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H1N1 Alert: फेफड़ों और हार्ट पर भी अटैक कर सकता है स्वाइन फ्लू का संक्रमण, जानिए कब ये खतरे की घंटी

Sat, 22 Aug 2026 09:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू एक श्वसन संक्रमण है, जो ज्यादातर मामलों में हल्का रहता है, लेकिन कुछ लोगों में ये गंभीर रूप ले सकता है। संक्रमण मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है और गंभीर स्थिति में निमोनिया, सांस की दिक्कत, हृदय-फेफड़ों से जुड़ी जटिलताएं भी पैदा कर सकता है।
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स्वाइन फ्लू का प्रकोप कितना खतरनाक? - फोटो : Amarujala.com/AI
राजधानी दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 का गंभीर प्रकोप देखा जा रहा है। जिस गति से ये संक्रमण बढ़ता जा रहा है इसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी चिंतित हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार संक्रमण पहले से ही करीब 6 गुना से ज्यादा रिकॉर्ड किया जा चुका है। इसके अलावा लगातार बढ़ते मामलों के चलते अब अस्पतालों में भारी भीड़ भी देखी जा रही है।

आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि दिल्ली में इस साल अब तक स्वाइन फ्लू  के 1777 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। 20 अगस्त को एक ही दिन में करीब 114 नए मरीज सामने आए। छह अगस्त तक दिल्ली में एच1एन1 के 1,344 मामले थे। यानी मात्र 14 दिन में 433 नए मामले सामने आए है।

एम्स के विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव और उमस के कारण इन्फ्लुएंजा के मामले पहले भी बढ़ते रहे हैं। बुजुर्गों और पहले से फेफड़े-हृदय, डायबिटीज सहित अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों में संक्रमण गंभीर होने का खतरा अधिक रहता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को भी इस बीमारी को लेकर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जा रही है।

अब सवाल ये है कि क्या स्वाइन फ्लू वास्तव में जानलेवा है, क्या कोरोना की तरह इसका भी शरीर के कई अंगों पर असर हो सकता है?
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दिल्ली में स्वाइन फ्लू - फोटो : अमर उजाला
स्वाइन फ्लू से कोरोना जैसा घबराने की जरूरत नहीं 

स्वाइन फ्लू की स्थिति की समीक्षा के लिए शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बैठक की और जरूरी निर्देश दिए।

संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा रस्तोगी पांडा कहती हैं, इन्फ्लूएंजा और फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों में बढ़ोतरी हो रही है। कई मरीजों में लंबे समय तक रहने वाली खांसी और तेज बुखार देखने को मिल रहा है। 

अमर उजाला से बातचीत में इंटेंसिव केयर के डॉक्टर उत्कर्ष सिन्हा कहते हैं, स्वाइन फ्लू कोरोना जैसा कोई नया वायरस नहीं है, ये पहले भी फैलता रहा है। ये इन्फ्लूएंजा वायरस का ही एक सबटाइप है और मानसून के दौरान मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों में भी बढ़ोतरी होती रही है।
 
  • स्वस्थ लोगों में संक्रमण आमतौर पर जल्दी ठीक हो जाता है, लेकिन बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में फ्लू गंभीर रूप ले सकता है।
  • पर आंकड़ों और सोशल मीडिया पर फैल रही जानकारियों को देखते हुए इससे कोरोना की तरह घबराने की जरूरत बिल्कुल नहीं है। आपकी थोड़ी सी सावधानी इस खतरे को आसानी से टाल सकती है। 
  • इन्फ्लूएंजा वायरस से बचाव के लिए हमारे पास वैक्सीन भी हैं, तो ये कोई खतरनाक रूप लेगा इसको लेकर चिंता की जरूरत नहीं है। हालांकि सावधानी बरतना इन दिनों की सबसे जरूरी सलाह है।
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स्वाइन फ्लू से मौत का भी खतरा - फोटो : Freepik.com
स्वाइन फ्लू से मौत के मामले

मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक गंभीर स्थितियों में एच1एन1 का संक्रमण कमजोर इम्युनिटी, बुजुर्गों या फिर पहले से बीमार लोगों में फेफड़ों और हृदय स्वास्थ्य के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है। इससे कुछ लोगों में मौत के मामले भी देखे गए हैं जोकि चिंता बढ़ा रहे हैं। 

एच1एन1 वैसे तो हल्के संक्रमण वाला माना जाता है पर इसकी गंभीर स्थिति में मौत का भी जोखिम रहता है।
 
  • इस प्रकोप में 19 अगस्त को मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक  62 वर्षीय महिला की मौत हो गई है। मौत के बाद इंदौर के एक प्राइवेट अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और मामले की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए गए है। महिला स्वाइन फ्लू से संक्रमित पाई गई थी। महिला का इलाज उस प्राइवेट अस्पताल में चल रहा था। डॉक्टरों की सलाह के बावजूद, 18 अगस्त को महिला ने अस्पताल से छुट्टी ले ली थी और उज्जैन स्थित अपने घर लौट आई, जहां अगले ही दिन यानी 19 अगस्त को उसकी मौत हो गई।
 
  • इससे पहले 27 जुलाई को केरल के अजानूर मणिकोथ में स्वाइन फ्लू की शिकार एक अन्य महिला की भी मौत हुई थी। 56 वर्षीय महिला का एक प्राइवेट अस्पताल में बुखार और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का इलाज चल रहा था। हालात बिगड़ने पर उसे मंगलुरु के एक स्पेशलिटी अस्पताल में शिफ्ट किया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई।

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फ्लू से फेफड़ों को खतरा - फोटो : Adobe Stock
संक्रमितों में फेफड़ों से संबंधित दिक्कतें

डॉक्टर उत्कर्ष कहते हैं, एच1एन1 एक श्वसन संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने-छींकने या बात करने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के संपर्क में आने पर वायरस दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। शरीर में प्रवेश के बाद यह मुख्य रूप से नाक, गले और श्वसन तंत्र की कोशिकाओं को संक्रमित करता है। इसी वजह से शुरुआती लक्षण भी अधिकतर सांस की नली से जुड़े होते हैं।

एच1एन1 का आपके फेफड़ों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है। सामान्य फ्लू में संक्रमण ऊपरी श्वसन तंत्र तक सीमित रह सकता है, लेकिन गंभीर मामलों में वायरस निचले श्वसन तंत्र तक पहुंच सकता है।
 
  • इससे फेफड़ों में सूजन और संक्रमण बढ़ सकता है और निमोनिया हो सकती है।
  • फेफड़ों में सूजन और निमोनिया की स्थिति में शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है, जो जटिलाएं बढ़ाने वाली हो सकती है। 
  • यही कारण है कि संक्रमण की स्थिति में सांस फूलने, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द या दबाव, तेजी से सांस चलना के अलावा होंठ या चेहरे के नीला पड़ना को आपात स्थिति माना जाता है।
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स्वाइन फ्लू से हार्ट की दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock Photos
संक्रमण का हृदय पर भी हो सकता है असर

स्वाइन फ्लू का असर केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता। गंभीर  संक्रमण में कुछ लोगों में हृदय से जुड़ी जटिलताएं भी हो सकती हैं।
 
  • मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक गंभीर संक्रमण के कारण कुछ लोगों को हृदय की मांसपेशियों में सूजन, हृदय संबंधी इंजरी और कुछ मामलों में दिल का दौरा जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा हो सकता है। 
  • एच1एन1 से जुड़ी गंभीर बीमारी ये शरीर में गंभीर सूजन (सिस्टमिक इन्फ्लेमेशन) पैदा करके, मेटाबोलिक स्ट्रेस बढ़ाने लगता है और सीधे दिल की मांसपेशियों में सूजन (मायोकार्डिटिस) पैदा कर सकता है।
  • जिन्हें पहले से दिल की बीमारी रही है उनमें ये गंभीर स्थितियों में दिल की धड़कन के अनियमित होने, हार्ट फेलियर जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है, हालांकि ऐसे मामले बहुत कम देखे जाते हैं।
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स्वाइन फ्लू और इससे मौत का खतरा - फोटो : Adobe stock
इस खतरे को कैसे कम किया जाए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एच1एन1 वैसे तो हल्के स्तर का संक्रमण माना जाता है पर इससे गंभीर स्थितियों में मौत का भी जोखिम हो सकता है।
 
  • इन्फ्लुएंजा के ज्यादातर मरीज कुछ दिनों से लेकर दो सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं। हालांकि कुछ लोगों में गंभीर जटिलताएं विकसित हो सकती हैं और ये जानलेवा भी हो सकती हैं।
  • 2009 के महामारी वाले एच1एन1 संक्रमण के अध्ययन में गंभीर मामलों में निमोनिया और सांस की विफलता मौत का प्रमुख कारणों में रहे। कुछ मामलों में शरीर में पानी की कमी, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और दूसरी गंभीर जटिलताएं भी मृत्यु का खतरा बढ़ाने वाली पाई गईं

डॉक्टर कहते हैं,  एच1एन1 को लेकर दो गलतियां नहीं करनी चाहिए—पहली, हर मरीज को घबराकर गंभीर मान लेना और दूसरी, गंभीर लक्षणों को सामान्य फ्लू समझकर टाल देना।

एच1एन1 में सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब बीमारी लगातार बढ़ती दिखाई दे। सांस लेने में कठिनाई या सांस फूलना, सीने या पेट में लगातार दर्द, चक्कर, भ्रम, बहुत ज्यादा कमजोरी, पेशाब बहुत कम होने  जैसे संकेतों में तत्काल डॉक्टरी मदद की जरूरत होती है।

आरएमएल अस्पताल के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रमेश मीणा ने बताया कि संक्रमण से बचने के लिए हाथों की नियमित सफाई, बीमारी के दौरान घर पर आराम करने और दूसरों के बेहद करीब जाने से बचने की सलाह दी है। जरूरत के अनुसार फ्लू का टीकाकरण भी कराया जा सकता है।



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स्रोत
Fulminant fatal swine influenza (H1N1): Myocarditis, myocardial infarction, or severe influenza pneumonia?


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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