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कोरोना के बीच भारत में ब्लैक फंगस संक्रमण का खतरा कितना भयानक? जानिए इसके लक्षण

Thu, 24 Dec 2020 02:05 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दिल्ली से लेकर गुजरात के अहमदाबाद और मुंबई के अस्पतालों में बीते कुछ दिनों से एक दुर्लभ संक्रमण ब्लैक फंगस के मामले सामने आ रहे हैं। फंगस से संक्रमित होने वाले व्यक्ति को दो दिनों तक इलाज न मिलने पर उसकी आंखों की रोशनी जाने के साथ-साथ उसकी मौत भी हो सकती है। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में ब्लैक फंगस इंफेक्शन यानी म्यूकॉरमाइकोसिस बीमारी का सबसे पहला मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली के मैक्स, अपोलो, और फोर्टिस जैसे कई अस्पतालों में भी ब्लैक फंगस के मरीज पहुंचना शुरू हो चुके हैं, जिनमें से कई मरीजों की मौत भी हो चुकी है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कितना खतरनाक है ये फंगस

कोरोना वायरस से संक्रमित और ठीक होने वाले लोगों के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभरे इस फंगस ने लोगों के बीच एक डर पैदा कर दिया है। सर गंगाराम अस्पताल से जुड़े वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मनीष मुंजाल मानते हैं कि ये एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन इससे डरने की जरूरत नहीं है। वे कहते हैं, 'ब्लैक फंगस या म्यूकॉरमाइकोसिस कोई नई बीमारी नहीं है। ये नाक, कान और गले ही नहीं, शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचाती है, लेकिन बीते कुछ दिनों से ये बीमारी एक बड़ा रूप अख्तियार कर रही है, क्योंकि ये बीमारी इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने की वजह से होती है।'

पहले हम ये बीमारी कीमोथेरेपी, अनियंत्रित डायबिटीज, ट्रांसप्लांट मरीजों, और बुजुर्ग लोगों में देखते थे, लेकिन कोविड के बाद को-मॉर्बिडिटी और ज्यादा स्टेरॉइड लेने वाले मरीजों में भी ये बीमारी नजर आने लगी है।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शरीर पर किस तरह हमला करता है फंगस 

डॉ. मुंजाल बताते हैं, 'ये बीमारी छुआ-छूत से नहीं फैलती है, लेकिन ये फंगस हवा में रहता है। यही आपको फफूंदी की शक्ल में ब्रेड पर और पेड़ के तनों पर काले रूप में दिखती है। ये फंगस आपकी नाक से होते हुए बलगम में मिलकर आपकी नाक की चमड़ी में चला जाता है। इसके बाद ये बीमारी बहुत तेजी से फैलती हुई सब कुछ खराब करते हुए दिमाग तक चली जाती है। इसमें मृत्यु दर 50 प्रतिशत है।' 

इसके बावजूद डॉ. मुंजाल समेत अन्य डॉक्टर मानते हैं कि इस बीमारी से डरने की जरूरत नहीं है। स्टार इमेजिंग लैब के निदेशक डॉ. समीर भाटी बताते हैं, 'हमें ये समझने की जरूरत है कि ये कोई नई बीमारी नहीं है। ये बीमारी पहले से हमारे बीच मौजूद थी। ये भी जानने की जरूरत है कि इससे अनियंत्रित डायबिटीज वाले लोगों को खतरा है। इसके साथ ही ट्रांसप्लांट वाले और आईसीयू में भर्ती मरीजों को भी खतरा है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही कम होती है।'  

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ब्लैक फंगस का कोविड कनेक्शन 

इस फंगस से संक्रमित होने वाले लोगों में कई लोग कोरोना की जंग लड़कर भी आए हैं। दिल्ली के मैक्स अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संजय सचदेवा बताते हैं, 'हमारे पास ब्लैक फंगस के जो मरीज आ रहे हैं, उनमें से ज्यादातर पहले से डायबिटीज के मरीज हैं, कुछ स्टेरॉइड ले रहे होते हैं, लेकिन ज्यादातर कोविड से ठीक होने के बाद आ रहे हैं। तीन मरीज हमारे पास कोविड संक्रमित रहते हुए आए हैं, जिनमें से दो की मौत हो चुकी है। ज्यादातर मरीज हमारे पास जो आ रहे हैं, वो कहते हैं कि उन्हें आंख से दिख नहीं रहा है, कोई कहता है कि आंखों से धुंधला दिख रहा है। फंगस की वजह से आंख पर सूजन आ जाती है जिसके एक-दो दिन में ही आंखों की रोशनी काफी कम हो जाती है। ज्यादातर मरीज तो अपनी आंखों की रोशनी खो चुके हैं।' इसके साथ ही डॉ. सचदेवा बताते हैं कि जो लोग भी कोविड से रिकवर हुए हैं, स्टेरॉइड लेते हैं और डायबेटिक हैं, उन्हें सिर में दर्द होने पर डॉक्टरी मदद लेनी चाहिए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
संक्रमण ठीक कैसे हो सकता है? 

इस बीमारी के इलाज के लिए लोगों को कई कई दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है। ब्लैक फंगस के इलाज की प्रक्रिया समझाते हुए डॉ. मनीष मुंजाल कहते हैं, 'जब हमारे पास मरीज आते हैं, तो हम सबसे पहले ये सुनिश्चित करते हैं कि ये ब्लैक फंगस ही है। ये सुनिश्चित करने के बाद बहुत स्ट्रान्ग एंटी-फंगस दवाएं देनी पड़ती हैं, क्योंकि जिन लोगों को ये होती है, उनके लिए ये बहुत खतरनाक होती है। अगर दवाई से ठीक हो जाता है तो सही है, नहीं तो हमें हर उस हिस्से को काटना पड़ता है जिसे फंगस ने नुकसान पहुंचाया होता है, क्योंकि वो हिस्सा गैंगरीन जैसा हो जाता है जिसके पीछे फंगस छिपा होता है और शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचने लगता है। इसका इलाज काफी महंगा होता है और इसके लिए काफी दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ता है और कई लोगों ने इस वजह से अपनी जान भी गंवाई है। ऐसे में ये बीमारी काफी खतरनाक है।'  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बीमारी से बचाव कैसे संभव है? 

डॉ. भाटी बताते हैं कि लोगों को इस बीमारी से कोविड की तरह घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इस बीमारी का इलाज पहले से मौजूद है। लेकिन सवाल ये उठता है कि इस बीमारी का शिकार होने पर आपको क्या करना चाहिए। डॉ. मुंजाल बचाव की टिप्स देते हुए कहते हैं, 'जितना जल्दी लोगों को पता चल जाए, उन्हें उतनी ही जल्दी कदम उठाने चाहिए। जिन्होंने स्टेरॉइड वगैरह ली है, उन्हें अपने लक्षण पहचानने चाहिए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
फंगस नाक में जाने के बाद कुछ इस तरह के लक्षण सामने आ सकते हैं- 
  • नाक की अंदरुनी दीवारों पर सूखापन आना
  • नाक के अंदर काली और भूरे रंग की पपड़ियां जमना
  • नाक बंद होना शुरू हो जाना
  • ऊपर वाले होठों और गालों का सुन्न होना शुरू हो जाना
  • आंखों में सूजन आना
  • आंखों का लाल होना
इनमें से किसी भी तरह के लक्षण सामने आने पर लोगों को अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 
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