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Fifa World cup: 'कैमल फ्लू' संक्रमण का बढ़ा खतरा, यह कोविड से भी खतरनाक, जानिए इस बारे में विस्तार से

Mon, 28 Nov 2022 04:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कैमल फ्लू का खतरा - फोटो : iStock
कतर में जारी फीफा वर्ल्ड कप का खुमार पूरी दुनिया में सिर चढ़कर बोल रहा है। हर मैच को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक मैदान में आ रहे है। सेहत की दृष्टि से उमड़ती भीड़ को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की है। दुनिया के कई देशों में बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के बीच कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि दर्शकों के लिए कैमल फ्लू एक गंभीर समस्या हो सकती है। हाल ही में न्यू माइक्रोब्स एंड न्यू इंफेक्शन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि फीफा विश्व कप कैमल फ्लू के जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है, इसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि फीफा विश्व कप में इकट्ठा होने वाली भीड़ कई देशों में इस संक्रामक रोग का खतरा बढ़ा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फीफा विश्व कप उस समय पर हो रहा है जब दो स्वास्थ्य आपदाएं-कोविड-19 और मंकीपॉक्स प्रकोप वैश्विक चिंता का कारण बनी हुई हैं। इस बीच कैमल फ्लू को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, यह कोविड-19 से भी खतरनाक संक्रमण हो सकती है जिसको लेकर विशेष सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता होती है।

आइए कैमल फ्लू के जोखिमों के बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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केमल फ्लू को हो सकता है खतरा - फोटो : iStock
कैमल फ्लू के जोखिमों के बारे में जानिए

कैमल फ्लू को मिडिल ईस्ट रेस्पोरेटरी सिंड्रोम (मेर्स) के नाम से जाना जाता है, यह भी कोरोनावायरस के कारण होने वाली संक्रमण की स्थिति है। ऊंटों से इस संक्रमण का खतरा हो सकता है। कैमल फ्लू, जूनोटिक संक्रमण है। ऊंटों से इंसानों और एक से दूसरे व्यक्ति में इस संक्रमण के प्रसार का खतरा हो सकता है। इस संक्रमण के अधिकांश मामलों की पहचान मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण एशिया में की गई है। चूंकि इसके एक से दूसरे व्यक्ति में भी संक्रमण के खतरा हो सकता है, ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ फीफा से अपने देश लौटने वाले लोगों के माध्यम से संक्रमण के प्रसार को लेकर खतरा जता रहे हैं।  
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श्वसन संक्रमण और इसके जोखिम - फोटो : istock
कोरोना की तरह मेर्स भी है श्वसन संक्रमण

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि मेर्स के अधिकांश मामले ऊंटों से मनुष्यों में होते हैं। इसके अलावा किसी संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में रहने वाले लोगों में भी संक्रमण विकसित होने का खतरा हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 35 प्रतिशत संक्रमितों की मृत्यु हो जाती है। प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी इस संक्रमण के जोखिम का कारण बन सकती है।

ज्यादातर संक्रमितों में खांसी, सांस लेने में कठिनाई, बुखार आने-ठंड लगने, मांसपेशियों में दर्द और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण जैसे दस्त, मतली और उल्टी की समस्या देखी जाती है। 

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कैमल फ्लू का जोखिम - फोटो : Pixabay
कैमल फ्लू का फिलहाल कोई विशिष्ट इलाज नहीं

कैमल फ्लू कई मामलों में खतरनाक स्वास्थ्य स्थिति है जिसके बारे में सभी लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी जाती है, विशेषकर ऐसे स्थान जहां ऊंट अधिक होते हैं वहां पर इस संक्रमण का जोखिम अधिक होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल कैमल फ्लू का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है। व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि होने पर संक्रमण के लक्षणों की कम करके रोग को बढ़ने से रोकने के लिए आवश्यक उपचार माध्यमों को प्रयोग में लाया जाता रहा है। रोग की गंभीर स्थिति में मरीज को वेंटिलेटर पर भी रखने की जरूरत हो सकती है। 
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संक्रमण से बचाव को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : iStock
क्या है विशेषज्ञों की सलाह?

डब्लूएचओ में कोलेब्रेटिंग सेंटर फार ट्रेवलर्स में महामारी विज्ञान के प्रोफेसर पेट्रीसिया श्लागेनहाफ ने एक रिपोर्ट में कहा है कतर के साथ पड़ोसी देशों को भी इसके जोखिमों के लेकर सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। कतर से लौटने वाले लोगों की विशेष निगरानी की जानी चाहिए जिससे कैमल फ्लू के जोखिम को बढ़ने से रोका जा सके। फिलहाल फीफा विश्वकप में किसी भी दर्शक में इस संक्रमण का खतरा नहीं पाया गया है लेकिन इसके जोखिमों को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।  



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स्रोत और संदर्भ

Infection risks associated with the 2022 FIFA world cup in Qatar

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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