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Covid-19: चीन में लॉकडाउन का कारण बने ये वैरिएंट्स भारत की भी बढ़ा रहे हैं चिंता, जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

Sun, 16 Oct 2022 02:28 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के नए वैरिएंट्स ने बढ़ाई चिंता - फोटो : istock
चीन में कोरोना का एक बार फिर से बढ़ता संक्रमण वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बना हुआ है। चीन के शंघाई में पिछले 15 दिनों में हालात इस कदर बिगड़े हैं कि वहां कुछ हिस्सों में आंशिक लॉकडाउन तक लगाने की नौबत आ गई है। चीन के साथ कुछ यूरोपीय देशों में भी हालात बिगड़ते हुए देखे जा रहे हैं। चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां दो प्रमुख कोविड वैरिएंट्स बीए.5.1.7 और बीएफ.7 के कारण संक्रमण के मामलों में इस कदर वृद्धि देखी जा रही है, प्रारंभिक अध्ययनों में इन वैरिएंट्स को अत्यधिक संक्रामक माना जा रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं, यह वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा देने वाले वैरिएंट्स हैं, जिसके कारण आने वाले दिनों में एक और संक्रमण की लहर को लेकर चिंता बढ़ रही है। 

हालिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारत में भी BF.7 का पहला मामला पाया गया है। गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार इस वैरिएंट के कारण तेजी से संक्रमण बढ़ने की आशंका है। देश में अगले हफ्ते त्योहार भी हैं ऐसे में उस दौरान बाजारों में होने वाली भीड़ को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि किसी को भी मास्क लगाना नहीं छोड़ना चाहिए और लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए। आइए जानते हैं कि ये नए वैरिएंट्स किस प्रकार की समस्याओं को कारण बन सकते हैं? भारत में इसे लेकर किस प्रकार के सावधानी की आवश्यकता है?
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कोरोना के नए वैरिएंट्स की संक्रामकता अधिक - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार प्रारंभिक शोध में BA.5.1.7 और BF.7 जैसे वैरिएंट्स की संक्रामता दर काफी अधिक देखी गई है। इसके अलावा भारत में कोरोना के एक और नए वैरिएंट XBB के कारण भी संक्रमण के मामलों में उछाल देखा जा रहा है।  XBB वैरिएंट, ओमिक्रॉन के दो वैरिएंट्स BA.2.75 और BA.2.10 के बीच पुनः संयोजन से उत्पन्न हुआ है। फिलहाल इसे अब तक के सभी कोरोना वैरिएंट्स की तुलना में अधिक संक्रामक पाया गया है। भारत में अब तक इसके कारण 70 से अधिक लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये नए वैरिएंट्स चिंता बढ़ाने वाले हैं। देश में त्योहारों और सर्दी के मौसम की भी शुरुआत हो रही है, जिसमें पिछले दो साल से संक्रमण बढ़ता हुआ देखा गया है। सभी लोगों को सख्ती से सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
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भारत में कोरोना संक्रमण के मामले - फोटो : Pixabay
कोरोना के BF.7 वैरिएंट के बारे में जानिए

गुजरात जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ माधवी जोशी ने एक रिपोर्ट में बताया कि BF.7 भारत में भी पाया गया है,  यह ओमिक्रॉन फैमिली की ही सब-वैरिएंट है। ओमिक्रॉन को बहुत गंभीर समस्याओं वाला नहीं पाया गया है ऐसे में इस सब-वैरिएंट को लेकर ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। हम वैरिएंट और इसके डायनामिक को देख रहे हैं।

भारतीय आबादी का टीकाकरण हो चुका है, लोगों में अच्छी प्रतिरक्षा का निर्माण हुआ है, ऐसे में इससे बहुत खतरे की आशंका नहीं है। फिर भी हम लोगों से मास्क पहनने, इकट्ठा होने से बचने और हाथ की स्वच्छता का पालन करने की अपील करते हैं।
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कोरोना संकट से लगातार बचाव की आवश्यकता - फोटो : istock
कितना गंभीर हो सकता है BA.5.1.7 वैरिएंट?

मीडिया रिपोर्टस में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोरोना के जिस BA.5.1.7 वैरिएंट के कारण चीन में हालात बिगड़ते हुए देखे जा रहे हैं, वह काफी अधिक संक्रामकता दर वाला पाया गया है। प्रारंभिक शोध बताते हैं कि अब तक के अन्य वैरिएंट्स की तुलना में इसमें हुए म्यूटेशन, आसानी से प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा देकर संक्रमण का कारण बनते हुए देखे जा रहे हैं। इस वैरिएंट के बारे में विस्तार से समझने के लिए अध्ययन किया जा रहा है, फिलहाल इसके संक्रमण को लेकर लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

कोरोना के बढ़ते नए वैरिएंट्स के खतरे को लेकर वैज्ञानिकों ने लोगों को अलर्ट रहते हुए सावधानी बरतते रहने की अपील की है। शोधकर्ताओं का कहना है कि फिलहाल राहत की बात यह है कि ये नए वैरिएंट्स गंभीर रोग का कारण बनते हुए नहीं देखे जा रहे हैं। इसमें वैक्सीनेशन का बड़ा योगदान माना जा रहा है। सर्दी के मौसम में कोरोना संकट से बचे रहने के लिए सभी लोगों को लगातार कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहना चाहिए।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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