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Bird Flu: क्या फिर बढ़ने लगा कोराना से भी खतरनाक माने जा रहे संक्रमण का खतरा? कौओं की मौत ने बढ़ाई चिंता

Tue, 10 Feb 2026 07:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

तमिलनाडु के डिंडीगुल में बढ़ी कौओं की मौतों ने लोगों को डरा दिया है। कई रिपोर्ट्स में चिंता जताई जा रही थी कि कहीं ये बर्ड फ्लू का प्रकोप तो नहीं है। इसपर स्वास्थ्य अधिकारियों ने अब स्पष्ट किया है। आइए इस बारे में जान लेते हैं।
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बर्ड फ्लू का खतरा - फोटो : Freepik.com
पिछले कुछ वर्षों की मेडिकल रिपोर्ट्स पर नजर डालें तो पता चलता है कि कई तरह की संक्रामक बीमारियों ने लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कोरोनावायरस का संक्रमण हो या मंकीपॉक्स, निपाह वायरस हो या पिछले महीनों में तेजी से बढ़ा इंफ्लूएंजा वायरस का नया स्ट्रेन, ये सभी विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण रहे हैं।

H5N1 वायरस या बर्ड फ्लू का खतरा भी हाल के वर्षों में काफी तेजी से बढ़ता देखा गया है। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट्स में हम बताते रहे हैं कि ये संक्रमण पक्षियों के साथ-साथ अब इंसानों के लिए भी कितना खतरनाक हो सकता है। 

भारत में भी बर्ड फ्लू के मामले गंभीर चिंता का कारण रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स में एक बार फिर से कुछ राज्यों में बर्ड फ्लू को लेकर लोगों में डर देखा जा रहा है। तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले में पिछले कुछ दिनों में कौओं की मौतों में बढ़ोतरी रिपोर्ट की गई है, जिसको लेकर लोगों में काफी डर बना हुआ है। क्या बर्ड फ्लू का प्रकोप फिर से बढ़ रहा है? आइए समझते हैं।
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बर्ड फ्लू (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI
कौओं की मौत ने बढ़ाई लोगों की चिंता

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डिंडीगुल जिले में लोगों ने पिछले कुछ दिनों में कौओं की बढ़ती मौत की खबरों को लेकर बर्ड फ्लू का चिंता जताई है। खबरों के मुताबिक अकेले 8 फरवरी को करीब छह से सात कौओं की अचानक मौत हो गई, जिससे लोगों में चिंता की स्थिति बन गई कि कहीं ये बर्ड फ्लू की वजह से तो नहीं है?

हालांकि, मंगलवार को एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि मीडिया में जितनी मौतें बताई जा रही हैं, उतनी नहीं हुई हैं। बर्ड फ्लू को लेकर चिंता की जरूरत नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि एक या दो कौओं की मौत हुई है, लेकिन यह वैसा नहीं है जैसा कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में 100 से ज्यादा बताया गया है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, लोगों को स्वास्थ्य को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। हमने जानवरों के डॉक्टरों को बता दिया है जिन्होंने (मरे हुए कौओं से) कुछ सैंपल इकट्ठा किए हैं और मौत के कारणों की जांच कर रहे हैं।
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बर्ड फ्लू की वापसी? - फोटो : Freepik.com
इससे पहले 6 फरवरी को, तमिलनाडु सरकार ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कौओं की हो रही मौत की खबरों के बाद अलर्ट जारी किया था, जिसने एवियन इन्फ्लूएंजा के फैलने की चिंता बढ़ा दी थी। पशुपालन विभाग ने अधिकारियों को कौओं, पक्षियों और कमर्शियल पोल्ट्री में किसी भी तरह की असामान्य बीमारी या मौत का पता लगाने के लिए निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया था।

आंध्र प्रदेश में बर्ड फ्लू के मामले

तमिलनाडु के अलावा आंध्र प्रदेश में भी बर्ड फ्लू को लेकर लोगों में चिंता देखी जा रही है। खबरों के मुताबिक आंध्र प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पिछले 3-4 दिनों में करीब 90 पक्षियों की मौतों ने बर्ड फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों को सावधान किया है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि शनिवार (7 फरवरी) को करीब 40 और रविवार को 50 पक्षियों की मौत हुई। अधिकारियों ने सैंपल को परीक्षण के लिए भेजा था। भोपाल के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज (NIHSAD) ने जांच में एवियन इन्फ्लूएंजा के मामलों की पुष्टि की है। 
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एच5एन1 का बढ़ता संक्रमण - फोटो : Freepik.com
कोरोना से भी खतरनाक माना जाता है ये संक्रमण

एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1 वायरस) जिसे बर्ड फ्लू भी कहा जाता है, इसमें हुए म्यूटेशनों को अध्ययन में कोरोना से भी खतरनाक बताया जाता रहा है। हाल ही में बर्ड फ्लू के नए म्यूटेशनों को लेकर एक ब्रीफिंग के दौरान 'नई महामारी की आशंका' के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए विशेषज्ञों ने अलर्ट जारी किया था। वैज्ञानिकों के अनुसार, वायरस एक ऐसे बिंदु के करीब पहुंच रहा है जहां यह दुनियाभर में महामारी ला सकता है।

पिट्सबर्ग में जाने-माने बर्ड फ्लू विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कुचिपुड़ी ने चेतावनी दी थी कि एच5एन1 अब इंसानों के लिए भी खतरा बढ़ाता जा रहा है, इसकी मृत्युदर काफी अधिक हो सकती है। इसी क्रम में  बर्ड फ्लू के दुर्लभ स्ट्रेन (H5N5) के कारण इंसानों में पहली मौत दर्ज की गई थी।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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