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Diabetes: आपको कभी टाइप-2 डायबिटीज होगा या नहीं? लक्षण दिखने से कई साल पहले ही चल जाएगा इसका पता

Tue, 27 Jan 2026 06:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अगर अभी डायबिटीज नहीं है, तो भविष्य में इसके होने का खतरा कितना है?  कुछ संकेत, रिस्क फैक्टर और मेडिकल टेस्ट के जरिए पहले ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोई व्यक्ति टाइप-2 डायबिटीज के हाई-रिस्क जोन में है या नहीं।
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डायबिटीज का कैसे लगाएं पता? - फोटो : Adobe Stock Photo
डायबिटीज या मधुमेह की समस्या दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही है जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट करते हैं। टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। मुख्यरूप से लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी के कारण होने वाली ये बीमारी अब बुजर्गों और युवाओं के साथ बच्चों को भी शिकार बना रही है। टाइप-2 डायबिटीज पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर इसे कंट्रोल न किया जाए तो समय के साथ आंखों, किडनी, हार्ट और कई अन्य अंगों को इससे नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई लोगों को तब तक इस बीमारी का पता नहीं चल पाता जब तक ब्लड शुगर काफी बढ़कर अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू न कर दे। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों का ब्लड शुगर लेवल अक्सर बढ़ा हुआ रहता है उन्हें इसे कंट्रोल में रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

अगर आपको अभी डायबिटीज नहीं है, तो भविष्य में इसके होने का खतरा कितना है, क्या इसका पता लगाया जा सकता है?
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डायबिटीज-2 डायबिटीज का खतरा? - फोटो : Freepik.com
टाइप-2 डायबिटीज और इसके जोखिम

टाइप-2 डायबिटीज की समस्या तब होती है जब शरीर इंसुलिन हार्मोन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता या पर्याप्त इंसुलिन नहीं बन पाता। लगातार हाई कैलोरी डाइट, ज्यादा शुगर और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों का सेवन, शारीरिक गतिविधि कम होना और मोटापा जैसी स्थितियां इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा देती हैं। फैमिली हिस्ट्री यानी जिनके माता-पिता को डायबिटीज है, उनमें इसका खतरा ज्यादा होता है।

अगर आपको अभी शुगर की बीमारी नहीं है तो क्या भविष्य में हो सकती है? इसका पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने एक खास ब्लड टेस्ट के बारे में बताया है जिसकी मदद से आप इस जोखिम का पता लगा सकते हैं।
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खून कूी जांच से लगेगा शुगर का पता - फोटो : Freepik.com
ब्लड टेस्ट से लगा सकेंगे डायबिटीज के जोखिमों का पता

शोधकर्ताओं ने खून में कुछ खास मार्करों पर दशकों तक अध्ययन किया, जिसके आधार पर एक ऐसे आसान ब्लड टेस्ट के बारे में बताया है जो लक्षण दिखने से कई साल पहले ही आपमें डायबिटीज के खतरे का पता लगा सकता है। 
 
  • अमेरिकी वैज्ञानिकों ने 26 साल के फॉलो-अप अध्ययन में खून में 235 ऐसे मॉलिक्यूल्स की पहचान की है जो टाइप-2 डायबिटीज से जुड़े होते हैं।
  • ब्लड टेस्ट में इनकी पहचान से डायबिटीज के खतरों का पता लगाया जा सकेगा। इससे दिल की बीमारी, किडनी फेलियर और स्ट्रोक जैसी बाद की दिक्कतों का खतरा भी कम हो सकता है।

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खून में ब्लड शुगर के मार्कर का चलेगा पता - फोटो : Adobe Stock Images
अध्ययन में क्या पता चला?

इस अध्ययन के लिए अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसिन न्यूयॉर्क के शोधकर्ताओं ने 10 अलग-अलग अध्ययनों में शामिल 23,634 ऐसे प्रतिभागियों के ब्लड सैंपल का परीक्षण किया, जिन्हें शुरू में डायबिटीज की समस्या नहीं थी। टीम ने जेनेटिक और लाइफस्टाइल डेटा का भी आकलन किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन से ब्लड मार्कर जेनेटिक थे और कौन से एनवायरनमेंटल।
  • कुल 469 सर्कुलेटिंग मेटाबोलाइट्स का अध्ययन किया जिसमें से 235 को टाइप 2 डायबिटीज से जोड़ा गया।
  • फॉलो-अप के दौरान, 4,000 प्रतिभागियों में टाइप 2 डायबिटीज का पता चला।
  • टीम ने बताया कि ब्लड टेस्ट में अगर सर्कुलेटिंग मेटाबोलाइट्स का पता लगा लिया जाए तो भविष्य में किसे डायबिटीज का होगा, इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
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डायबिटीज का कैसे पता लगाएं? - फोटो : Amarujala.com
आपको डायबिटीज है या नहीं? इसका कैसे पता लगाएं

क्या बिना किसी जांच और पैसा खर्च किए,घर बैठे ही यह जाना जा सकता है कि आपको शुगर की बीमारी है या नहीं?

इसके लिए डॉक्टरों ने 4T फॉर्मूला के बारें बताया है जिसकी मदद से डायबिटीज का पता लगाया जा सकता है। 4-T फॉर्मूला दरअसल चार अंग्रेजी अक्षरों पर आधारित है, जो डायबिटीज के सामान्य और शुरुआती लक्षणों की ओर इशारा करता है। अगर आप भी घर बैठे शुगर की बीमारी का पता लगाना चाहते हैं तो यहां क्लिक करके जानिए


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स्रोत:
Circulating metabolites, genetics and lifestyle factors in relation to future risk of type 2 diabetes

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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