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फैक्ट चेक: 10 सेकेंड तक सांस रोक लेते हैं तो नहीं है कोरोना, जानें वायरल मैसेज की सच्चाई?

Sat, 15 May 2021 09:48 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांस की जांच - फोटो : Social media
देश में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। वायरस के म्यूटेशन के साथ कोरोना की इस दूसरी लहर में संक्रमण और मौत के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। मौत के बढ़ते मामलों के कारण लोगों के मन में कोरोना वायरस को लेकर तमाम तरह के भ्रम हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि इन विपरीत परिस्थितियों में लोगों को कोविड से जुड़ी जानकारियों के प्रति भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि सोशल मीडिया पर कई सारी ऐसी खबरें भी फैली हुई हैं, जो आपको भ्रमित कर सकती हैं।
इसी तरह से सोशल मीडिया पर सांस लेने से संबंधित अभ्यास के माध्यम से कोरोना की जांच का दावा किया जा रहा है। आइए इस लेख में दावे की सच्चाई जानते हैं।
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हर पोस्ट पर न करें भरोसा - फोटो : Social media
क्या है वायरल पोस्ट
सोशल मीडिया पर वायरल एक मैसेज में दावा किया जा रहा है कि यदि आप बिना किसी असुविधा के 10 सेकंड के लिए अपनी सांस रोक लेते हैं, तो आप खुद को कोरोना वायरस के संक्रमण से सुरक्षित मान सकते हैं। इस पोस्ट में एक वीडियो भी शेयर किया गया है जिसमें सांस लेने और छोड़ने से संबंधित एक अभ्यास के बारे में बताया गया है।
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भारत सरकार ने किया स्पष्ट - फोटो : social media
क्या है इस पोस्ट की सच्चाई?
भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) ने ट्वीट के माध्यम से इस वायरल पोस्ट के दावे का खंडन करते हुए लोगों को जागरूक किया है। ट्वीट में विशेषज्ञों ने बताया है कि यह दावा फ़र्ज़ी है। सांस रोककर न तो ऑक्सीजन लेवल चेक किया जा सकता है न ही इससे कोविड-19 की जांच नहीं की जा सकती है। ऐसे वायरल पोस्ट पर भरोसा न करें, न ही ऐसी झूठी बातों को शेयर करें।
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ऑक्सीमीटर से चेक करें ऑक्सीजन की मात्रा - फोटो : istock
फिर ऑक्सीजन लेवल की जांच कैसे की जा सकती है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में ऑक्सीजन के स्तर की जांच करने के लिए आप ऑक्सीमीटर का प्रयोग कर सकते हैं। इसे उंगली पर लगाने से शरीर में मौजूद ऑक्सीजन के स्तर का आसानी से पता लगाया जा सकता है।
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नोट: यह लेख केंद्र सरकार के के प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा किए गए फैक्ट चेक ट्वीट के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है।
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