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Breathlessness: सांस फूलना सिर्फ फेफड़े नहीं, दिल की बीमारी का भी हो सकता है संकेत; जानिए कब हो जाएं सावधान

Fri, 07 Aug 2026 08:33 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हर बार सांस फूलने की वजह सिर्फ फेफड़े नहीं होते। कई मामलों में यह दिल की गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। यही कारण है कि लगातार या बिना किसी स्पष्ट वजह के होने वाली सांस फूलने की समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
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सांस की समस्या - फोटो : Freepik.com
क्या आपको भी लगता है कि सांस फूलना सिर्फ उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या है? अगर हां तो सावधान हो जाइए, कम उम्र वालों में भी ये दिक्कत देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलने या थोड़ी दूर पैदल चलने पर हांफने लगने को अक्सर लोग बढ़ती उम्र या फेफड़ों की सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक, हर बार सांस फूलने की वजह सिर्फ फेफड़े नहीं होते। कई मामलों में यह दिल की गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। यही कारण है कि लगातार या बिना किसी स्पष्ट वजह के होने वाली सांस फूलने की समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

सांस फूलने को मेडिकल भाषा में डिस्प्निया कहा जाता है। जब शरीर को उसकी जरूरत के अनुसार पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती तो आपको सांस फूलने की समस्या हो सकती है। सामान्य स्थिति में व्यायाम, दौड़ने या भारी काम करने पर कुछ समय के लिए सांस फूलना स्वाभाविक है, लेकिन यदि आराम करते समय, थोड़ी दूरी चलने पर या रात में अचानक सांस फूलने लगे, तो यह किसी बीमारी का संकेत हो सकता है।

आइए जानते हैं कि सांस की दिक्कतों में कब अलर्ट हो जाना चाहिए?
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सांस की समस्या - फोटो : Freepik.com
पहले जान लीजिए सांस क्यों फूलती है?

सांस फूलना वैसे तो कोई बीमारी नहीं है, बल्कि ये शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिल पाने का संकेत होता है। सामान्य स्थितियों में तेज दौड़ने, भारी व्यायाम करने, ऊंचाई वाले स्थान पर जाने पर सांस तेज होना स्वाभाविक है। 
 
  • सांस लेने की प्रक्रिया में फेफड़े, दिल, रक्त और मांसपेशियां मिलकर काम करते हैं। 
  • फेफड़े ऑक्सीजन को खून तक पहुंचाते हैं, लाल रक्त कोशिकाएं उसे पूरे शरीर में ले जाती हैं और दिल इस रक्त को पंप करता है। 
  • इनमें से किसी भी प्रणाली में गड़बड़ी होने पर शरीर तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है।
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हृदय रोगों और सांस फूलने की समस्या - फोटो : Adobe stock Images
दिल की बीमारी में भी सांस फूलने की समस्या

दिल और फेफड़े शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए एक साथ काम करते हैं। यदि दिल की पंपिंग क्षमता कम हो जाए या दिल तक पर्याप्त खून न पहुंचे, तो शरीर की ऑक्सीजन की जरूरत पूरी नहीं हो पाती। इसके कारण आपकी सांस फूलने लगती है।
 
  • कोरोनरी आर्टरी डिजीज में सांस फूलने की समस्या होती है। इसमें दिल को खून पहुंचाने वाली धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और वसा जमा होने लगती है। इससे धमनियां संकरी हो जाती हैं और दिल की मांसपेशियों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।
  • इसी तरह हार्ट वाल्व की बीमारी में भी आपको ये दिक्कत हो सकती है। दिल में चार वाल्व होते हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि रक्त सही दिशा में बहे। यदि इनमें से कोई वाल्व संकरा हो जाए या ठीक से बंद न हो तो दिल को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसके कारण भी मरीज की सांस फूलने लगती है। 

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अस्थमा में सांस की समस्या - फोटो : Adobe Stock
अस्थमा और सीओपीडी में सांस की समस्या

अस्थमा एक क्रॉनिक इंफ्लेमेटरी बीमारी है, जिसमें फेफड़ों की नलिकाएं संकरी हो जाती हैं और उनमें सूजन आ जाती है। इसके कारण हवा का आवागमन प्रभावित होता है और मरीज को सांस लेने में कठिनाई होती है। अस्थमा के मरीजों में सांस फूलने के साथ घरघराहट, लगातार खांसी, सीने में जकड़न की दिकक्त हो सकती है। धूल, धुआं, परागकण, ठंडी हवा, वायरल संक्रमण और एलर्जी में ये दिक्कतें काफी बढ़ जाती हैं।
 
  • इसी तरह से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) रोग में भी वायुमार्ग संकरे हो जाते हैं और फेफड़ों की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इस बीमारी में भी मरीज को लगातार सांस फूलना, लंबे समय तक खांसी रहने, बलगम बनने और हल्की शारीरिक गतिविधि में भी थकान महसूस होती है। 
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सांस लेने में होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
सांस फूलने के इन कारणों को भी जानिए
 
  • एनीमिया में शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है। हीमोग्लोबिन का काम फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाना होता है। जब इसकी कमी होती है, तो पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और शरीर इसकी भरपाई करने के लिए तेजी से सांस लेने लगता है। एनीमिया वाले लोगों को थोड़ा चलने, सीढ़ियां चढ़ने या सामान्य काम करने पर भी सांस फूलने लगती है। 
  • पल्मोनरी एम्बोलिज्म में शरीर के किसी हिस्से की नसों में बना खून का थक्का टूटकर फेफड़ों की धमनियों में पहुंच जाता है और रक्त प्रवाह को रोक देता है। इसके कारण भी सांस फूलने, सीने में तेज दर्द, धड़कन तेज होने जैसी दिक्कतें हो सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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