वचा को चाटता है, तो रेबीज होने की संभावना बहुत कम होती है, क्योंकि वायरस त्वचा के परत को नहीं भेद सकता। लेकिन अगर आपके शरीर पर कोई छोटा घाव, खरोंच या कट है और उस पर कुत्ते की लार लग जाती है, तो इसे एक उच्च जोखिम वाला संपर्क माना जाता है।

ऐसे मामलों में रेबीज का वायरस आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकता है और संक्रमण का कारण बन सकता है। बदायूं के बच्चे के मामले में कुत्ते ने उसके घाव पर चाटा था, जिससे वायरस को शरीर में प्रवेश करने का मौका मिला और यह दुखद घटना घटी।

ये भी पढ़ें- Prostate Cancer: इन गलत आदतों की वजह से पुरुषों में बढ़ जाता है प्रोस्टेट कैंसर का खतरा, बरतें ये सावधानियां

4 of 5
कुत्ते का काटना - फोटो : Adobe Stock
रेबीज के लक्षण और बचाव
रेबीज के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 20 से 90 दिनों के भीतर दिखना शुरू हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में इसमें महीनों या साल भी लग सकते हैं। इसके लक्षणों में पानी से डर लगना (हाइड्रोफोबिया), बुखार, सिरदर्द, बेचैनी और अजीब व्यवहार शामिल हैं। 

एक बार जब लक्षण दिखाई देते हैं, तो बीमारी लाइलाज हो जाती है और यह लगभग हमेशा घातक होती है। इसलिए बचाव ही एकमात्र उपाय है। कुत्ते बिल्ली या किसी भी जंगली जानवर के काटने, खरोंचने या खुले घाव को चाटने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और रेबीज का टीका लगवाएं
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
रेबीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
जागरूकता और रोकथाम है सबसे जरूरी
बदायूं की घटना इस बात पर जोर देती है कि रेबीज के जोखिम के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना कितना महत्वपूर्ण है। हमें न केवल अपने पालतू जानवरों को रेबीज का टीका लगवाना चाहिए, बल्कि किसी भी जानवर के साथ संपर्क में आने के बाद तुरंत चिकित्सा सलाह लेनी चाहिए।

बीज का टीका किसी भी नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध होता है। याद रखें थोड़ी सी लापरवाही किसी की भी जान ले सकती है, इसलिए जोखिम न लें और हमेशा सतर्क रहें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें