फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आयुर्वेद का चमत्कार: इस दवा से एक हफ्ते में कम हो सकते हैं कोरोना के लक्षण, पोस्ट कोविड में भी असरदार

Thu, 08 Jul 2021 05:32 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
कोरोना की दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : getty images
आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति सदियों से भारत का विश्वास रही है। अनेक ग्रन्थों में इलाज के लिए आयुर्वेद का जिक्र मिलता है। रामयण काल में लक्ष्मण को जीवित करने के लिए जिस संजीवनी का जिक्र किया गया है, वह भी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति पर आधारित थी। यानी कि माना जा सकता है कि आयुर्वेद में ऐसे गुण हैं जो लोगों की जान बचा सकते हैं। कोरोना की विपरीत परिस्थितियों में, जब पारंपरिक चिकित्सा व्यवस्था पर अचानक से दवाब अधिक बढ़ गया, उस समय भी वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में आयुर्वेद  से लोगों ने लाभ प्राप्त किए हैं।
कोरोना से लोगों को सुरक्षित रखने और जान बचाने के लिए आयुर्वेद विशेषज्ञों ने एक ऐसी दवा का निर्माण किया है जिससे न सिर्फ कोरोना के लक्षणों को ठीक करने का दावा किया जा रहा है, साथ ही कहा जा रहा है कि इसके सेवन से एक हफ्ते के भीतर कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव से निगेटिव आ सकती है।
आयुर्वेद चिकित्सा से जुड़े विशेषज्ञ कोरोना में इस दवा को वरदान के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें प्रयोग की गई औषधियां इतनी प्रभावी हैं कि इसका सेवन करने वाले लोगों को पोस्ट कोविड सिंड्रोम की समस्याओं से भी सुरक्षित माना जा सकता है। आइए इस लेख में कोरोना की इस चमत्कारी दवा के बारे में विस्तार से जानते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
कोरोना की आयुर्वेदिक दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
कोरोना की दवा आयुष-64
अमर उजाला से बातचीत के दौरान आयुर्वेद विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना काल में आयुष मंत्रालय द्वारा पेश की गई दवा- आयुष 64 तमाम स्तर पर किए गए अध्ययनों में प्रभावी साबित हुई है। कोरोना के मरीज विशेषकर माइल्ड-मॉडरेट, इस दवा का सेवन करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं। आयुष 64 में प्रयोग की गई औषधियां शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ कोरोना के संक्रमण को कम करने में बेहद कारगर साबित हो सकती हैं। अध्ययन के दौरान कई रोगियों पर इसके स्पष्ट लाभ भी देखने को मिले हैं।  
विज्ञापन

3 of 5
आयुष 64, कोरोना की दवा - फोटो : PIB
आयुष-64 दवा कोरोना में लाभकारी
अमर उजाला से बातचीत में सीसीआरएएस के निदेशक जनरल बताते हैं कि आयुष 64 दवा कोरोना रोगियों के लिए वरदान मानी जा सकती है।  हाल के वर्षों में आयुष मंत्रालय ने प्रमाण आधारित चिकित्सा प्रस्तुत करने की दिशा में तेजी से काम किया है। आयुष मंत्रालय ने आयुष रिसर्च एंड डवेलपमेंट टास्क फोर्स का गठन किया है, इसे प्रो. भूषण पटवर्धन के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है। इस कमेटी ने कई सारी औषधियों का परीक्षण किया है। इसीक्रम में कोरोना के रोगियों के लिए आयुष-64 दवा पेश की गई। इस दवा के कई स्तर पर परीक्षण के दौरान लाभ देखने को मिले हैं।

4 of 5
आयुर्वेद में कोरोना की दवा (आयुष-64) - फोटो : PIB
एक हफ्ते में आरटी-पीसीआर टेस्ट निगेटिव
डॉ एन श्रीकांत बताते हैं कि आयुष-64 को लेकर किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि इस दवा का सेवन कोरोना के एसिम्टोमैटिक से लेकर माइल्ड-माडरेट रोगियों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। रोगियों को स्टैंडर्ड केयर के साथ आयुष-64 दवा देने से काफी लाभ के साक्ष्य मिले हैं। इस दवा को लेने से 6-7 दिनों में कोविड-19 के लक्षणों को कम होते देखा गया है। एक सप्ताह तक इस दवा का सेवन करने वाले लोगों का आरटी-पीसीआर भी निगेटिव आ गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
पोस्ट कोविड में भी काफी लाभदायक दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
पोस्ट कोविड में भी कारगर है यह दवा
डॉ एन श्रीकांत बताते हैं कि कई संस्थानों के साथ मिलकर कोरोना के इलाज के संबंध में अब तक 122 क्लीनिकल स्टडी किए जा चुके हैं। इसमें कोविड-19 जैसे रोगों की रोकथाम और मैनेजमेंट से संबंधित 60 अध्ययन शामिल हैं। इन अध्ययनों के दौरान रोगियों में आयुष-64 दवा के स्पष्ट लाभ देखने को मिले। इस दवा को लेकर किए गए अध्ययनों का प्री-प्रिंट भी प्रकाशित किया जा चुका है। खास बात यह है कि इस दवा से न सिर्फ कोरोना रोग को ठीक किया जा सकता है, साथ ही कोरोना के बाद रोगियों को होने वाली तमाम समस्याओं ( नींद और पेट की समस्या और तनाव-घबराहट) को भी इससे दूर किया जा सकता है।

-----------------------------
नोट: यह लेख असीसीआरएएस के निदेशक जनरल डॉ एन श्रीकांत द्वारा से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।  आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेदिक विद्यापीठ के साथ मिलकर  किए गए पहल के क्रम में आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों का पैनल शामिल हुआ। इस लेख उसी चर्चा का अंश है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें