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Appendicitis: अपेंडिक्स फट गया तो जान पर बन सकती है बात, जानिए कैसे करें इस बीमारी की पहचान

Sat, 11 Jul 2026 06:50 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अपेंडिक्स बड़ी आंत से जुड़ी एक छोटी, उंगली जैसी थैली होती है।  जब इसमें सूजन आ जाती है, तो इसे एपेंडिसाइटिस कहा जाता है। यदि एपेंडिसाइटिस का समय पर इलाज नहीं किया जाए, तो अपेंडिक्स फट सकता है।
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अपेंडिक्स का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
पेट में होने वाले दर्द को अगर आप भी सिर्फ गैस-एसिडिटी की समस्या मानकर इग्नोर करते रहते हैं तो ये गलती आपको अस्पताल पहुंचा सकती है। डॉक्टर कहते हैं, पेट में होने वाला हर दर्द गैस ही नहीं होता, कई बार ये अपेंडिक्स जैसी समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। इसपर समय रहते ध्यान देना और इलाज कराना जरूरी है, क्योंकि लक्षणों को अनदेखा करने से अपेंडिक्स के फटने का भी खतरा हो सकता है।

अपेंडिक्स बड़ी आंत से लगी उंगली के आकार की थैली होती है। विशेषज्ञ कहते हैं, यह आंतों में गुड बैक्टीरिया को सुरक्षित रखने में भूमिका निभाती है। जब इसमें सूजन आ जाती है, तो इसे अपेंडिसाइटिस कहा जाता है।

एक्यूट अपेंडिसाइटिस दुनियाभर में पेट की सर्जरी से जुड़ी सबसे आम इमरजेंसी है। हर साल इसके 1.7 करोड़ से ज्यादा मामले सामने आते हैं और लगभग 30 हजार लोगों की मौत होती है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपके नाभि के आसपास अक्सर दर्द होता रहता है और कभी-कभी ये दर्द ट के निचले दाहिने हिस्से में पहुंच जाता है तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलकर इलाज करा लेना चाहिए।
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अपेंडिक्स के बारे में जानिए - फोटो : Adobe Stock
अपेंडिसाइटिस  की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अपेंडिसाइटिस की दिक्कत वैसे तो किशोरों में ज्यादा होती है पर इसका खतरा किसी भी उम्र में हो सकता है।
 
  • अपेंडिसाइटिस तब होता है जब अपेंडिक्स का मुंह किसी कारण से बंद हो जाता है। यह रुकावट कठोर मल, संक्रमण या दुर्लभ मामलों में ट्यूमर के कारण हो सकती है। 
  • रुकावट के कारण अपेंडिक्स के भीतर बैक्टीरिया तेजी से बढ़ने लगते हैं, जिससे उसमें सूजन और संक्रमण हो जाता है। 
  • यदि समय पर इलाज न मिले, तो अपेंडिक्स फट सकता है और संक्रमण पूरे पेट में फैल सकता है। 
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अपेंडिक्स में क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Freepik.com
कहीं आपको भी तो नहीं है ये दिक्कत?

डॉक्टर कहते हैं, अपेंडिसाइटिस में भी पेट दर्द होता है जिसे लोग आमतौर पर अन्य कारणों से होने वाला दर्द समझकर अनदेखा करते रहते हैं।
 
  • शुरुआत में नाभि के आसपास दर्द  हल्का महसूस हो सकता है, लेकिन कुछ घंटों के भीतर यह पेट के निचले दाहिने हिस्से में पहुंचकर तेज दर्द का कारण बनता है। 
  • चलने, खांसने, छींकने या शरीर हिलाने पर दर्द और बढ़ सकता है।
  •  यह दर्द सामान्य गैस या अपच से अलग होता है क्योंकि समय के साथ कम होने के बजाय बढ़ता जाता है। ऐसे दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कुछ लोगों को अपेंडिसाइटिस के लक्षणों के साथ बुखार, मतली-उल्टी, भूख कम लगने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। अगर आप भी इस तरह की दिक्कतें महसूस कर रहे हैं तो तुरंत किसी डॉक्टर से जरूर मिल लें।

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अपेंडिक्स और पेट की समस्या - फोटो : Adobe stock
किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा?

अपेंडिसाइटिस वैसे तो किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 10-30 वर्ष के लोगों में इसके मामले अधिक देखे जाते रहे हैं।
 
  • पुरुषों में इसका जोखिम थोड़ा ज्यादा रहता है। 
  • जिन लोगों के परिवार में पहले किसी को एपेंडिसाइटिस हुआ हो, उनमें भी जोखिम बढ़ सकता है। 
  • विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आप लो फाइबर वाली चीजें ज्यादा खाते हैं और बार-बार कब्ज की समस्या रहती है तो इसके कारण भी अपेंडिसाइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है।
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अपेंडिक्स की सर्जरी - फोटो : Freepik.com
अपेंडिक्स फटने का खतरा

डॉक्टर कहते हैं, यदि अपेंडिसाइटिस का समय पर इलाज नहीं किया जाए, तो अपेंडिक्स फट सकता है। इससे बैक्टीरिया और संक्रमित पदार्थ पेट में फैल जाते हैं, जिससे पेरिटोनाइटिस नामक गंभीर संक्रमण हो सकता है। 
 
  • इसके कारण तेज बुखार, पेट में असहनीय दर्द और अकड़न महसूस हो सकती है। 
  • यह स्थिति जानलेवा हो सकती है और तत्काल सर्जरी तथा एंटीबायोटिक उपचार की जरूरत पड़ती है।

अपेंडिसाइटिस को पूरी तरह रोकने का कोई निश्चित तरीका नहीं है, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर जोखिमों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। फाइबर से भरपूर आहार खाने से कब्ज कम हो सकता है। पर्याप्त पानी पीना, नियमित व्यायाम करना आपके खतरे को कम कर सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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