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Health Tips: बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट को लेकर हैं तनावग्रस्त? ये चार उपाय दूर करेंगे चिंता, मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी

Mon, 13 Jun 2022 11:43 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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परीक्षा परिणाम के पहले की चर्चा - फोटो : Pixabay
परीक्षा के परिणाम को लेकर उत्साह और चिंता की मिली जुली भावना को काफी सामान्य माना जाता है। हालांकि यह गंभीर तनाव का रूप न ले ले, छात्रों और माता-पिता दोनों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सामाजिक दबाव और अधिक नंबर पाने का प्रेशर बच्चों को तनावग्रस्त कर सकता है, इस स्थिति पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण डिप्रेशन जैसी समस्या भी हो सकती है। यही कारण है कि मनोचिकित्सक कहते हैं, परीक्षा परिणाण को सिर्फ परिणाम की तरह ही देखें, इससे सीख लेते हुए आगे की तैयारी करें। अगर आपके परिणाम इच्छानुरूप नहीं आए हैं तो इसपर चिंता करने से बेहतर है कि आप आगे इससे सीख लेते हुए और मेहनत के साथ पढ़ाई शुरू कर दें। 

इस समय यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के परिणाम का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे में परीक्षा दे चुके छात्रों का चिंतत होना स्वाभाविक है। इस समय माता-पिता और परिजनों को बच्चों पर अतिरिक्त प्रेशर डालने से बचना चाहिए। यह उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए समस्याओं का कारक हो सकता है। इस दौरान कुछ साधारण सी बातों को ध्यान में रखकर चिंता-तनाव को कम किया जा सकता है। ध्यान रहे, चिंता करने से परिणाम बदलेंगे नहीं, बल्कि यह आपकी स्वास्थ्य के लिए ही नुकसानदयाक ही होगा। आइए ऐसे कुछ उपायों के बारे में जानते हैं जिनका सभी छात्रों को जरूर ध्यान रखना चाहिए।
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परीक्षा परिणाम का तनाव कैसे कम करें - फोटो : Pixabay
क्या है विशेषज्ञों की सलाह?

मनोचिकित्सक बताते हैं, छात्रों के लिए परीक्षा के परिणाम का इंतजार चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बच्चों पर हमेशा अच्छे नंबर पाने और सपनों को पूरा करने का दबाव होता है। इस वजह से परिणाम को लेकर चिंतित, तनावग्रस्त और उदास होना स्वाभाविक है। हालांकि यह अनावश्यक है, ध्यान रहे तनाव लेने से आपके प्रदर्शन पर ही नकारात्मक असर होता है, यह आपके भावनात्मक, सामाजिक और व्यवहारिक विकास में भी बाधा डाल सकता है। इसलिए अतिरिक्त तनाव से बचें और बेहतर मेहनत के साथ आगे की तैयारी करें। तनाव कम करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है।
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तनाव को कम करने के उपाय - फोटो : Pixabay
बातचीत करते रहें, लोगों से मिलें

माता-पिता को इस समय बच्चों से लगातार संवाद बनाए रखना चाहिए, उनमें सकारात्मकता का संचार करें। बच्चों पर अधिक नंबर लाने का अतिरिक्त दबाव डालने या फिर दूसरे साथी बच्चों के साथ उनकी तुलना करने से बचें।  बच्चों की मनोदशा को समझने की कोशिश करें। संवाद बनाए रखकर बच्चों को चिंता और तनाव से मुक्त रखने में मदद मिल सकती है।

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स्क्रीन टाइम और तनाव का संबंध - फोटो : istock
स्क्रीन टाइम कम करें और पर्याप्त नींद लें

परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे बच्चों को मोबाइल-कंप्यूटर पर अधिक समय बिताने से बचना चाहिए, इसके दुष्प्रभाव आपमें तनाव की स्थिति को बढ़ा सकते हैं। समाचार और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करें। इसके अलावा नींद लेना बहुत आवश्यक है। जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है, उनमें तनाव-चिंता बढ़ने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
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छात्रों के लिए तनाव प्रबंधन - फोटो : istock
तनाव के लक्षणों की पहचान करें

यदि आपको अनावश्यक रूप से अत्यधिक चिंता हो रही है, शारीरिक लक्षण (जैसे सिरदर्द और पेट में दर्द), अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और बात-बात पर गुस्सा आ रहा है तो ऐसे संकतों को अनदेखा न करें। ये बढ़ते तनाव का संकेतक हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तनाव प्रबंधन के उपाय जैसे व्यायाम, मेडिटेशन, स्वस्थ आहार और सकारात्मकता बढ़ाने वाले उपाय करना विशेष लाभप्रद हो सकता है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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