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Caffeine Intake: क्या ज्यादा चाय-कॉफी का महिलाओं में हार्मोनल संतुलन पर भी पड़ सकता है असर? जानिए इसका सच

Sun, 23 Aug 2026 09:00 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या ज्यादा चाय-कॉफी पीने से महिलाओं के हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं? कैफीन का पीरियड्स, फर्टिलिटी और प्रेग्नेंसी पर कितना असर पड़ता है? जानिए दिन में कितनी चाय-कॉफी सुरक्षित मानी जाती है और किन लक्षणों में कैफीन का सेवन कम कर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
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चाय-कॉफी - फोटो : Freepik.com
सुबह की शुरुआत चाय या कॉफी से करना ज्यादातर लोगों की आदत है। इसके अलावा थकान, नींद आ रही हो या काम का दबाव ज्यादा हो तो भी कैफीन वाला पेय तुरंत राहत देता हुआ लगता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दिनभर में बहुत ज्यादा चाय-कॉफी पीना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ज्यादा कैफीन महिलाओं के हार्मोन और प्रजनन स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादा कैफीन शरीर पर कई तरह के असर डाल सकता है। कुछ महिलाओं में इसके कारण नींद, बेचैनी, धड़कन, पेट की परेशानी या मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं का जोखिम भी रहता है। हालांकि इसके कारण हार्मोनल असंतुलन का खतरा कम देखा गया है।

अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियंस एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स के विशेषज्ञ गर्भावस्था में 200 मिलीग्राम से कम कैफीन लेने की सलाह देते हैं। किन महिलाओं को ज्यादा सावधान रहना चाहिए? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
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कॉफी का सेहत पर असर - फोटो : Freepik.com
क्या कैफीन हार्मोन संतुलन बिगाड़ देता है?

कैफीन को सीधे तौर पर हार्मोनल बीमारी का कारण कहना सही नहीं है। कुछ अध्ययनों में कैफीन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन के बीच संभावित संबंधों की चर्चा हुई है, लेकिन इसके आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि चाय-कॉफी पीने से महिलाओं के हार्मोन निश्चित रूप से बिगड़ जाते हैं। 
 
  • बहुत ज्यादा कैफीन से नींद खराब होने, बेचैनी और तनाव बढ़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • ये बदलाव अप्रत्यक्ष रूप से मासिक धर्म और रोजमर्रा की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं।
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गर्भावस्था में बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com
पीरियड्स और प्रजनन क्षमता पर असर

मासिक धर्म पर कैफीन के प्रभाव को लेकर अध्ययन पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। कुछ अध्ययनों में ज्यादा कैफीन लेने से मासिक चक्र की अवधि में बदलाव देखा गया है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि कैफीन ही इसका कारण है। इसी तरह उपलब्ध शोध में सामान्य रूप से कैफीन लेने से गर्भधारण की क्षमता कम होने का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है।
 
  • अगर पीरियड्स लगातार अनियमित हो रहे हैं, बहुत ज्यादा दर्द या रक्तस्राव हो रहा है या गर्भधारण में परेशानी आ रही है, तो केवल चाय-कॉफी को वजह मानने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

डॉक्टर कहते हैं, गर्भावस्था में कैफीन का सेवन सीमित रखने की सलाह दी जाती है। चाय-कॉफी के अलावा चॉकलेट, एनर्जी ड्रिंक और कुछ अन्य उत्पादों में भी कैफीन हो सकता है। 

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चाय-कॉफी से क्या होता है? - फोटो : Freepik.com
कब हो जाएं सावधान?

अगर चाय-कॉफी लेने के बाद बार-बार धड़कन तेज होना, बेचैनी, हाथ कांपना, सिरदर्द, पेट में परेशानी या नींद खराब होने जैसी समस्या हो रही है, तो कैफीन की मात्रा पर ध्यान देना चाहिए।
 
  • कैफीन नींद में बाधा डाल सकती है और कुछ लोगों में चिंता या बेचैनी को बढ़ा सकती है।
  • गर्भावस्था में यह मितली और नींद की परेशानी को भी प्रभावित कर सकता है।
  • अगर इन समस्याओं के साथ पीरियड्स में लगातार बदलाव, बहुत ज्यादा थकान या अन्य हार्मोन संबंधी लक्षण हैं, तो केवल चाय-कॉफी कम कर दें और डॉक्टर से जांच कराएं।
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डॉक्टर की सलाह जरूरी - फोटो : Freepik.com
तो क्या चाय-कॉफी बंद कर दें?

डॉक्टर कहते हैं, चाय-कॉफी आमतौर पर पेट से संबंधित दिक्कतें बढ़ा सकती है पर इससे हार्मोनल दिक्कतों का खतरा नहीं होता है। हालांकि अगर पीरियड्स लगातार अनियमित हैं, गर्भधारण में परेशानी हो रही है, असामान्य रक्तस्राव हो रहा है या हार्मोन से जुड़े दूसरे लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो डॉक्टर से मिलें।

चाय-कॉफी को पूरी तरह बंद करने के बजाय मात्रा नियंत्रित करना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।


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स्रोत: 
Metabolic and hormonal effects of caffeine: randomized, double-blind, placebo-controlled crossover trial


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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