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जानें कोवीशील्ड वैक्सीन की दोनों खुराक में क्यों रखा गया है 12 हफ्तों का गैप? अन्य देशों में कितना है डोज में अंतराल

Fri, 14 May 2021 11:29 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज के अंतराल को बढ़ाया गया - फोटो : iStock
देश में कोरोना की बढ़ती रफ्तार पर काबू पाने के लिए सरकार ने टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया है। टीकाकरण को लेकर बनाए गए सरकारी पैनल ने कोवीशील्ड वैक्सीनेशन की डोज के अंतराल को बढ़ाकर 12-16 हफ्ते करने का सुझाव दिया था, जिसे अब केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इसका मतलब यह है कि अब आपको कोवीशील्ड  वैक्सीन की पहली डोज के बाद दूसरी के लिए डेढ़ माह नहीं, बल्कि करीब तीन से साढ़े तीन महीनों तक का इंतजार करना होगा।
गौरतलब है कि डोज के अंतर में बदलाव सिर्फ कोविशील्ड वैक्सीन के लिए ही किया गया है, कोवैक्सीन की दोनों डोज पहले की ही तरह चार से छह सप्ताह के अंतराल पर लगाई जाती रहेगी। आइए विशेषज्ञों से जानते हैं कि कोवीशील्ड वैक्सीन की दोनों खुराक के बीच बढ़े अंतराल का क्या प्रभाव देखने को मिल सकता है?
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पहली डोज के बाद अब करना होगा 12 से 16 हफ्ते का इंतजार - फोटो : iStock
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया द्वारा दी गई प्रारंभिक अनुमति के अनुसार, कोवैक्सीन की पहली से दूसरी खुराक के बीच का अंतराल चार से छह सप्ताह जबकि कोवीशील्ड वैक्सीन की खुराक में यह अंतराल छह से आठ सप्ताह का होना चाहिए। अब कोवीशील्ड के इस अंतराल को और बढ़ाते हुए 12 से 16 हफ्ते कर दिया गया है। तीन महीने में यह दूसरी बार है जब कोवीशील्ड की डोज के अंतराल को बढ़ाया गया है। इससे पहले मार्च में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने 28 दिनों के अंतराल को बढ़ाकर छह-आठ सप्ताह करने की बात की थी।
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स्वास्थ्य मंत्रालय ने डोज के अंतराल के बढ़ाने की पुष्टि की - फोटो : पीटीआई
क्या कहते हैं वैक्सीन निर्माता कंपनी के सीईओ
कोवीशील्ड वैक्सीन की निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वैक्सीन की डोज में बढ़ाया गया अंतराल इसकी प्रभावकारिता और प्रतिरक्षात्मकता, दोनों ही दृष्टिकोणों से फायदेमंद है। अंतर को बढ़ाने का फैसला वैज्ञानिक दृष्टि से अच्छा है। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने ट्वीट के माध्यम से भी अंतराल को बढ़ाने की पुष्टि की है।

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अंतराल बढ़ाने बढ़ जाती है वैक्सीन की इफेकेसी - फोटो : iStock
वैक्सीन की बढ़ जाएगी प्रभाविकता
अमर उजाला से बातचीत में आकाश हेल्थकेयर के डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनल मेडिसिन में सीनियर कंसल्टेंट डॉ विक्रमजीत सिंह ने इस निर्णय को सेहत के हिसाब से बेहद फायदेमंद बताया है। डॉ विक्रमजीत कहते हैं कि वैक्सीन की पहली डोज के बाद अगर दूसरी डोज 4 हफ्तों के बाद दी जाती है तो इस प्रभाविकता 65 फीसदी के करीब देखी गई है, वहीं अगर इस गैप को 8 से 12 हफ्तों का कर दिया जाए तो वैक्सीन की प्रभाविकता 80 फीसदी के करीब की हो जाती है। इस दृष्टि से यह फैसला काफी बेहतर है।
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इम्यूनिटी और मजबूत करने में मदद मिलेगी - फोटो : PTI
इम्यूनिटी बढ़ाने के हिसाब से बेहतर फैसला
इसी तरह दिल्ली में कोविड को लेकर काम कर रहे स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ रविन्द्र डबास कहते हैं कि आईसीएमआर पहले से ही डोज के अंतराल को बढ़ाने का सुझाव देता रहा है। अंतराल बढ़ाने को लेकर कई अध्ययनों में भी दावा किया जाता रहा है कि इससे इम्यूनिटी और मजबूत करने में मदद मिल सकेगी। यह फैसला कई मायनों में फायदेमंद हो सकता है।
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फाइजर वैक्सीन में भी है 12 हफ्ते का अंतराल - फोटो : pixabay
विदेशों में कितना अंतराल है?
यहां आपके लिए जानना जरूरी है कि भारत से पहले कई अन्य देशों ने भी वैक्सीन के दोनों डोज में बड़ा अंतर रखने का फैसला किया हुआ है। ब्रिटेन में लोगों को दी जा रही फ़ाइज़र वैक्सीन के दोनों डोज का अंतर 12 हफ्तों का है। विशेषज्ञ मानते हैं कि पहले से दूसरे डोज के बीच तीन से साढ़े तीन महीनों का अंतर रखकर शरीर में इम्यूनिटी को प्रभावी ढंग से बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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नोट: यह लेख स्वास्थ्य मंत्री के ट्वीट और तमाम मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है। लेख को मेडिकली अप्रूव करने के लिए आकाश हेल्थकेयर के डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन में सीनियर कंसल्टेंट डॉ विक्रमजीत सिंह और दिल्ली के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ राजीव डबास से बातचीत के अंश को भी शामिल किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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