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सेहत की बात: आखिर कैसे बन जाता है ब्रेन में ट्यूमर, किन्हें इसका ज्यादा खतरा? यहां जानिए सबकुछ

Mon, 28 Sep 2026 10:25 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Brain Tumor: ब्रेन ट्यूमर के ज्यादातर मामलों में सटीक कारण पता नहीं होता। उम्र, रेडिएशन और कुछ आनुवंशिक बीमारियां ट्यूमर का खतरा बढ़ा सकती हैं। वहीं शरीर के दूसरे हिस्से का कैंसर भी ब्रेन तक फैल सकता है।
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कहीं आपको ब्रेन ट्यूमर तो नहीं? - फोटो : Amarujala.com/AI
ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में कैंसर का ख्याल आ जाता है, लेकिन हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होता। कुछ ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ते हैं और शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलते, जबकि कुछ तेजी से बढ़ने वाले और गंभीर हो सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, मस्तिष्क या उसके आसपास की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि ट्यूमर का कारण बनती है। ज्यादातर मामलों में यह साफ नहीं होता कि ब्रेन की कोशिकाओं में ऐसी गड़बड़ी आखिर शुरू क्यों हुई। यानी हमेशा किसी एक आदत, खान-पान या रोजमर्रा की गलती को इसका कारण नहीं माना जा सकता। 

हालंकि कुछ ऐसे कारण और स्थितियां हैं, जिनमें ब्रेन ट्यूमर का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में बढ़ सकता है। आइए इस बारे में विस्तार से जान लेते हैं।
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ब्रेन में ट्यूमर की दिक्कत - फोटो : Adobe Stock
ब्रेन ट्यूमर का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, उम्र बढ़ने के साथ आपमें ब्रेन ट्यूमर का खतरा भी बढ़ने लगता है। जो लोग अक्सर रेडिएशन का संपर्क में रहते हैं या  परिवार में पहले से किसी को ट्यूमर रहा है उनमें इसका जोखिम अधिक देखा जाता है। कई मामलों में शरीर के किसी दूसरे हिस्से का कैंसर भी कभी-कभी ब्रेन तक फैल सकता है। इसलिए जोखिमों को समझना जरूरी है।
 
  • ब्रेन में बनने वाले ज्यादातर प्राइमरी ट्यूमर सीधे ब्रेन या उसके आसपास के ऊतकों से शुरू होते हैं, उनका सटीक कारण पता नहीं चल पाता। 
  • कोशिकाओं के डीएनए में होने वाले बदलाव के कारण खतरा बढ़ जाता है और वे असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं। इसलिए ब्रेन ट्यूमर होने के लिए किसी एक आदत को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
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ब्रेन ट्यूमर की दिक्कत - फोटो : Freepil.com
उम्र बढ़ने के साथ ट्यूमर का खतरा

ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन कुछ प्रकार के ट्यूमर उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा देखे जाते हैं। बच्चों में कुछ अलग प्रकार के ब्रेन ट्यूमर ज्यादा पाए जाते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि उम्र बढ़ने के साथ हर व्यक्ति हाई रिस्क में है, बल्कि अलग-अलग ट्यूमर के लिए उम्र का असर अलग हो सकता है।
 
  • रेडिएशन कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव कर सकती है, इसलिए इससे ब्रेन ट्यूमर का खतरा अधिक हो सकता है। 
  • कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रेडिएशन भी खतरनाक हो सकता है। 
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ब्रेन ट्यूमर की समस्या - फोटो : Adobe stock
आनुवंशिक स्थितियां जो जीन में बदलाव के कारण परिवारों में चल सकती हैं, उनसे भी ब्रेन ट्यूमर का खतरा देखा जाता है। इनमें न्यूरोफाइब्रोमेटोसिस, ट्यूबरस स्क्लेरोसिस, वॉन हिप्पल-लिंडाउ और ली-फ्रॉमेनी जैसे सिंड्रोम शामिल हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर फैमिली हिस्ट्री और जरूरत के अनुसार आनुवंशिक सलाह की सलाह दे सकते हैं।


शरीर के दूसरे कैंसर से भी ब्रेन को खतरा

ब्रेन में बनने वाला हर ट्यूमर ब्रेन से शुरू नहीं होता। फेफड़े, स्तन, त्वचा या शरीर के दूसरे हिस्सों में शुरू हुआ कैंसर कभी-कभी रक्त के रास्ते ब्रेन तक पहुंच सकता है। इसे सेकेंडरी या मेटास्टेटिक ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है। इसलिए जिस व्यक्ति को पहले से कैंसर है, उसमें नए न्यूरोलॉजिकल लक्षणों पर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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