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सावधान: ऐसे लक्षणों का मतलब हो रही है ब्लड क्लॉटिंग, तुरंत हो जाइए अलर्ट वरना जानलेवा समस्याओं के हो सकते हैं शिकार

Mon, 02 May 2022 04:15 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रक्त के थक्के बनने की समस्या - फोटो : istock
हमारा शारीरिक तंत्र इस तरह से निर्मित है कि सामान्यतौर पर छोटी-मोटी समस्याओं को वह स्वयं ही ठीक कर लेता है। चोट लगने या घाव हो जाने पर कुछ समय बाद खून बहना अपने आप ही बंद हो जाता है, इसके पीछे रक्त के थक्का बनने की प्रक्रिया का योगदान माना जाता है। रक्त के थक्के बनने के कारण खून बहना बंद हो जाता है, लेकिन जब शरीर में अनावश्यक रूप से थक्के बनने लगते हैं तो इस स्थिति को सेहत के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण और जोखिम वाला माना जाता है। रक्त के थक्कों की संख्या अगर बढ़ रही है तो इसके कारण कुछ स्थितियों में जानलेवा समस्याएं भी हो सकती हैं। 

रक्त वाहिकाओं में होने वाली ब्लड क्लॉटिंग की समस्या के कारण अंगों को पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं मिल पाता है, जिसके कारण स्ट्रोक या दिल का दौरा पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सभी लोगों को इसके लक्षणों को लेकर विशेष सतर्कता बरतते रहना चाहिए, जिससे किसी गंभीर समस्या को पहले ही पहचानकर उसका समय पर उपचार किया जा सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में ब्लड क्लॉटिंग की स्थिति में कुछ लक्षण दिखने लगते हैं जिनके बारे में सभी लोगों को जरूर जानना चाहिए। ऐसे लक्षणों पर समय रहते ध्यान देकर गंभीर समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। आइए इन लक्षणों के बारे में जानते हैं।
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हाथों में ब्लड क्लॉटिंग की समस्या - फोटो : iStock
सूजन और त्वचा के रंग में बदलाव

हाथ या पैर में ब्लड क्लॉटिंग होना सबसे सामान्य माना जाता है। इस स्थिति में दर्द, सूजन और त्वचा का रंग लाल-नीला पड़ सकता है। पैरों में इस तरह की समस्या का जोखिम अधिक होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक विशेषकर यदि चोट लगने के बाद लंबे समय तक त्वचा पर लालिमा या नीला रंग नजर आता रहे तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर ले लेनी चाहिए। इसे ब्लड क्लॉटिंग का संकेत माना जा सकता है।
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सांस की समस्या - फोटो : iStock
सांस की दिक्कत

ब्लड क्लॉटिंग के कारण ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह, प्रभावित हो सकता है, जिसके कारण सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है। यदि आपको भी अस्पष्ट कारणों के चलते पिछले कुछ समय से सांस की समस्याओं का अनुभव होता आ रहा है तो इस बारे में डॉक्टर से संपर्क जरूर करें।

फेफड़े में बनने वाले रक्त के थक्कों के कारण सांस लेने में जटिलता आ सकती है, इस पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो गंभीर स्थितियों में यह जानलेवा समस्याओं का भी कारण बन सकती है।

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फेफड़े में ब्लड क्लॉटिंग - फोटो : iStock
रक्त के थक्के बनने के इन लक्षणों के बारे में भी जानिए

रक्त के थक्कों के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि रक्त का थक्का शरीर के किस हिस्से में है। शुरुआती संकेत पर ध्यान देकर स्थिति को गंभीर रूप लेने से बचाया जा सकता है। 
  • पेट में: पेट में दर्द, जी मिचलाना और उल्टी।
  • फेफड़ों में: सांस की तकलीफ, गहरी सांस लेने में दर्द और हृदय गति में वृद्धि।
  • मस्तिष्क में: बोलने में परेशानी, दृष्टि संबंधी समस्याएं, दौरे पड़ना, शरीर में लकवा या सिरदर्द की समस्या।
  • हृदय में: सीने में दर्द, बहुत अधिक पसीना आना, सांस की तकलीफ, बाएं हाथ में दर्द।
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वॉक करने के क्या लाभ हैं? - फोटो : Pixabay
रक्त के थक्कों से बचाव के उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर दिनचर्या और खानपान पर ध्यान दे दिया जाए तो रक्त के थक्के बनने जैसी दिक्कतों से बचाव किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले एक ही स्थान पर ज्यादा देर बैठे रहने की आदत छोड़िए। थोड़ी-थोड़ी देर पर इधर-उधर घूमना बहुत आवश्यक है।

नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि, व्यायाम-योग की आदत बनाएं। धूम्रपान जैसी आदतों से परहेज करें, इसके कारण जटिलताएं बढ़ सकती हैं। सबसे खास बात, स्वस्थ वजन पर विशेष ध्यान दें, अधिक वजन वालों में ब्लड क्लॉटिंग का जोखिम बढ़ जाता है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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