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Health Alert: ये काम कर लिए तो दो तरह के कैंसर से हो सकता है बचाव, महिलाओं के लिए जरूरी खबर

Sat, 02 May 2026 08:11 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

 ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर दुनियाभर में महिलाओं में सबसे आम और जानलेवा बीमारियों में गिने जाते हैं। भारत में हर साल लाखों महिलाएं इन बीमारियों की चपेट में आती हैं। हालांकि कुछ सावधानियां बरतकर आप इन दोनों कैंसर से बचाव कर सकती हैं।
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कैंसर का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
कैंसर के बढ़ते मामले वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम का कारण बने हुए हैं। हर साल इस बीमारी के कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है। महिलाओं में भी कैंसर के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार भारत में महिलाओं में कैंसर होने की अनुमानित दर लगभग 105.4 प्रति एक लाख थी है, जो पुरुषों की दर से ज्यादा है। ब्रेस्ट कैंसर सबसे आम है, जिसके 27.7% मामले सामने आते हैं। इसके बाद सर्वाइकल कैंसर (16.5%) और ओवरी के कैंसर का खतरा (6.2%) देखा गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाओं में कैंसर होने की दर थोड़ी ज्यादा होती है, लेकिन अगर इसका पता जल्दी चल जाए तो उनके बचने की संभावना अक्सर बढ़ सकती है। ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर दुनियाभर में महिलाओं में सबसे आम और जानलेवा बीमारी है।

हालांकि अच्छी बात ये है कि कुछ उपायों की मदद से आप खुद को इस जानलेवा खतरे से काफी हद तक सुरक्षित रख सकती हैं।
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महिलाओं में कैंसर का जोखिम - फोटो : Adobe stock
महिलाओं में कैंसर का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कैंसर के मामलों में सबसे चिंताजनक बात ये है कि ज्यादातर लोगों में शुरुआत में इसका पता ही नहीं चल पाता। जब तक पता चलता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है। अच्छी खबर यह है कि ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर दोनों काफी हद तक रोके जा सकते हैं। समय पर जांच, जागरूकता और सही आदतें अपनाकर इनसे बचाव संभव है। 

सर्वाइकल कैंसर के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि ब्रेस्ट कैंसर को शुरुआती स्टेज में पकड़ने के लिए खुद से जांच और मैमोग्राफी जैसे टेस्ट बेहद कारगर हो सकते हैं।
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सर्वाइकल कैंसर का जोखिम - फोटो : Freepik.com
सर्वाइकल कैंसर का खतरा और बचाव

सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण की वजह से होता है। ये यौन संपर्क से फैलता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कम उम्र में शादी, कई पार्टनर से संबंध और कमजोर इम्युनिटी इसके जोखिम को बढ़ाते हैं।
 
  • इस कैंसर से बचे रहने के लिए एचपीवी वैक्सीन को सबसे कारगर माना जाता है।
  • 9-26 साल की उम्र में लेने पर सबसे ज्यादा असरदार होती है।
  • इसके अलावा, नियमित पैप स्मीयर टेस्ट से शरीर में होने वाले बदलावों का पता लगाया जा सकता है, जिससे कैंसर बनने से पहले ही इलाज संभव है।
  • भारत में भी इसके मामले लगातार सामने आते रहे हैं, जिसकी रोकथाम के लिए सरकार ने 14 साल की उम्र की लड़कियों के लिए पूरे देश में फ्री एचपीवी वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू की है।

क्या पुरुषों को भी लगवानी चाहिए एचपीवी वैक्सीन? इसपर जानकारी के लिए यहां क्लिक करें
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ब्रेस्ट कैंसर और इसका जोखिम - फोटो : Adobe Stock
ब्रेस्ट कैंसर और इससे बचाव का उपाय

ब्रेस्ट या स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर है। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये कैंसर रहा हो उनमें खतरा अधिक होता है। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव, बढ़ती उम्र और मोटापा भी खतरे को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। 40 की उम्र के बाद महिलाओं में इसका खतरा तेजी से बढ़ता है।
 
  • इस कैंसर से बचाव के लिए नियमित रूप से खुद से ही ब्रेस्ट एग्जाम करें। 
  • शीशे के सामने खड़े होकर देखें कि स्तन में कोई बदलाव, गांठ या त्वचा के रंग में कोई परिवर्तन तो नहीं है?
  • 40 की उम्र के बाद डॉक्टर की सलाह पर मैमोग्राफी कराने से कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में लग सकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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