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गर्भावस्था में माओं को भूलकर भी नहीं लेनी चाहिए ये गोली, बच्चों को हो जाती है दिल- दिमाग की बीमारी

Thu, 20 Feb 2020 04:36 PM IST
ललित फुलारा लाइफस्टाइल डेस्क,अमर उजाला,नई दिल्ली
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एक नए अध्ययन का कहना है कि अगर महिलाएं गर्भावस्था में कुछ कॉमन एंटीबायोटिक लेती हैं तो शिशुओं में जन्म दोष का जोखिम बढ़ जाता है। इन एंटीबायोटिक को लेने से पैदा होने वाले शिशुओं में दिल और दिमाग की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक्स की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और यह बात कही है। पेनिसिलिन के विकल्प के तौर पर ली जाने वाली ये एंटीबायोटिक त्वचा, फेफड़ों और जननांगों के संक्रमण के लिए ली जाती हैं।

 
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Pregnancy - फोटो : पेक्सेल्स
मैक्रोलाइड  एंटीबायोटिक्स आमतौर पर फेफड़ों और पेशाब के ट्रैक के संक्रमण के इलाज के लिए ली जाती हैं। इन गोलियों को लेने से पैदा होने वाले शुिशुओं में दिल एवं दिमाग के साथ ही जननांगों का जन्मदोष का जोखिम बढ़ जाता है। 
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जबकि पेनिसिलिन सुरक्षित एंटीबायोटिक है और महिलाओं को गर्भवती होने के दौरान इसे ही लेना चाहिए, अगर इसके विकल्प के तौर पर मैक्रोलाइड  ग्रुप की दूसरी एंटीबायोटिक ली जाती हैं तो ये पैदा होने वाले नवजात शुिशुओं के लिए स्वास्थ्य जोखिम बन सकती हैं।
 

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यह अध्ययन यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन ने किया है। इसमें बताया गया है कि पेनिसिलिन के विकल्प के तौर पर गर्भवती महिलाओं को एरिथ्रोमाइसिन, क्लियरिथ्रोमाइसिन और एजिथ्रोमाइसिन आदि एंटीबायोटिक नहीं लेनी चाहिए।
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इस अध्ययन में उन महिलाओं को शामिल किया गया जिन्होंने गर्भवती होने के दौरान पेनिसिलिन और पेनिसिलिन के विकल्प के तौर पर मैक्रोलाइड ग्रुप की एंटीबायोटिक ली। अध्ययन में देखा गया कि जिन महिलाओं ने मैक्रोलाइड ली उनको पेनिसिलिन के मुकाबले 55 फीसदी जोखिम ज्यादा रहा। इसका नतीजा यह निकला कि मैक्रोलाइड  लेने वाली गर्भवती महिलाओं के हजार शिशुओं में से 18 शिशुओं को जन्मदोष निकला।

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