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जानना जरूरी: क्या फैटी लिवर के कारण लिवर कैंसर होने का भी खतरा रहता है? यहां जानिए सबकुछ

Mon, 12 May 2025 10:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण 20 की उम्र में भी लोगों को फैटी लिवर की समस्या हो रही है। साल 2022 में प्रकाशित एक स्वीडिश अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया कि एनएएफएलडी वाले लोगों में लिवर कैंसर का जोखिम सामान्य आबादी के लोगों की तुलना में 12 गुना अधिक था।
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फैटी लिवर और इसके कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : adobe stock images
फैटी लिवर यानी लिवर में सामान्य से अधिक मात्रा में फैट जमा होने की समस्या सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली हो सकती है। ये समस्या अब कम उम्र के लोगों को भी अपना शिकार बना रही है। विशेषतौर पर भारतीय लोगों में फैटी लिवर की दिक्कत तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में हर तीसरे व्यक्ति को फैटी लिवर डिजीज की समस्या हो सकती है। पिछले साल राजधानी दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने सभी देशवासियों को इस बढ़ते खतरे से बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की सलाह दी थी। 

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण 20 की उम्र में भी लोगों को फैटी लिवर बीमारी हो रही है। पर क्या आप जानते हैं कि फैटी लिवर की समस्या आपमें कैंसर के खतरे को भी बढ़ाने वाली हो सकती है?


(ये भी पढ़िए- लिवर में फैट बनने से कैसे रोकें, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताए इसके लिए जरूरी उपाय; आप भी जानिए)
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लिवर में फैट जमा होने की समस्या - फोटो : Freepik.com
फैटी लिवर और इसके कारण होने वाली समस्याएं

आप इस बारे में शायद ही कभी सोचते होंगे, लेकिन आपका लिवर शरीर को स्वस्थ रखने के लिए निरंतर काम करता रहता है। लिवर भोजन को पचाने से लेकर शरीर से अपशिष्टों को बाहर निकालने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि आपका लिवर ही अगर अस्वस्थ हो जाए तो फिर क्या होगा?

फैटी लिवर की समस्या हमारे लिवर को बीमार कर रही है। नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज (एनएएफएलडी) की समस्या उन लोगों को प्रभावित कर रही है जो बहुत कम या कभी भी शराब नहीं पीते थे। डॉक्टर कहते हैं, अगर फैटी लिवर का समय पर इलाज न हो पाए या फिर ये गंभीर रूप ले ले तो इसके कारण लिवर में कैंसर होने का जोखिम भी बढ़ सकता है।
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लिवर कैंसर का खतरा - फोटो : Freepik.com
फाइब्रोसिस या सिरोसिस और कैंसर का खतरा

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में इंटरनल मेडिसिन की  एसोसिएट प्रोफेसर जेसिका ह्वांग कहती हैं, फैटी लिवर की शुरुआती स्थिति में ज्यादातर लोगों में कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं। यही कारण है कि इसका समय पर पता नहीं चलता और इलाज नहीं हो पाता। अगर इस बीमारी को ऐसे ही छोड़ दिया जाए और इसका इलाज न हो पाए तो समय के साथ ये लिवर की कोशिकाओं में क्षति, लिवर फाइब्रोसिस या सिरोसिस और लिवर कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती है।

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लिवर सिरोसिस और इसके कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
अध्ययनों से पता चलता है कि मोटापे से ग्रस्त 90% लोगों में फैटी लिवर का खतरा रहता है।

लिवर में फैट बढ़ने की स्थिति में आपके लिवर की खुद को विषाक्त पदार्थों से बचाने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। ये स्थिति लिवर में सूजन पैदा कर सकती है जिसके कारण सिरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। लिवर सिरोसिस एक गंभीर स्थिति है, जो लिवर में कैंसर होने के खतरे को बढ़ा देती है।
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लिवर से संबंधित गंभीर बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com
एनएएफएलडी के कारण लिवर कैंसर का जोखिम

साल 2022 में प्रकाशित एक स्वीडिश अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया कि एनएएफएलडी वाले लोगों में लिवर कैंसर का जोखिम सामान्य आबादी के लोगों की तुलना में 12 गुना अधिक था। इसके अतिरिक्त, ऐसे लोगों में किसी भी कैंसर के विकसित होने का जोखिम करीब दो गुना अधिक था।

इसी तरह दक्षिण कोरियाई राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा सेवा के डेटा का उपयोग करके साल 2023 में किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि अल्कोहल पीने के कारण होने फैटी लिवर वाले पुरुषों में लीवर कैंसर का जोखिम 2.34 गुना वहीं महिलाओं में 2.60 गुना अधिक था।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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