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सफलता: अस्थमा-सीओपीडी रोगियों के लिए वैज्ञानिकों ने ढूंढ लिया 'गेमचेंजर' इलाज, 50 वर्षों में सबसे बड़ी कामयाबी

Thu, 28 Nov 2024 01:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अस्थमा-सीओपीडी रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। वैज्ञानिकों ने इसके इलाज के लिए कारगर इंजेक्शन ढूंढ निकाला है जो अब तक दी जाने वाली दवाओं से न सिर्फ कहीं ज्यादा प्रभावी है, साथ ही इसकी मदद से आगे के उपचार की आवश्यकता को 30 प्रतिशत तक कम भी किया जा सकता है।
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अस्थमा की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Freepik
श्वसन रोगों के मामले दुनियाभर में स्वास्थ्य क्षेत्र पर बड़ा बोझ रहे हैं। क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और अस्थमा जैसी श्वसन संबंधित बीमारियों के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। आंकड़ों से पता चलता है कि हर साल दुनियाभर में अस्थमा के कारण 4.50 लाख और सीओपीडी के कारण 3.5 लाख से अधिक लोगों की जान जा रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चिंता जताते हुए अनुमान लगाया है कि साल 2030 तक सीओपीडी वैश्विक स्तर पर मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण बन सकता है। सांस से संबंधित ये बीमारियां सभी उम्र के लोगों में देखी जा रही हैं, इसलिए विशेषज्ञ इससे बचाव को लेकर गंभीरता से ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं।

हालांकि अब अस्थमा-सीओपीडी रोगियों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वैज्ञानिकों की टीम को इसके इलाज में बड़ी कामयाबी मिली है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कारगर इंजेक्शन ढूंढ निकाला है जो अब तक दी जाने वाली स्टेरॉयड की गोलियों से न सिर्फ कहीं ज्यादा प्रभावी है साथ ही इसकी मदद से आगे के उपचार की जरूरत को भी 30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। अस्थमा-सीओपीडी रोगियों के लिए विशेषज्ञ इसे 'गेमचेंजर' मान रहे हैं।
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बेनरालिजुमैब इंजेक्शन (फाइल फोटो) - फोटो : Freepik.com
बेनरालिजुमैब इंजेक्शन से कम होगा खतरा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक श्वसन रोगों के उपचार की दिशा में इसे 50 वर्षों में सबसे बड़ी कामयाबी के रूप में भी देखा जा रहा है।

द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक उपचार के लिए अस्थमा-सीओपीडी रोगियों को एक इंजेक्शन दिया जाएगा जिसके परिणाम काफी आशाजनक देखे गए हैं। बेनरालिजुमैब नामक ये इंजेक्शन मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के रूप में काम करती है। ये इओसिनोफिल्स नामक व्हाइट ब्लड सेल्स को लक्षित करती है जिससे फेफड़ों में सूजन को कम करने में मदद मिल सकती है। अस्थमा-सीओपीडी रोगियों में फेफड़ों में सूजन के कारण गंभीर जटिलताओं के विकसित होने का जोखिम रहता है।
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सांस की समस्या - फोटो : Freepik.com
मौजूदा इलाज के तरीकों से 30% तक ज्यादा असरदार

डॉक्टर बताते हैं, वर्तमान में इसे लो डोज में गंभीर अस्थमा के लिए उपयोग किया जाता रहा है, लेकिन हालिया नैदानिक परीक्षणों में पाया गया है कि अगर अस्थमा अटैक के दौरान ही इसे इंजेक्ट किया जाए तो ये ज्यादा असरदार साबित हो सकती है। विशेषज्ञों ने पाया कि ये मौजूदा इलाज के तरीकों से 30 फीसदी तक ज्यादा कारगर है।

इस परीक्षण के लिए 158 लोगों को शामिल किया गया जिन्हें अस्थमा या सीओपीडी अटैक के लिए आपातकालीन चिकित्सा की आवश्यकता थी। इस इंजेक्शन की मदद से लक्षणों और स्वास्थ्य जटिलताओं को कम करने में मदद मिली।

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कितना प्रभावी है ये इलाज - फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?

इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने रोगियों को तीन समूहों में बांटा। एक को बेनरालिजुमैब इंजेक्शन और डमी गोलियां दी गईं, दूसरे समूह को स्टैंडर्ड केयर (पांच दिनों के लिए प्रेडनिसोलोन 30 मिलीग्राम प्रतिदिन) और तीसरे सूमह को स्टैंडर्ड केयर के साथ बेनरालिजुमैब इंजेक्शन दी गई। अध्ययन के निष्कर्ष में 28 दिनों के बाद, बेनरालिजुमैब इंजेक्शन लेने वालों में खांसी, घरघराहट, सांस फूलना जैसे लक्षणों में काफी सुधार हुआ। वहीं 90 दिनों के बाद बेनरालिजुमैब ग्रुप वाले लोग अन्य समूहों की तुलना में काफी ठीक हो चुके थे।
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अस्थमा का कम हो सकता है खतरा - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर मोना बाफडेल कहते हैं, यह अस्थमा और सीओपीडी वाले लोगों के लिए गेम-चेंजर हो सकता है। दुनियाभर में इन दोनों रोगों के कारण ही लाखों लोगों की मौत हो जाती है, बावजूद इसके अस्थमा और सीओपीडी के उपचार में 50 वर्षों में कोई बदलाव नहीं आया था। ये पांच दशकों में मिली सबसे बड़ी कामयाबी है। हमें उम्मीद है कि ये महत्वपूर्ण अध्ययन भविष्य में अस्थमा और सीओपीडी के इलाज के तरीके को बदल देगा, जिससे दुनियाभर में इन रोगों के शिकार एक अरब से अधिक लोगों के स्वास्थ्य में सुधार होगा।


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स्रोत और संदर्भ
Treating eosinophilic exacerbations of asthma and COPD with benralizumab (ABRA): a double-blind, double-dummy, active placebo-controlled randomised trial

First new treatment for asthma attacks in 50 years


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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