Breast Cancer Recurrence: इस लेख में जानें स्तन कैंसर दोबारा क्यों होता है, किन लोगों में इसका खतरा अधिक रहता है, रिकरेंस के लक्षण क्या हैं और इससे बचाव के लिए क्या सावधानियां जरूरी हैं।
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क्या स्तन कैंसर इलाज के बाद फिर लौट सकता है?
- फोटो : AI
Breast Cancer Recurrence: स्तन कैंसर का इलाज पूरा होने के बाद मरीज और परिवार को सबसे बड़ी चिंता अक्सर यही रहती है कि क्या यह बीमारी दोबारा लौट सकती है। इलाज के बाद कैंसर के वापस आने को कैंसर की पुनरावृत्ति यानी रिकरेंस कहा जाता है। हालांकि, हर मरीज में स्तन कैंसर दोबारा नहीं होता और इसका जोखिम हर व्यक्ति में अलग होता है।
कैंसर का प्रकार, बीमारी की अवस्था, ट्यूमर का आकार और ग्रेड, लिम्फ नोड्स तक कैंसर का पहुंचना और कुछ खास प्रकार जैसे ट्रिपल-नेगेटिव कैंसर रिकरेंस के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में नियमित फॉलो-अप और शरीर में होने वाले किसी असामान्य बदलाव पर डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है। आइए इस बारे में जानते हैं डिटेल में।
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क्या स्तन कैंसर इलाज के बाद फिर लौट सकता है?
- फोटो : अमर उजाला
स्तन कैंसर दोबारा क्यों हो सकता है?
स्तन कैंसर के दोबारा होने का सबसे प्रमुख कारण यह हो सकता है कि शुरुआती इलाज के बाद कुछ कैंसर कोशिकाएं शरीर में रह गई हों। ये कोशिकाएं इतनी छोटी हो सकती हैं कि स्कैन या अन्य जांचों में दिखाई न दें। कुछ समय तक निष्क्रिय रहने के बाद ये कोशिकाएं दोबारा बढ़ सकती हैं।
कभी-कभी कैंसर कोशिकाएं इलाज के प्रति प्रतिरोधी भी हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में उपचार के बावजूद कुछ कोशिकाएं बच सकती हैं और आगे चलकर कैंसर दोबारा विकसित हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि शुरुआती इलाज गलत था।
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किन लोगों में रिकरेंस का जोखिम अधिक हो सकता है?
कुछ परिस्थितियां स्तन कैंसर के दोबारा लौटने की संभावना को बढ़ा सकती हैं। इनमें शामिल हैं:
कैंसर का अधिक उन्नत चरण में पता चलना।
कैंसर का लिम्फ नोड्स तक फैल जाना।
ट्यूमर का आकार बड़ा या ग्रेड अधिक होना।
ट्रिपल-नेगेटिव या इंफ्लेमेटरी ब्रेस्ट कैंसर होना।
सर्जरी के बाद कुछ कैंसर कोशिकाओं का आसपास के ऊतक में बच जाना।
कम उम्र में स्तन कैंसर का निदान होना।
अधिक वजन या मोटापा।
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स्तन कैंसर दोबारा कितने प्रकार से हो सकता है?
रिकरेंस मुख्य रूप से तीन तरह का हो सकता है। स्थानीय रिकरेंस में कैंसर उसी स्तन, सर्जरी वाले हिस्से या छाती की दीवार के आसपास लौट सकता है। क्षेत्रीय रिकरेंस में पास के लिम्फ नोड्स प्रभावित हो सकते हैं। वहीं दूरस्थ या मेटास्टेटिक रिकरेंस में कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों, जैसे हड्डियों, फेफड़ों, लिवर या मस्तिष्क तक पहुंच सकता है।
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क्या कैंसर कई साल बाद भी लौट सकता है?
हां, स्तन कैंसर इलाज के कई साल बाद भी दोबारा हो सकता है। हालांकि, कई मामलों में रिकरेंस इलाज और शुरुआती निदान के बाद शुरुआती कुछ वर्षों में सामने आता है, लेकिन कुछ मामलों में लंबे समय बाद भी बीमारी लौट सकती है।
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किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
इलाज के बाद शरीर में कोई नया या लगातार बना रहने वाला बदलाव दिखाई दे तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। स्तन या सर्जरी वाले हिस्से में नई गांठ, त्वचा में बदलाव, लगातार दर्द, लिम्फ नोड में सूजन या शरीर के अन्य हिस्सों में लगातार दर्द जैसे लक्षणों की जांच जरूरी हो सकती है। हालांकि, ऐसे लक्षण हमेशा कैंसर की वापसी का संकेत नहीं होते।
नियमित फॉलो-अप बेहद महत्वपूर्ण है। डॉक्टर मरीज के पहले कैंसर के प्रकार, चरण और किए गए उपचार के आधार पर जरूरी जांच और निगरानी की सलाह देते हैं।
क्या स्तन कैंसर इलाज के बाद फिर लौट सकता है?
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क्या स्तन कैंसर दोबारा होने से रोका जा सकता है?
रिकरेंस को पूरी तरह रोकने की गारंटी नहीं दी जा सकती, लेकिन डॉक्टर द्वारा सुझाया गया उपचार और फॉलो-अप जारी रखना महत्वपूर्ण है। शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ खान-पान और स्वस्थ वजन बनाए रखना भी जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।
यह सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है। स्तन कैंसर का व्यक्तिगत रिकरेंस जोखिम और फॉलो-अप योजना मरीज के कैंसर के प्रकार, स्टेज और पहले मिले उपचार पर निर्भर करती है। इसलिए अपने ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह को प्राथमिकता दें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।